संदर्भ:
हाल ही में, भारत और मलेशिया ने रक्षा, व्यापार, सेमीकंडक्टर, डिजिटल तकनीक, ऊर्जा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए 11 समझौतों और समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं। ये समझौते दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के रणनीतिक विस्तार का प्रतीक हैं।
प्रमुख समझौते:
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- इन समझौतों के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- रक्षा और सुरक्षा: समुद्री सहयोग को बढ़ावा देना, खुफिया जानकारी साझा करना, आतंकवाद विरोधी प्रयास और संयुक्त क्षमता निर्माण।
- व्यापार और निवेश: द्विपक्षीय व्यापार को प्रोत्साहन, स्थानीय मुद्रा में व्यापार निपटाने की व्यवस्था (Local Currency Settlement), और इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस , नवीकरणीय ऊर्जा एवं स्वास्थ्य सेवा में मलेशियाई निवेश की सुविधा।
- तकनीक और सेमीकंडक्टर: उन्नत विनिर्माण के लिए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एक-दूसरे को एकीकृत करने हेतु सहयोग।
- बहुपक्षीय सहयोग: आसियान , संयुक्त राष्ट्र , वित्तीय कार्रवाई कार्य बल और हिंद महासागर रिम एसोसिएशन जैसे मंचों पर संयुक्त पहल।
- रक्षा और सुरक्षा: समुद्री सहयोग को बढ़ावा देना, खुफिया जानकारी साझा करना, आतंकवाद विरोधी प्रयास और संयुक्त क्षमता निर्माण।
- इन समझौतों ने आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' (शून्य सहिष्णुता) के दृष्टिकोण को पुख्ता किया है, जिसमें दोनों देशों ने सीमा पार आतंकवाद और कट्टरपंथ की निंदा की है।
- इन समझौतों के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
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भारत-मलेशिया द्विपक्षीय संबंधों के बारे में:
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- ऐतिहासिक जुड़ाव: भारत और मलेशिया के बीच 2,000 से अधिक वर्षों का ऐतिहासिक संबंध है, जो व्यापार, धर्म, भाषा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से आकार लेता रहा है। संस्कृत और हिंदू-बौद्ध परंपराओं ने मलेशिया के ऐतिहासिक विकास को प्रभावित किया। भारत की स्वतंत्रता के तुरंत बाद राजनयिक संबंध स्थापित हुए और निरंतर राजनीतिक जुड़ाव के माध्यम से इन्हें बनाए रखा गया है।
- राजनीतिक और राजनयिक जुड़ाव: वर्ष 2024 में, बढ़ते राजनीतिक विश्वास को दर्शाते हुए इस रिश्ते को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' (Comprehensive Strategic Partnership) के स्तर पर उन्नत किया गया। उच्च स्तरीय यात्राओं, विदेश मंत्रालय स्तर के परामर्श और संयुक्त राष्ट्र एवं आसियान जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग ने राजनयिक संबंधों को मजबूत किया है। मलेशिया एक सुधारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करता है।
- व्यापार और आर्थिक सहयोग: मलेशिया आसियान क्षेत्र में भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 19.86 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। भारत के प्रमुख निर्यातों में पेट्रोलियम उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान और कार्बनिक रसायन शामिल हैं, जबकि आयात में वनस्पति तेल, मशीनरी और विद्युत उपकरण मुख्य हैं। मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) के किनारे मलेशिया की रणनीतिक स्थिति भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' और समुद्री कनेक्टिविटी पहल का समर्थन करती है।
- रक्षा और सुरक्षा सहयोग: हिंद महासागर और भारत-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री पड़ोसी होने के नाते, दोनों देश नौवहन की स्वतंत्रता, समुद्री सुरक्षा, समुद्री डकैती और आतंकवाद को लेकर समान चिंताएँ साझा करते हैं। संयुक्त अभ्यास, क्षमता निर्माण की पहल और खुफिया जानकारी साझा करने के क्षेत्र में लगातार विस्तार हुआ है।
- प्रवासी संबंध: मलेशिया में भारतीय प्रवासियों की संख्या 20 लाख से अधिक है, जो वहां की राजनीति, व्यवसाय, शिक्षा और संस्कृति में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। शैक्षिक आदान-प्रदान, पर्यटन और सांस्कृतिक कूटनीति द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाती है।
- ऐतिहासिक जुड़ाव: भारत और मलेशिया के बीच 2,000 से अधिक वर्षों का ऐतिहासिक संबंध है, जो व्यापार, धर्म, भाषा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से आकार लेता रहा है। संस्कृत और हिंदू-बौद्ध परंपराओं ने मलेशिया के ऐतिहासिक विकास को प्रभावित किया। भारत की स्वतंत्रता के तुरंत बाद राजनयिक संबंध स्थापित हुए और निरंतर राजनीतिक जुड़ाव के माध्यम से इन्हें बनाए रखा गया है।
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महत्व:
ऐतिहासिक संबंधों के साथ मिलकर ये समझौते व्यापार, सुरक्षा, तकनीक और जन-संपर्क को शामिल करते हुए बहु-क्षेत्रीय सहयोग को दर्शाते हैं। ये समझौते दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की रणनीतिक उपस्थिति को मजबूत करते हैं, साथ ही क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक एकीकरण और वैश्विक शासन में सुधार के प्रति साझा प्रतिबद्धताओं को भी पुख्ता करते हैं।
