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Blog / 28 Feb 2026

भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026: आत्मनिर्भर संप्रभु कृत्रिम बुद्धिमत्ता की ओर कदम

संदर्भ:

हाल ही में भारत में 16–20 फरवरी 2026 तक एआई इम्पैक्ट समिट 2026 का आयोजन नई दिल्ली के भारत मंडपम में किया गया। इस ऐतिहासिक भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। इस समिट का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया, जिन्होंने समाज, शासन और आर्थिक विकास के लिए एआई की परिवर्तनकारी क्षमता पर बल दिया। इस कार्यक्रम में 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि, वैश्विक एआई अग्रणी, नीति-निर्माता, उद्योग नेता और नवप्रवर्तक शामिल हुए जो भारत के विकसित हो रहे एआई पारिस्थितिकी तंत्र की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

    • समिट के दौरान सर्वम एआई का भी उद्घाटन हुआ जो भारत के उन्नत मेड-इन-इंडिया एआई मॉडल और प्रौद्योगिकियों का उदाहरण है। इससे यह स्पष्ट है कि भारत एआई अपनाने से आगे बढ़कर एआई निर्माण की दिशा में अग्रसर है। सर्वम के योगदान भारत के संप्रभु, समावेशी और बहुभाषी एआई प्रणालियों पर ध्यान को दर्शाते हैं, जो विविध सामाजिक आवश्यकताओं की पूर्ति करते हुए विदेशी एआई अवसंरचना पर निर्भरता को कम करते हैं।

भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026

भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की अवधारणा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा प्रारंभ किए गए इंडिया एआई मिशन के अंतर्गत की गई थी, जिसका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों और जनसमूहों में भारत की एआई क्षमताओं को बढ़ावा देना है।

समिट में प्रधानमंत्री मोदी ने एआई के लिए भारत की मानव (M.A.N.A.V) दृष्टि प्रस्तुत की, जो मानव-केंद्रित तकनीकी एजेंडा को रेखांकित करती है-

Moral and Ethical Systems (नैतिक प्रणालियाँ)

Accountable Governance (जवाबदेह शासन)

National Sovereignty (राष्ट्रीय संप्रभुता)

Accessible and Inclusive AI (सुलभ और समावेशी एआई)

Valid and Legitimate Technologies (वैध और विश्वसनीय प्रौद्योगिकियाँ)

समिट की रूपरेखा तीन स्तंभों People, Planet और Progress पर आधारित थी, जिसमें सात कार्य समूह स्वास्थ्य, कृषि, जलवायु कार्रवाई, शिक्षा, आर्थिक विकास, समावेशन और नैतिक एआई शासन जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक परिणामों पर केंद्रित थे।

समिट का समापन न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन ऑन एआई इम्पैक्टके साथ हुआ, जिस पर 89 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने हस्ताक्षर किए। इस घोषणा में एआई तक समान पहुंच, राष्ट्रीय संप्रभुता के सम्मान और खुले, परस्पर-संगत पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने हेतु स्वैच्छिक सहयोग की पुष्टि की गई। इस बहुपक्षीय सहमति ने एआई के लोकतांत्रिक प्रसार, समावेशी विकास और विश्वसनीय तकनीकी तैनाती जैसे सिद्धांतों पर बल दिया।

 

सर्वम एआई: स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल और नवाचार

    • सर्वम एआई, समिट की प्रमुख नवाचारों में से एक के रूप में उभरा, जिसने स्थानीय संदर्भों में निहित आधारभूत एआई प्रणालियाँ विकसित करने के भारत के प्रयास को रेखांकित किया। कंपनी ने कई स्वदेशी एआई मॉडल प्रस्तुत किए, जिनमें Sarvam-30B और Sarvam-105B बड़े भाषा मॉडल (LLMs) शामिल हैं। ये दोनों मॉडल मिक्सचर ऑफ़ एक्सपर्ट (Mixture of Experts- MoE) आर्किटेक्चर पर आधारित हैं, जिन्हें कुशल तर्क और बहुभाषी प्रदर्शन के लिए डिज़ाइन किया गया है।
    • ये मॉडल 22 से अधिक भारतीय भाषाओं में प्राकृतिक भाषा को संसाधित और उत्पन्न कर सकते हैं तथा अनुवाद, समझ, रचनात्मक लेखन और टूल उपयोग जैसे विविध कार्यों के लिए अनुकूलित हैं।
    • जहाँ अनेक वैश्विक एआई प्रणालियाँ मुख्यतः अंग्रेज़ी डेटा पर प्रशिक्षित हैं, वहीं सर्वम के मॉडल भारत की बहुभाषी विविधता और वास्तविक उपयोग पैटर्न को प्रतिबिंबित करते हैं। विशेष रूप से 105-बिलियन-पैरामीटर मॉडल यह दर्शाता है कि भारत एआई क्षमता और भाषाई पहुंच के अग्रिम स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का इरादा रखता है।
    • समिट में सर्वम ने सर्वम काज़े (Sarvam Kaze) भी प्रस्तुत किया- एआई-संचालित स्मार्ट ग्लासेस की एक श्रृंखला, जो दृश्य डेटा की व्याख्या कर वास्तविक समय में उपयोगकर्ताओं की सहायता कर सकती है। यह दृष्टि, भाषा और संदर्भ समझ को संयोजित करने वाली पहनने योग्य एआई तकनीकों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
    • फाउंडेशन मॉडल और हार्डवेयर के अतिरिक्त, सर्वम ने इंडसचैट ऐप भी लॉन्च किया, एक वेब और मोबाइल इंटरफेस, जो उपयोगकर्ताओं को टेक्स्ट और वॉइस के माध्यम से एआई प्रणालियों के साथ संवाद करने में सक्षम बनाता है। इंडस वास्तविक समय में सर्वम के मॉडलों के साथ संपर्क की सुविधा देता है और भारतीय भाषाओं को प्राथमिकता देता है, जो स्थानीय उपयोगकर्ताओं के लिए एआई को सुलभ और प्रासंगिक बनाने के भारत के लक्ष्य के अनुरूप है।

सर्वम और भारत के एआई पारिस्थितिकी तंत्र का रणनीतिक महत्व:

सर्वम एआई का उभरना कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण है:

    • संप्रभु एआई विकास: भारत की एआई रणनीति घरेलू रूप से विकसित, डेटा, आर्किटेक्चर और शासन पर पूर्ण नियंत्रण रखने वाली संप्रभु एआई प्रणालियों के निर्माण पर बल देती है। यह प्राथमिकता डिजिटल उपनिवेशवाद की आशंकाओं से प्रेरित है, जहाँ विदेशी एआई उपकरणों पर निर्भरता स्थानीय मूल्यों, डेटा गोपनीयता और तकनीकी स्वायत्तता को प्रभावित कर सकती है।
    • बहुभाषी और समावेशी एआई: सर्वम के फाउंडेशन मॉडल भारत की अनेक भाषाओं में सामग्री को समझने और उत्पन्न करने के लिए विकसित किए गए हैं, जिससे एआई तकनीकें अधिक समावेशी और सांस्कृतिक रूप से प्रासंगिक बनती हैं।
    • सीमित संसाधनों में उच्च प्रभाव वाला नवाचार: तुलनात्मक रूप से सीमित संसाधनों के साथ कार्य करते हुए भी सर्वम ने बड़े पैमाने पर नवाचार प्रदर्शित किया है। इंडिया एआई मिशन के अंतर्गत उपलब्ध कराई गई सब्सिडी युक्त कंप्यूट अवसंरचना का उपयोग कर उन्नत मॉडल और उपकरण विकसित किए गए जो यह दर्शाता है कि नीतिगत समर्थन और रणनीतिक अवसंरचना उच्च प्रभाव वाले परिणाम उत्पन्न कर सकती है।
    • हार्डवेयर और अनुप्रयोग: सर्वम के नवाचार केवल बड़े भाषा मॉडलों तक सीमित नहीं हैं। दृष्टि एआई, वॉइस सिस्टम, Kaze स्मार्ट ग्लासेस और एंटरप्राइज टूल्स जैसी तकनीकें शिक्षा, सहायक जीवन, पहुंच-योग्यता समाधान और कार्यप्रवाह स्वचालन में परिवर्तनकारी अनुप्रयोग प्रदान कर सकती हैं।

राष्ट्रीय और वैश्विक एआई एजेंडा:

    • भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ने यह दर्शाया कि भारत नवाचार, शासन और मानवीय मूल्यों के बीच संतुलन स्थापित करना चाहता है। यद्यपि Google, OpenAI और Anthropic जैसे वैश्विक एआई अग्रणी चर्चा के केंद्र में थे, भारत ने नैतिक उपयोग, डेटा संप्रभुता, पारदर्शिता और समान विकास को प्राथमिकता देने वाले सहयोगात्मक ढाँचों पर जोर दिया।
    • समिट में भारत की कंप्यूटिंग अवसंरचना में निवेश भी प्रदर्शित किया गया, डेटा केंद्रों में हजारों GPU की तैनाती, जो एआई अनुसंधान और प्रशिक्षण को गति प्रदान करती है तथा घरेलू स्टार्टअप्स के लिए सब्सिडी युक्त पहुंच उपलब्ध कराती है।
    • इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य, कृषि, शासन और जलवायु कार्रवाई जैसे क्षेत्रों में एआई फॉर पब्लिक गुडपर समिट का जोर इस व्यापक दृष्टि को दर्शाता है, जहाँ एआई केवल व्यावसायिक तकनीक नहीं, बल्कि सामाजिक चुनौतियों के समाधान का साधन है।

चुनौतियाँ:

हालाँकि भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 ने उल्लेखनीय प्रगति का संकेत दिया, फिर भी भारत के एआई पारिस्थितिकी तंत्र के सामने कई संरचनात्मक चुनौतियाँ मौजूद हैं।

    • अवसंरचना की सीमाएँ: पश्चिमी और पूर्वी एशियाई देशों की तुलना में भारत के पास अभी भी उच्च-स्तरीय कंप्यूटिंग अवसंरचना, उन्नत चिप निर्माण और बड़े पैमाने के डेटा केंद्रों की कमी है।
    • वैश्विक प्रतिस्पर्धा: Google, OpenAI, Anthropic जैसी स्थापित वैश्विक एआई कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करना भारतीय स्टार्टअप्स के लिए चुनौतीपूर्ण है।
    • प्रतिभा और अनुसंधान निवेश: उच्च स्तरीय एआई अनुसंधान के लिए दीर्घकालिक निवेश, विशेषज्ञ मानव संसाधन और विश्वविद्यालयउद्योग सहयोग की आवश्यकता है।
    • डेटा गोपनीयता और नियामक ढांचा: संप्रभु एआई मॉडल विकसित करने के साथ-साथ डेटा सुरक्षा, पारदर्शिता और नैतिक उपयोग सुनिश्चित करना एक जटिल कार्य है।
    • प्रोटोटाइप से जन-अपनयन तक: नवाचारों को प्रयोगशाला से निकालकर व्यापक सामाजिक और व्यावसायिक उपयोग में लाना अभी भी एक बड़ी चुनौती है।

आगे की राह:

भारत को अपने एआई विज़न को साकार करने के लिए बहु-आयामी रणनीति अपनानी होगी।

    • अवसंरचना में निवेश बढ़ाना: उन्नत GPU, डेटा केंद्रों और सेमीकंडक्टर निर्माण में दीर्घकालिक निवेश से घरेलू एआई विकास को मजबूती मिलेगी।
    • सार्वजनिकनिजी भागीदारी को प्रोत्साहन: सरकार, उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को सुदृढ़ कर नवाचार को गति दी जा सकती है।
    • संप्रभु और बहुभाषी एआई पर बल: स्थानीय भाषाओं और सांस्कृतिक संदर्भों पर आधारित एआई प्रणालियों को विकसित करना डिजिटल समावेशन को सुनिश्चित करेगा।
    • नैतिक और पारदर्शी शासन ढांचा: एआई के सुरक्षित, जवाबदेह और मानव-केंद्रित उपयोग के लिए स्पष्ट नीतिगत दिशानिर्देश और नियामक तंत्र विकसित किए जाने चाहिए।
    • एआई फॉर पब्लिक गुड: स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और जलवायु जैसे क्षेत्रों में एआई आधारित समाधान विकसित कर सामाजिक प्रभाव को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

इन प्रयासों के माध्यम से भारत न केवल अपनी तकनीकी स्वायत्तता को सुदृढ़ कर सकता है, बल्कि वैश्विक एआई परिदृश्य में एक जिम्मेदार और समावेशी नेतृत्वकर्ता के रूप में उभर सकता है।

निष्कर्ष:

भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 और सर्वम एआई द्वारा प्रदर्शित प्रगति, भारत की एआई यात्रा में एक निर्णायक मोड़ का प्रतीक है। स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल को प्रोत्साहन देकर, नैतिक और समावेशी एआई को बढ़ावा देकर, तथा न्यू दिल्ली घोषणा के माध्यम से वैश्विक सहमति निर्मित कर, भारत स्वयं को एक जिम्मेदार एआई नवप्रवर्तक के रूप में स्थापित कर रहा है। जैसे-जैसे तकनीक विकसित होगी, संप्रभुता, समावेशन और मानव-केंद्रित एआई पर भारत का ध्यान उसकी अगली डिजिटल क्रांति के नेतृत्व की आकांक्षा का केंद्रीय तत्व बना रहेगा।

UPSC/PCS मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न: भारत एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के संदर्भ में संप्रभु एआईकी अवधारणा की व्याख्या कीजिए। भारत के लिए इसकी आवश्यकता क्यों है?