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Blog / 06 Aug 2026

भारत बन सकता है विश्व की किफायती देखभाल सेवाओं का हब

सन्दर्भ:

हाल ही में, नीति आयोग (NITI Aayog) ने एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें कहा गया है कि भारत एक कुशल देखभालकर्ता (Caregiver) कार्यबल विकसित करके विश्व की किफायती देखभाल सेवाओं की राजधानी के रूप में उभरने की क्षमता रखता है। रिपोर्ट में घरेलू एवं वैश्विक स्तर पर देखभाल सेवाओं की मांग को पूरा करने के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण, संस्थागत समर्थन तथा नीतिगत सुधारों के माध्यम से देखभाल अर्थव्यवस्था (Care Economy) को सुदृढ़ बनाने पर बल दिया गया है।

देखभाल अर्थव्यवस्था (Care Economy) क्या है?

देखभाल अर्थव्यवस्था में बच्चों, बुजुर्गों, दिव्यांग व्यक्तियों तथा बीमार लोगों की देखभाल से संबंधित सभी वेतनभोगी (Paid) एवं अवैतनिक (Unpaid) गतिविधियाँ शामिल होती हैं। इसमें नर्सिंग, बाल देखभाल, वृद्ध देखभाल, थेरेपी, शिक्षण तथा घरेलू सहायता जैसी सेवाएँ सम्मिलित हैं। विश्वभर में बढ़ती वृद्ध आबादी तथा परिवारों की बदलती संरचना के कारण देखभाल सेवाओं की मांग बढ़ रही है, जिससे देखभाल अर्थव्यवस्था रोजगार सृजन एवं सामाजिक कल्याण का एक महत्वपूर्ण आधार बन गई है।

रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु:

      • देखभालकर्ताओं (Caregivers) को कुशल पेशेवरों (Skilled Professionals) के रूप में स्थापित करने तथा गुणवत्तापूर्ण, किफायती एवं सुलभ देखभाल सेवाएँ सुनिश्चित करने की सिफारिश की गई है।
      • प्रशिक्षण, प्रमाणन (Certification) तथा सेवा वितरण के मानकीकरण के लिए राष्ट्रीय देखभाल नीति (National Policy on Caregiving) एवं राष्ट्रीय देखभालकर्ता परिषद (National Caregiver Council) के गठन का प्रस्ताव दिया गया है।
      • कौशल प्रशिक्षण, पेशेवर मान्यता तथा सामाजिक सुरक्षा लाभों के माध्यम से कार्यबल के विकास की वकालत की गई है।
      • संस्थागत समर्थन के साथ-साथ परिवार एवं समुदाय आधारित देखभाल को प्रोत्साहित करने पर बल दिया गया है।
      • भारतीय देखभालकर्ताओं को वैश्विक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने हेतु अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई है।

भारत के लिए महत्त्व:

      • भारत की युवा कार्यशक्ति, सेवा (Seva) और संवेदना (Samvedana) की परंपरा के साथ मिलकर, देखभाल सेवाओं के क्षेत्र में उसे तुलनात्मक बढ़त (Comparative Advantage) प्रदान करती है। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि जापान, जर्मनी और इटली जैसे देशों में वृद्ध होती जनसंख्या के कारण प्रशिक्षित देखभालकर्ताओं की भारी कमी है।
      • वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी देखभालकर्ता कार्यबल का निर्माण करके भारत रोजगार सृजन, विदेशी प्रेषण (Remittances) में वृद्धि, स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने, महिलाओं के सशक्तिकरण तथा अपनी सॉफ्ट पावर (Soft Power) को बढ़ाने में सफल हो सकता है। एक सुदृढ़ देखभाल अर्थव्यवस्था "विकसित भारत @2047" के लक्ष्य को साकार करने में भी महत्त्वपूर्ण योगदान देगी।

देखभाल अर्थव्यवस्था  के समक्ष चुनौतियाँ:

      • प्रशिक्षित एवं प्रमाणित (Certified) देखभालकर्ताओं (Caregivers) की कमी।
      • देखभाल कर्मियों के लिए कम वेतन तथा अपर्याप्त सामाजिक सुरक्षा।
      • महिलाओं पर अवैतनिक (Unpaid) देखभाल कार्य का अत्यधिक बोझ, जिससे उनकी कार्यबल में भागीदारी सीमित होती है।
      • मानकीकृत प्रशिक्षण, विनियमन (Regulation) तथा गुणवत्ता आश्वासन (Quality Assurance) का अभाव।
      • देखभाल (Caregiving) को एक पेशेवर करियर के रूप में सीमित जागरूकता।

आगे की राह:

भारत को एक व्यापक राष्ट्रीय देखभाल नीति (National Caregiving Policy) स्थापित करनी चाहिए, कौशल विकास कार्यक्रमों को सुदृढ़ करना चाहिए, प्रमाणन (Certification) तथा सम्मानजनक कार्य परिस्थितियाँ सुनिश्चित करनी चाहिए और देखभालकर्ताओं को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए। सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnerships), डिजिटल प्रौद्योगिकियों तथा देखभालकर्ताओं की योग्यताओं की मान्यता हेतु अंतरराष्ट्रीय समझौतों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। स्वास्थ्य अवसंरचना तथा समुदाय-आधारित देखभाल प्रणालियों में निवेश इस क्षेत्र को और अधिक सुदृढ़ करेगा तथा सेवाओं की पहुँच (Accessibility) में सुधार करेगा।

नीति आयोग (NITI Aayog) के बारे में:

1 जनवरी 2015 को स्थापित नीति आयोग (NITI Aayog) ने योजना आयोग (Planning Commission) का स्थान लेकर भारत सरकार के सर्वोच्च सार्वजनिक नीति (Public Policy) थिंक टैंक (Think Tank) के रूप में कार्यभार संभाला। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कार्य करने वाला यह संस्थान सहकारी एवं प्रतिस्पर्धी संघवाद (Cooperative and Competitive Federalism) को बढ़ावा देता है, रणनीतिक नीतिगत परामर्श प्रदान करता है, सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals–SDGs) की निगरानी करता है तथा अटल नवाचार मिशन (Atal Innovation Mission) और विकसित भारत 2047 (Viksit Bharat 2047) जैसी पहलों का समर्थन करता है। योजना आयोग के विपरीत, यह राज्यों को वित्तीय आवंटन नहीं करता, बल्कि एक ज्ञान एवं नीतिगत परामर्शदाता संस्था (Knowledge and Policy Advisory Institution) के रूप में कार्य करता है।

 

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