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Blog / 06 Mar 2026

भारतीय तटरक्षक बल के लिए ALH Mk-III हेलीकॉप्टरों की खरीद

संदर्भ:

हाल ही में रक्षा मंत्रालय ने भारत की समुद्री सुरक्षा और वायु-रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए ₹5,083 करोड़ के रक्षा अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों में  उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर एमके-III (Advanced Light Helicopter Mk-III) के छह हेलीकॉप्टरों की खरीद भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) के लिए तथा वीएल-श्टिल (VL-Shtil) सतह-से-आकाश मिसाइल प्रणाली की खरीद भारतीय नौसेना के लिए शामिल है।

छह उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर एमके-III (ALH Mk-III (MR) हेलीकॉप्टरों के लिए ₹2,901 करोड़ का अनुबंध, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), बेंगलुरु के साथ किया गया है।

उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर एमके-III की प्रमुख विशेषताएँ-

  • यह दो इंजन वाले हेलीकॉप्टर हैं, जिनमें उन्नत एवियोनिक्स और मिशन सिस्टम लगे हैं।
  • समुद्री निगरानी, खोज एवं बचाव (Search and Rescue), तटीय सुरक्षा और आपदा प्रतिक्रिया जैसे अभियानों में सक्षम।
  • तट-आधारित एयरफील्ड तथा समुद्र में जहाजों दोनों से संचालन करने में सक्षम।
  • इसमें ऑपरेशनल उपकरण, इंजीनियरिंग सहायता पैकेज और प्रदर्शन आधारित लॉजिस्टिक्स समर्थन शामिल है।

इन हेलीकॉप्टरों की तैनाती से भारतीय तटरक्षक बल की क्षमता ऑफशोर प्रतिष्ठानों, कृत्रिम द्वीपों, मछुआरों तथा समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा के लिए काफी मजबूत होगी। 

ALH Mk-III Dhyeya IAS

वीएल-श्टिल (VL-Shtil) मिसाइल प्रणाली-

₹2,182 करोड़ का एक अन्य अनुबंध, रूस के साथ वीएल-श्टिल (VL-Shtil) सतह-से-आकाश मिसाइलों की खरीद के लिए किया गया है।

वीएल-श्टिल (VL-Shtil) प्रणाली के लाभ-

  • अग्रिम पंक्ति के नौसैनिक युद्धपोतों की वायु-रक्षा क्षमता को बढ़ाएगी।
  • तेज प्रतिक्रिया और सभी मौसमों में कार्य करने वाली वायु-रक्षा क्षमता प्रदान करेगी।
  • विवादित समुद्री क्षेत्रों में भारतीय नौसेना की बहु-स्तरीय वायु-रक्षा संरचना को मजबूत करेगी।

यह सौदा भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे रणनीतिक रक्षा सहयोग और आपसी विश्वास को भी दर्शाता है।

रणनीतिक महत्व

यह अधिग्रहण भारत की समुद्री क्षेत्र जागरूकता (Maritime Domain Awareness) और तटीय सुरक्षा ढांचे को मजबूत करेगा।

हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियाँ जैसे- समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ना, समुद्री आपदाएँ और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को देखते हुए ये उन्नत हेलीकॉप्टर तेजी से निगरानी और प्रतिक्रिया की क्षमता प्रदान करेंगे।

साथ ही यह अनुबंध आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया पहल को भी बढ़ावा देता है, क्योंकि उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर एमके-III (ALH Mk-III) हेलीकॉप्टरों का डिजाइन और निर्माण भारत में एचएएल  द्वारा किया गया है। आपूर्ति श्रृंखला में  सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) की भागीदारी भारत के रक्षा औद्योगिक आधार को और मजबूत करेगी।

निष्कर्ष

₹5,083 करोड़ के ये रक्षा अनुबंध भारत की समुद्री सुरक्षा अवसंरचना के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। भारतीय तटरक्षक बल और नौसेना की परिचालन क्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ यह पहल स्वदेशी रक्षा निर्माण, समुद्री सुरक्षा और रक्षा तैयारी को मजबूत करने की भारत की व्यापक रणनीति को दर्शाती है।