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Blog / 23 Apr 2026

ILO की कार्यस्थलों पर रिपोर्ट

संदर्भ:

हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने मनोसामाजिक कार्य-वातावरण: वैश्विक घटनाक्रम और कार्रवाई के मार्ग” (The Psychosocial Working Environment: Global Developments and Pathways for Action) नामक एक रिपोर्ट प्रकाशित की है, जो एक प्रमुख वैश्विक व्यावसायिक स्वास्थ्य चिंता को उजागर करती है। इस रिपोर्ट के अनुसार, कार्यस्थलों पर मनोसामाजिक (psychosocial) जोखिमों के कारण विश्वभर में हर वर्ष 8.4 लाख से अधिक मौतें होती हैं।

रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:

रिपोर्ट बताती है कि लंबे कार्य घंटे, नौकरी की असुरक्षा, उत्पीड़न और कार्यस्थल पर हिंसा जैसे मनोसामाजिक जोखिम वैश्विक मृत्यु दर में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, विशेष रूप से हृदय रोग और मानसिक स्वास्थ्य विकारों के माध्यम से।

1.      उच्च मृत्यु दर और रोग भार:

हर वर्ष 8,40,000 से अधिक मौतें कार्यस्थल के मनोसामाजिक जोखिमों से जुड़ी हैं
लगभग 4.5 करोड़ DALYs (अस्वस्थ जीवन वर्ष) का वार्षिक नुकसान
उत्पादकता में गिरावट के कारण वैश्विक GDP का लगभग 1.37% नुकसान

2.     मुख्य मनोसामाजिक जोखिम कारक :

लंबे कार्य घंटे
कार्य तनाव (उच्च मांग, कम नियंत्रण)
नौकरी की असुरक्षा
प्रयासपुरस्कार असंतुलन
कार्यस्थल पर बदमाशी (bullying) और उत्पीड़न

3.     वैश्विक स्थिति :

• 35% कर्मचारी प्रति सप्ताह 48 घंटे से अधिक काम करते हैं
• 23% कर्मचारियों ने कार्यस्थल पर हिंसा या उत्पीड़न का सामना किया है
मनोवैज्ञानिक हिंसा सबसे आम (18%) है

4.    स्वास्थ्य पर प्रभाव :

हृदय संबंधी बीमारियों (दिल का दौरा, स्ट्रोक) का बढ़ता जोखिम
अवसाद और आत्महत्या जैसे मानसिक स्वास्थ्य मुद्दों में वृद्धि
लगातार कार्यस्थल तनाव से दीर्घकालिक बीमारियाँ

5.     आर्थिक प्रभाव:

उत्पादकता और दक्षता में कमी
स्वास्थ्य देखभाल और सामाजिक सुरक्षा पर बढ़ता खर्च
वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण आर्थिक नुकसान

नीतिगत सिफारिशें:

कार्यस्थल सुधार:

संतुलित कार्यभार और बेहतर कार्य-डिज़ाइन
कर्मचारियों की अधिक भागीदारी और नियंत्रण
संगठनात्मक निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना

सरकारी कार्रवाई :

मजबूत व्यावसायिक सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य नियम
श्रम कानूनों में मनोसामाजिक (psychosocial) जोखिमों को शामिल करना
प्रवर्तन (enforcement) तंत्र को मजबूत करना

सामाजिक संवाद:

सामूहिक सौदेबाजी (collective bargaining) को सुदृढ़ करना
क्षेत्रीय स्तर पर नियोक्ताकर्मचारी सहयोग बढ़ाना

निगरानी एवं अनुसंधान :

कार्यस्थल तनाव पर बेहतर डेटा संग्रह
नियमित नीति मूल्यांकन
सहभागी (participatory) कार्यस्थल सुरक्षा मॉडल अपनाना

भारत के सन्दर्भ में प्रासंगिकता:

      • भारत में कार्य संस्कृति तेजी से डिजिटलाइजेशन, बढ़ते प्रदर्शन दबाव और मानसिक स्वास्थ्य चिंताओं के कारण महत्वपूर्ण बदलाव से गुजर रही है। लंबे कार्य घंटे व्यापक हैं, लगभग 72% आईटी पेशेवर 48 घंटे से अधिक कार्य सप्ताह करते हैं और कई 70 घंटे से भी अधिक काम करते हैं। गिग अर्थव्यवस्था, जिसमें लगभग 1.2 करोड़ श्रमिक हैं, अक्सर निरंतर और लंबे कार्य समय पर आधारित है।
      • राइट टू डिस्कनेक्टकी अनुपस्थिति कार्य तनाव को और बढ़ाती है। परिणामस्वरूप, बर्नआउट स्तर बहुत अधिक है (आईटी क्षेत्र में 80% से अधिक), लगभग 30% कर्मचारी दैनिक तनाव का अनुभव करते हैं, जिससे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य समस्याएँ बढ़ रही हैं तथा हर वर्ष लगभग ₹1.1 लाख करोड़ का आर्थिक नुकसान होता है।

ILO के बारे में:

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है, जिसकी स्थापना 1919 में हुई और इसका मुख्यालय जिनेवा में है। यह सामाजिक न्याय और अंतरराष्ट्रीय श्रम अधिकारों को बढ़ावा देता है तथा श्रम मानक तय करने, नीतियाँ विकसित करने और सभी के लिए सम्मानजनक कार्य” (decent work) को प्रोत्साहित करने का कार्य करता है। ILO की त्रिपक्षीय संरचना है, जिसमें सरकारें, नियोक्ता और श्रमिक शामिल होते हैं। भारत इसका संस्थापक सदस्य है।

निष्कर्ष :

ILO रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि कार्यस्थल में तनाव केवल रोजगार का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक स्वास्थ्य और आर्थिक चुनौती है। मनोसामाजिक जोखिमों को कम करने के लिए सरकारों, नियोक्ताओं और श्रमिकों के बीच समन्वित प्रयास आवश्यक हैं, ताकि सुरक्षित, स्वस्थ और सम्मानजनक कार्य वातावरण सुनिश्चित किया जा सके, जो सभी के लिए सम्मानजनक कार्यके लक्ष्य के अनुरूप हो।