संदर्भ:
हाल ही में केंद्र सरकार ने 1 फरवरी 2026 को भारत की तंबाकू कर व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलावों की प्रभावी तिथि के रूप में अधिसूचित किया है। इस अधिसूचना के परिणामस्वरूप जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर की औपचारिक समाप्ति होगी तथा एक नई तंबाकू कर व्यवस्था लागू की जाएगी, जिसमें अधिक जीएसटी दरें, अतिरिक्त केंद्रीय उत्पाद शुल्क और स्वास्थ्य व राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर का प्रावधान किया गया है।
पृष्ठभूमि:
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- जुलाई 2017 में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करते समय केंद्र सरकार ने राज्यों को यह आश्वासन दिया था कि एकीकृत अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में परिवर्तन के कारण यदि राज्यों को किसी भी प्रकार की राजस्व हानि होती है, तो उसकी पूर्ण क्षतिपूर्ति की जाएगी।
- इसी उद्देश्य से तंबाकू, पान मसाला तथा लग्ज़री वस्तुओं जैसे चुनिंदा उत्पादों पर जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर लगाया गया था।
- कोविड-19 महामारी के दौरान राज्यों को समय पर क्षतिपूर्ति भुगतान सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार को उधारी लेनी पड़ी, जिससे अस्थायी वित्तीय देनदारियाँ उत्पन्न हुईं।
- वर्तमान में ये सभी देनदारियाँ पूर्णतः चुका दी गई हैं। क्षतिपूर्ति की निर्धारित अवधि समाप्त हो जाने और सभी बकाया दायित्वों के निपटारे के साथ यह उपकर अपने मूल उद्देश्य को पूरा कर चुका है।
- इसी पृष्ठभूमि में केंद्र सरकार ने जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर को समाप्त करने तथा 1 फरवरी 2026 से नई कर संरचना लागू करने का निर्णय लिया है।
- जुलाई 2017 में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करते समय केंद्र सरकार ने राज्यों को यह आश्वासन दिया था कि एकीकृत अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में परिवर्तन के कारण यदि राज्यों को किसी भी प्रकार की राजस्व हानि होती है, तो उसकी पूर्ण क्षतिपूर्ति की जाएगी।
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नई तंबाकू कर व्यवस्था:
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- नई व्यवस्था के तहत तंबाकू उत्पाद जीएसटी के अंतर्गत बने रहेंगे, किंतु अब उन पर अधिक दरों के साथ अतिरिक्त कर भी लगाए जाएंगे।
- सिगरेट, पान मसाला तथा इसी प्रकार के उत्पादों पर 40% जीएसटी लागू होगा, जबकि बीड़ी को 18% जीएसटी स्लैब में रखा गया है।
- एक महत्वपूर्ण सुधार के रूप में एमआरपी आधारित मूल्यांकन प्रणाली की शुरुआत की गई है, जिसके अंतर्गत कर लेनदेन मूल्य के बजाय घोषित अधिकतम खुदरा मूल्य के आधार पर लगाया जाएगा। इससे कम मूल्य दिखाकर कर चोरी करने की प्रवृत्ति पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।
- इसके अतिरिक्त, तंबाकू उत्पादों पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा, जो उत्पाद की श्रेणी, संरचना और विशिष्टताओं के अनुसार भिन्न-भिन्न होगा।
- पान मसाला पर स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर लगाया जाएगा, जबकि गुटखा और चबाने वाले तंबाकू जैसे उत्पादों पर पैकिंग मशीन की क्षमता से संबद्ध उत्पाद शुल्क लागू किया जाएगा।
- नियामकीय निगरानी को सुदृढ़ करने के लिए पैकिंग मशीन नियम, 2026 लागू किए गए हैं, जिनके अंतर्गत पैकिंग मशीनों का विवरण प्रस्तुत करना तथा मासिक आधार पर शुल्क का भुगतान अनिवार्य किया गया है।
- नई व्यवस्था के तहत तंबाकू उत्पाद जीएसटी के अंतर्गत बने रहेंगे, किंतु अब उन पर अधिक दरों के साथ अतिरिक्त कर भी लगाए जाएंगे।
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बदलाव के पीछे का तर्क:
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- यह नई कर व्यवस्था तीन प्रमुख उद्देश्यों पर आधारित है।
- पहला, राजकोषीय स्थिरता, क्योंकि अस्थायी और उद्देश्य-विशेष जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर के स्थान पर अब अधिक स्थायी, नियमित और अनुमानित उत्पाद शुल्क आधारित राजस्व व्यवस्था स्थापित की जा रही है।
- दूसरा, सार्वजनिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करना, क्योंकि हानिकारक तंबाकू उत्पादों पर उच्च कर बोझ बनाए रखकर उनके उपभोग को प्रभावी रूप से हतोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है।
- तीसरा, प्रशासनिक दक्षता में वृद्धि, क्योंकि एमआरपी आधारित मूल्यांकन तथा क्षमता-आधारित शुल्क प्रणाली कर चोरी और संभावित राजस्व हानि को प्रभावी रूप से कम करने में सहायक होगी।
- पहला, राजकोषीय स्थिरता, क्योंकि अस्थायी और उद्देश्य-विशेष जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर के स्थान पर अब अधिक स्थायी, नियमित और अनुमानित उत्पाद शुल्क आधारित राजस्व व्यवस्था स्थापित की जा रही है।
- यह नई कर व्यवस्था तीन प्रमुख उद्देश्यों पर आधारित है।
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आर्थिक और सामाजिक प्रभाव:
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- अधिक कर लगाए जाने से खुदरा कीमतों में वृद्धि होने की संभावना है, जिसके परिणामस्वरूप खपत में कुछ कमी आ सकती है। हालांकि, नशे की प्रवृत्ति के कारण तंबाकू उत्पादों की मांग सामान्यतः अपेक्षाकृत कम लचीली बनी रहती है।
- उद्योग जगत ने इस निर्णय पर प्रतिकूल प्रतिक्रिया व्यक्त की है; लाभ और मार्जिन पर संभावित दबाव की आशंकाओं के चलते तंबाकू कंपनियों के शेयर मूल्यों में गिरावट दर्ज की गई है।
- राज्यों को अब राजस्व जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर के माध्यम से अलग से प्राप्त नहीं होगा, बल्कि यह सामान्य विभाज्य कर पूल के माध्यम से साझा किया जाएगा। साथ ही, कर संग्रह का एक भाग सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रमों के लिए नियोजित किए जाने की संभावना बनी रहेगी।
- इस परिवर्तन के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु संक्रमणकाल के दौरान केंद्र और राज्यों के बीच सुदृढ़ संस्थागत समन्वय, निरंतर परामर्श तथा पारदर्शी व्यवस्था आवश्यक होगी, जिससे राज्यों के राजस्व प्रवाह में स्थिरता और पूर्वानुमेयता सुनिश्चित की जा सके।
- अधिक कर लगाए जाने से खुदरा कीमतों में वृद्धि होने की संभावना है, जिसके परिणामस्वरूप खपत में कुछ कमी आ सकती है। हालांकि, नशे की प्रवृत्ति के कारण तंबाकू उत्पादों की मांग सामान्यतः अपेक्षाकृत कम लचीली बनी रहती है।
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निष्कर्ष:
जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर की समाप्ति तथा नई तंबाकू कर व्यवस्था की शुरुआत भारत की अप्रत्यक्ष कर नीति में एक महत्वपूर्ण और संरचनात्मक परिवर्तन को दर्शाती है। राजस्व संग्रह को सार्वजनिक स्वास्थ्य उद्देश्यों और कर अनुपालन के सुदृढ़ीकरण से जोड़ते हुए सरकार एक अधिक प्रभावी, स्वास्थ्य-उन्मुख और वित्तीय रूप से टिकाऊ कर ढांचे की स्थापना करना चाहती है। इस सुधार की सफलता प्रभावी प्रवर्तन तंत्र, पूरक सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों तथा अवैध तंबाकू व्यापार पर निरंतर और कठोर निगरानी पर निर्भर करेगी।
