संदर्भ:
भारत सरकार ने जनगणना 2027 के प्रथम चरण की समय-सारिणी को औपचारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है। यह पहल 2011 की पिछली जनगणना के बाद देश के लिए अद्यतन जनसांख्यिकीय तथा सामाजिक-आर्थिक आँकड़े उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जनगणना का पहला चरण “मकान सूचीकरण एवं आवास जनगणना” 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 के बीच देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संचालित किया जाएगा।
पहले चरण का मुख्य फोकस:
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- चरण-I “मकान सूचीकरण एवं आवास जनगणना” का उद्देश्य देश में उपलब्ध आवासों और परिवारों से जुड़ी आधारभूत जानकारी एकत्र करना है।
- आवास की समग्र स्थिति तथा मकानों की संरचनात्मक विशेषताएँ।
- घरों में उपलब्ध परिसंपत्तियों का स्वामित्व और बुनियादी सुविधाएँ, जैसे पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता, खाना पकाने के लिए उपयोग होने वाला ईंधन और बिजली की उपलब्धता।
- परिवार की संरचना, फर्श एवं छत में प्रयुक्त सामग्री, विभिन्न सेवाओं तक पहुँच तथा उनसे जुड़े अन्य महत्त्वपूर्ण संकेतक।
- आवास की समग्र स्थिति तथा मकानों की संरचनात्मक विशेषताएँ।
- इस चरण में किसी भी व्यक्ति की अलग से गणना नहीं की जाती। इसका प्रमुख उद्देश्य आगामी दूसरे चरण की जनसंख्या गणना के लिए एक सुदृढ़ नमूना ढाँचा और प्रभावी संचालन व्यवस्था तैयार करना है।
- चरण-I “मकान सूचीकरण एवं आवास जनगणना” का उद्देश्य देश में उपलब्ध आवासों और परिवारों से जुड़ी आधारभूत जानकारी एकत्र करना है।
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डिजिटल परिवर्तन:
जनगणना 2027 भारत की पहली ऐसी जनगणना होगी, जिसे मुख्य रूप से डिजिटल माध्यमों के जरिए संचालित किया जाएगा। आँकड़ों का संग्रह मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से किया जाएगा तथा इसके लिए एक केंद्रीकृत निगरानी एवं प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाएगी। इस व्यवस्था से आँकड़ों की गुणवत्ता, समयबद्धता और पारदर्शिता में उल्लेखनीय सुधार होने की संभावना है।
डिजिटल उपकरणों के प्रयोग से त्रुटियाँ कम होंगी, बेहतर निगरानी संभव होगी और क्षेत्रीय कार्यों की वास्तविक समय में समीक्षा की जा सकेगी।
महत्त्व:
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- अद्यतन आँकड़ा प्रणाली: कोविड-19 महामारी के कारण जनगणना में हुई देरी के बाद, यह अभ्यास देश को नवीन और विश्वसनीय जनसंख्या, परिवार तथा सामाजिक-आर्थिक आँकड़े उपलब्ध कराएगा। ये आँकड़े विभिन्न क्षेत्रों में प्रभावी नीति निर्माण, योजना निर्धारण और संसाधन आवंटन के लिए अत्यंत आवश्यक होंगे।
- साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण: मकान सूचीकरण से प्राप्त जानकारी विस्तृत जनसंख्या गणना के लिए मज़बूत नमूना ढाँचा तैयार करती है। साथ ही, यह आवास, सार्वजनिक उपयोगिताओं, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी ढाँचे से संबंधित नीतिगत निर्णयों को तथ्यात्मक आधार प्रदान करती है।
- सामाजिक संकेतकों की नींव: सटीक और व्यापक मकान सूचीकरण दूसरे चरण में सम्पूर्ण जनसंख्या कवरेज को सुनिश्चित करता है, जिसमें जनसांख्यिकीय संरचना, जाति गणना, साक्षरता स्तर, प्रवासन तथा आर्थिक गतिविधियों से जुड़े विस्तृत और समग्र आँकड़े शामिल होंगे।
- अद्यतन आँकड़ा प्रणाली: कोविड-19 महामारी के कारण जनगणना में हुई देरी के बाद, यह अभ्यास देश को नवीन और विश्वसनीय जनसंख्या, परिवार तथा सामाजिक-आर्थिक आँकड़े उपलब्ध कराएगा। ये आँकड़े विभिन्न क्षेत्रों में प्रभावी नीति निर्माण, योजना निर्धारण और संसाधन आवंटन के लिए अत्यंत आवश्यक होंगे।
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भारत में जनगणना:
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- भारत में जनगणना प्रत्येक 10 वर्ष में होने वाली प्रक्रिया है, जिसे जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत अनिवार्य रूप से आयोजित किया जाता है। इसका आयोजन और संचालन गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त द्वारा किया जाता है।
- संविधान के प्रावधानों के अनुसार जनगणना एक संघ सूची का विषय है। यह शासन व्यवस्था, विकास योजना, संसाधन आवंटन तथा नीति निर्धारण के लिए देश को व्यापक और विश्वसनीय सामाजिक-आर्थिक आँकड़े उपलब्ध कराती है।
- भारत में जनगणना प्रत्येक 10 वर्ष में होने वाली प्रक्रिया है, जिसे जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत अनिवार्य रूप से आयोजित किया जाता है। इसका आयोजन और संचालन गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत भारत के रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त द्वारा किया जाता है।
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संवैधानिक एवं कानूनी आधार:
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- अनुच्छेद 246 (सातवीं अनुसूची, प्रविष्टि 69): जनगणना संघ सूची का विषय है।
- जनगणना अधिनियम, 1948 एवं नियम, 1990: यह कानूनी ढाँचा प्रदान करता है, आँकड़ों की गोपनीयता सुनिश्चित करता है और अनुपालन न करने पर दंड का प्रावधान करता है।
- अनुच्छेद 246 (सातवीं अनुसूची, प्रविष्टि 69): जनगणना संघ सूची का विषय है।
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इतिहास:
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- पहली असमकालिक जनगणना: 1872।
- पहली समकालिक (दशकीय) जनगणना: 1881।
- स्वतंत्रता के बाद: 1951, 1961 से लेकर 2011 तक नियमित रूप से आयोजित।
- पहली असमकालिक जनगणना: 1872।
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निष्कर्ष:
1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 के बीच प्रस्तावित जनगणना 2027 का पहला चरण भारत के सबसे व्यापक प्रशासनिक और सांख्यिकीय अभ्यास की औपचारिक शुरुआत है। इस चरण में डिजिटल माध्यमों तथा स्व-गणना (सेल्फ एन्यूमरेशन) के विकल्प पर विशेष बल दिया गया है। इस चरण की सफल क्रियान्विति आगे होने वाली जनसंख्या गणना के लिए एक मज़बूत आधार तैयार करेगी और शासन व्यवस्था, विकास योजना निर्माण तथा सामाजिक-आर्थिक सुधारों के लिए आवश्यक, अद्यतन और विश्वसनीय आँकड़े उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

