होम > Blog

Blog / 02 Sep 2026

ऐतिहासिक गोल्लाला गुड़ी मंदिर को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया गया

संदर्भ:

हाल ही में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने तेलंगाना के मुलुगु जिले के पालमपेट गांव में स्थित ऐतिहासिक काकतीय कालीन गोल्लाला गुड़ी मंदिर को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक (Monument of National Importance - MNI) घोषित किया है।

गोल्लाला गुड़ी के बारे में:

      • गोल्लाला गुड़ी काकतीय कालीन मंदिर स्थापत्य कला का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। यह एक त्रिकूटालय (Trikutalaya) है, अर्थात ऐसा मंदिर जिसमें तीन गर्भगृह या गरभगृह होते हैं।
      • मंदिर में पूर्व दिशा की ओर मुख वाला मंडप तथा तीन मंदिर-गर्भगृह हैं, जिनके साथ संबंधित अंतर-कक्ष भी बने हुए हैं।
      • यह मंदिर काकतीय रुद्रेश्वर (रामप्पा) मंदिर के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है, जिसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा प्राप्त है।

Gollala Gudi Temple Declared Monument of National Importance by ASI

प्रमुख स्थापत्य विशेषताएँ:

      • मंदिर की पैरापेट, एंटेब्लेचर और द्वारों पर सुंदर हंस आकृतियों की नक्काशी तथा जालीदार शिल्प (Jali Work) देखने को मिलता है।
      • दीवारों के आले में विष्णु, लक्ष्मी, गणेश और महिषासुरमर्दिनी की मूर्तियां स्थापित हैं।
      • मंदिर का ऊंचा चबूतरा (Plinth) पशु आकृतियों और पुष्पीय डिजाइनों से सजाया गया है।
      • मंदिर परिसर में दो अलग स्थित छोटे मंदिर हैं, जिनमें बारीकी से तराशे गए द्वारपालों (Dvarapalas) की मूर्तियां हैं।
      • मंदिर की कॉर्निस और स्क्रीन पर अत्यंत विस्तृत एवं कलात्मक सजावट की गई है।
      • ये विशेषताएँ काकतीय काल की उन्नत कलात्मक एवं स्थापत्य क्षमता को दर्शाती हैं।

कानूनी एवं संवैधानिक ढांचा:

केंद्र द्वारा संरक्षित स्मारकों की सुरक्षा मुख्य रूप से प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 (Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains - AMASR Act, 1958) के अंतर्गत की जाती है।

विरासत संरक्षण की व्यवस्था:

      • भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) केंद्र द्वारा संरक्षित स्मारकों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए प्रमुख संस्था है।
      • संरक्षित स्मारक के चारों ओर 100 मीटर का निषिद्ध क्षेत्र (Prohibited Area) होता है, जहां सामान्यतः नए निर्माण पर रोक होती है।
      • 100 से 300 मीटर के बीच का क्षेत्र विनियमित क्षेत्र (Regulated Area) कहलाता है। यहां निर्माण और अन्य संबंधित गतिविधियों के लिए नियामक स्वीकृति आवश्यक होती है।
      • राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (National Monuments Authority - NMA) इन संरक्षित क्षेत्रों में गतिविधियों को विनियमित करता है।

संवैधानिक प्रावधान:

भारत में विरासत संरक्षण को संविधान के निम्नलिखित प्रावधानों से समर्थन मिलता है:

      • अनुच्छेद 49 - यह राज्य को राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों, स्थानों और वस्तुओं की रक्षा करने का निर्देश देता है।
      • अनुच्छेद 51A(f) - यह प्रत्येक नागरिक का मौलिक कर्तव्य निर्धारित करता है कि वह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को महत्व दे और उसका संरक्षण करे।

महत्व:

गोल्लाला गुड़ी को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किए जाने से इसे मजबूत संस्थागत और कानूनी संरक्षण प्राप्त होगा।

इससे:

      • अतिक्रमण को रोकने में मदद मिलेगी।
      • स्मारक की उपेक्षा को कम किया जा सकेगा।
      • अनधिकृत निर्माण पर नियंत्रण मजबूत होगा।
      • स्मारक का वैज्ञानिक संरक्षण और दस्तावेजीकरण बेहतर तरीके से किया जा सकेगा।

रामप्पा मंदिर के निकट स्थित होने के कारण यह कदम तेलंगाना में एक व्यापक काकतीय विरासत एवं पर्यटन सर्किट विकसित करने का अवसर भी प्रदान करता है।

निष्कर्ष:

गोल्लाला गुड़ी को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया जाना काकतीय स्थापत्य विरासत के एक महत्वपूर्ण, लेकिन अपेक्षाकृत कम प्रसिद्ध उदाहरण के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह निर्णय भारत की व्यापक सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक सांस्कृतिक परिदृश्यों के संरक्षण की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है, विशेष रूप से उन स्थलों के साथ जो पहले से ही वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध हैं।

 

Aliganj Gomti Nagar Prayagraj