सन्दर्भ:
हाल ही में 'इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस' (IEP) द्वारा वैश्विक आतंकवाद सूचकांक 2026 जारी किया गया। यह रिपोर्ट 163 देशों में आतंकवाद के रुझानों का व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत करती है, जो विश्व की 99.7% जनसंख्या को शामिल करती है। सूचकांक चार मानकों, घटनाएं (incidents), मौतें (fatalities), घायल (injuries) और बंधक (hostages), के आधार पर 0 (कोई प्रभाव नहीं) से 10 (अधिकतम प्रभाव) तक स्कोर देकर देशों की रैंकिंग निर्धारित करता है। वैश्विक आतंकवाद सूचकांक रिपोर्ट 2025 के आंकड़ों के आधार पर दुनिया भर में आतंकवाद के बदलते स्वरूप, हताहतों की संख्या और भू-राजनीतिक प्रभावों का व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत करती है।
रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष:
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- वैश्विक रुझान: वर्ष 2025 में आतंकवाद से होने वाली मौतों में इस बार 28% की गिरावट दर्ज की गई, जो 5,582 रही। यह 2007 के बाद का निम्नतम स्तर है। हालांकि, हमलों की घातकता (Fatality Rate) में 14% की वृद्धि हुई है, जिसका अर्थ है कि हमले कम हुए लेकिन अधिक घातक रहे।
- पाकिस्तान शीर्ष पर: सूचकांक के इतिहास में पहली बार पाकिस्तान को आतंकवाद से सर्वाधिक प्रभावित देश (रैंक 1) घोषित किया गया है। वर्ष 2025 में यहाँ 1,139 मौतें दर्ज की गईं, जो 2013 के बाद का उच्चतम स्तर है। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और बीएलए (BLA) जैसे समूहों की सक्रियता इसका मुख्य कारण रही।
- मध्य साहेल आतंकवाद का केंद्र (Sahel Region): आतंकवाद का केंद्र अब मध्य-पूर्व से हटकर मध्य साहेल (Sub-Saharan Africa) बन गया है। बुर्किना फासो, नाइजर और नाइजीरिया जैसे देश अत्यधिक प्रभावित श्रेणी में बने हुए हैं। वैश्विक स्तर पर होने वाली कुल मौतों का लगभग आधा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है।
- सबसे घातक समूह: इस्लामिक स्टेट (IS) लगातार नौवें वर्ष दुनिया का सबसे घातक आतंकवादी समूह बना हुआ है। इसके बाद जेएनआईएम (JNIM), टीटीपी (TTP) और अल-शबाब का स्थान है।
- पश्चिमी देशों में वृद्धि: रिपोर्ट एक चिंताजनक रुझान दर्शाती है कि पश्चिमी देशों में आतंकवाद से होने वाली मौतों में 280% की वृद्धि हुई है। इसका मुख्य कारण राजनीतिक ध्रुवीकरण, विचारधारा आधारित हिंसा और ऑनलाइन कट्टरपंथ है।
- वैश्विक रुझान: वर्ष 2025 में आतंकवाद से होने वाली मौतों में इस बार 28% की गिरावट दर्ज की गई, जो 5,582 रही। यह 2007 के बाद का निम्नतम स्तर है। हालांकि, हमलों की घातकता (Fatality Rate) में 14% की वृद्धि हुई है, जिसका अर्थ है कि हमले कम हुए लेकिन अधिक घातक रहे।
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भारत की स्थिति:
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- भारत के लिए यह रिपोर्ट सकारात्मक संकेत लेकर आई है। भारत की रैंकिंग में सुधार हुआ है और यह 13वें स्थान पर पहुँच गया है।
- भारत में आतंकवाद के प्रभाव में 43% की कमी देखी गई है। जम्मू-कश्मीर और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की सतर्कता और विकास कार्यों के कारण हिंसा में भारी गिरावट आई है।
- भारत के लिए यह रिपोर्ट सकारात्मक संकेत लेकर आई है। भारत की रैंकिंग में सुधार हुआ है और यह 13वें स्थान पर पहुँच गया है।
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महत्वपूर्ण विश्लेषणात्मक:
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- सीमावर्ती क्षेत्रों की भेद्यता: रिपोर्ट के अनुसार, 76% आतंकवादी हमले अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के 100 किलोमीटर के भीतर होते हैं। यह भारत के लिए 'सीमा प्रबंधन' (Border Management) के महत्व को रेखांकित करता है।
- प्रौद्योगिकी और कट्टरपंथ: डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से युवाओं के तेजी से रेडिकलाइजेशन होने की चुनौती बढ़ी है। रिपोर्ट बताती है कि 2021 के बाद से युवाओं के खिलाफ आतंकवाद संबंधी जांच में तीन गुना वृद्धि हुई है।
- आतंकवाद का वित्तपोषण: अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बावजूद, क्रिप्टोकरेंसी और अवैध व्यापार के माध्यम से टेरर फंडिंग अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
- सीमावर्ती क्षेत्रों की भेद्यता: रिपोर्ट के अनुसार, 76% आतंकवादी हमले अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के 100 किलोमीटर के भीतर होते हैं। यह भारत के लिए 'सीमा प्रबंधन' (Border Management) के महत्व को रेखांकित करता है।
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निष्कर्ष:
वैश्विक स्तर पर आतंकवाद में कुल मिलाकर गिरावट आई है, लेकिन यह अधिक केंद्रित, अनुकूलनशील (adaptive) और क्षेत्र-विशिष्ट होता जा रहा है। भारत को अपनी 'जीरो टॉलरेंस' नीति को जारी रखते हुए क्षेत्रीय सहयोग (जैसे SCO और BRICS) को और मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि सीमा पार आतंकवाद को समाप्त किया जा सके।

