संदर्भ:
हाल ही में, विश्व आर्थिक मंच (WEF) ने 'वैश्विक जोखिम रिपोर्ट 2026' जारी की है। इस रिपोर्ट में 'भू-आर्थिक टकराव' को अल्पकालिक वैश्विक जोखिमों में शीर्ष पर रखा गया है, जबकि 'साइबर असुरक्षा' को भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण जोखिम बताया गया है।
विश्व आर्थिक मंच (WEF) के बारे में:
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- विश्व आर्थिक मंच एक स्विस सार्वजनिक-निजी सहयोग संगठन है, जिसकी स्थापना 1971 में क्लॉस श्वाब द्वारा की गई थी। इसका मुख्यालय जिनेवा में है।
- यह सरकार, व्यवसाय, नागरिक समाज और शैक्षणिक क्षेत्र के प्रमुखों को प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर चर्चा और समाधान के लिए एक साझा मंच प्रदान करता है।
- विश्व आर्थिक मंच एक स्विस सार्वजनिक-निजी सहयोग संगठन है, जिसकी स्थापना 1971 में क्लॉस श्वाब द्वारा की गई थी। इसका मुख्यालय जिनेवा में है।
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वैश्विक जोखिम क्या है?
वैश्विक जोखिम से तात्पर्य ऐसी संभावित घटना या स्थिति से है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था, जनसंख्या या प्राकृतिक प्रणालियों के बड़े हिस्से को गंभीर नुकसान पहुँचाने में सक्षम हो। ये जोखिम अक्सर परस्पर जुड़े होते हैं और सीमाओं के पार व्यापक प्रभाव पैदा कर सकते हैं।
रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष:
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- वैश्विक जोखिम परिदृश्य (2026–2028)
- अल्पकालिक अवधि में, भू-आर्थिक टकराव अन्य सभी जोखिमों को पीछे छोड़कर शीर्ष वैश्विक चिंता बन गया है। इसमें देशों द्वारा भू-राजनीतिक लाभ प्राप्त करने और प्रतिद्वंद्वियों को नियंत्रित करने के लिए आर्थिक साधनों (जैसे व्यापार प्रतिबंध, आर्थिक दंड/, निवेश नियंत्रण और तकनीकी प्रतिबंध) का रणनीतिक उपयोग शामिल है।
- यह रुझान बढ़ती आर्थिक प्रतिस्पर्धा और पारंपरिक बहुपक्षीय ढाँचों के कमजोर होने को दर्शाता है।
- अल्पकालिक अवधि में, भू-आर्थिक टकराव अन्य सभी जोखिमों को पीछे छोड़कर शीर्ष वैश्विक चिंता बन गया है। इसमें देशों द्वारा भू-राजनीतिक लाभ प्राप्त करने और प्रतिद्वंद्वियों को नियंत्रित करने के लिए आर्थिक साधनों (जैसे व्यापार प्रतिबंध, आर्थिक दंड/, निवेश नियंत्रण और तकनीकी प्रतिबंध) का रणनीतिक उपयोग शामिल है।
- वैश्विक स्तर पर अन्य प्रमुख जोखिम:
- राज्य-आधारित सशस्त्र संघर्ष: देशों के बीच जारी तनाव और युद्ध।
- भ्रामक सूचना और दुष्प्रचार : जो सामाजिक एकजुटता और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर करते हैं।
- सामाजिक ध्रुवीकरण: समाजों के भीतर और उनके बीच गहराती खाई।
- चरम मौसमी घटनाएँ: हालांकि अल्पकालिक अवधि में पर्यावरणीय जोखिमों पर भू-राजनीतिक और आर्थिक चिंताएँ हावी हो गई हैं।
- राज्य-आधारित सशस्त्र संघर्ष: देशों के बीच जारी तनाव और युद्ध।
- वैश्विक जोखिम परिदृश्य (2026–2028)
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दीर्घकालिक जोखिम (2036 तक):
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- अगले एक दशक के परिदृश्य में, पर्यावरणीय जोखिमों की गंभीरता सबसे अधिक बनी हुई है:
- चरम मौसमी घटनाएँ।
- जैव विविधता की हानि और पारिस्थितिकी तंत्र का पतन।
- पृथ्वी प्रणालियों में महत्वपूर्ण परिवर्तन।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीकों के प्रतिकूल परिणाम।
- चरम मौसमी घटनाएँ।
- अगले एक दशक के परिदृश्य में, पर्यावरणीय जोखिमों की गंभीरता सबसे अधिक बनी हुई है:
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भारत के लिए जोखिम परिदृश्य (2026):
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- भारत के लिए यह रिपोर्ट प्राथमिकताओं के एक अलग संयोजन पर प्रकाश डालती है:
- साइबर असुरक्षा: इसे शीर्ष जोखिम माना गया है, जो शासन, भुगतान और सेवा वितरण के लिए डिजिटल बुनियादी ढांचे पर भारत की अत्यधिक निर्भरता को दर्शाता है।
- आय और धन की असमानता: निरंतर बनी रहने वाली असमानताएं जो आर्थिक और सामाजिक संवेदनशीलता को बढ़ाती हैं।
- अपर्याप्त सार्वजनिक सेवाएँ और सामाजिक सुरक्षा: स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढाँचे और कल्याणकारी प्रणालियों में कमियाँ।
- आर्थिक मंदी: वैश्विक झटकों और व्यापारिक बाधाओं के प्रति संवेदनशीलता जो विकास और रोजगार को प्रभावित करती है।
- राज्य-आधारित सशस्त्र संघर्ष: क्षेत्रीय तनाव और सीमा पार के मुद्दों से उत्पन्न सुरक्षा चुनौतियाँ।
- साइबर असुरक्षा: इसे शीर्ष जोखिम माना गया है, जो शासन, भुगतान और सेवा वितरण के लिए डिजिटल बुनियादी ढांचे पर भारत की अत्यधिक निर्भरता को दर्शाता है।
- वैश्विक परिदृश्य की तुलना में, भारत का जोखिम विशुद्ध भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बजाय सामाजिक और शासन संबंधी चुनौतियों पर अधिक बल देता है।
- भारत के लिए यह रिपोर्ट प्राथमिकताओं के एक अलग संयोजन पर प्रकाश डालती है:
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भारत के लिए नीतिगत निहितार्थ:
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- रिपोर्ट के निष्कर्ष भारत की रणनीतिक योजना और प्रशासनिक प्रतिक्रियाओं के लिए कई संकेत देते हैं:
- डिजिटल इकोसिस्टम की सुरक्षा के लिए साइबर सुरक्षा बुनियादी ढाँचे और नियामक ढाँचों को सुदृढ़ करना।
- समावेशी विकास रणनीतियों और विस्तारित सामाजिक सुरक्षा के माध्यम से आय असमानता को दूर करना।
- लचीलापन बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा तंत्र में सार्वजनिक सेवाओं में सुधार करना।
- भू-आर्थिक झटकों के प्रभाव को कम करने के लिए व्यापार और आर्थिक साझेदारी का विविधीकरण करना।
- राष्ट्रीय नियोजन ढाँचों में दीर्घकालिक जलवायु और तकनीकी जोखिम आकलनों को एकीकृत करना।
- डिजिटल इकोसिस्टम की सुरक्षा के लिए साइबर सुरक्षा बुनियादी ढाँचे और नियामक ढाँचों को सुदृढ़ करना।
- रिपोर्ट के निष्कर्ष भारत की रणनीतिक योजना और प्रशासनिक प्रतिक्रियाओं के लिए कई संकेत देते हैं:
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