संदर्भ:
हाल ही में “स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स माइग्रेटरी स्पीशीज़” की एक अंतरिम रिपोर्ट जारी की गई है, जिसमें बताया गया है कि संयुक्त राष्ट्र की एक संधि के तहत संरक्षित लगभग आधी प्रवासी प्रजातियों की आबादी घट रही है। यह रिपोर्ट 23–29 मार्च 2026 को ब्राज़ील के कैम्पो ग्रांडे में होने वाली CMS COP15 बैठक से पहले जारी की गई है।
रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:
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- लगभग आधी प्रवासी प्रजातियों में गिरावट: रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर प्रवासी वन्यजीवों की स्थिति चिंताजनक है। लगभग 49% प्रवासी प्रजातियों की आबादी में गिरावट दर्ज की गई है, जबकि लगभग 24% प्रजातियाँ वर्तमान में विलुप्त होने के खतरे का सामना कर रही हैं। संधि के अंतर्गत सूचीबद्ध कुल 1,189 प्रजातियों में से लगभग 582 प्रजातियों की संख्या लगातार कम हो रही है।
- विभिन्न प्रजाति समूह प्रभावित: प्रवासी वन्यजीवों में गिरावट का प्रभाव अलग-अलग पारिस्थितिक तंत्रों की अनेक प्रजातियों पर पड़ रहा है। इनमें पक्षी प्रमुख हैं, जो आवास के नष्ट होने और बीमारियों के फैलाव से प्रभावित हो रहे हैं। इसके अलावा कई जानवर (जैसे वाइल्डबीस्ट), मीठे पानी की मछलियाँ तथा समुद्री जीव जैसे शार्क, रे और समुद्री कछुए भी इस गिरावट से प्रभावित हो रहे हैं।
- विलुप्ति का बढ़ता जोखिम: अंतरिम रिपोर्ट के अनुसार 26 प्रवासी प्रजातियों को IUCN रेड लिस्ट में अधिक खतरे वाली श्रेणियों में स्थानांतरित किया गया है। इनमें 18 प्रवासी तटीय पक्षी शामिल हैं, जो तटीय और आर्द्रभूमि पारिस्थितिक तंत्रों पर बढ़ते खतरे को दर्शाते हैं। हालांकि कुछ प्रजातियों की स्थिति संरक्षण प्रयासों के कारण बेहतर भी हुई है, जैसे साइगा एंटीलोप, स्किमिटर-हॉर्न्ड ओरिक्स और मेडिटेरेनियन मॉन्क सील। यह दर्शाता है कि लक्षित और प्रभावी संरक्षण उपाय सकारात्मक परिणाम दे सकते हैं।
- लगभग आधी प्रवासी प्रजातियों में गिरावट: रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक स्तर पर प्रवासी वन्यजीवों की स्थिति चिंताजनक है। लगभग 49% प्रवासी प्रजातियों की आबादी में गिरावट दर्ज की गई है, जबकि लगभग 24% प्रजातियाँ वर्तमान में विलुप्त होने के खतरे का सामना कर रही हैं। संधि के अंतर्गत सूचीबद्ध कुल 1,189 प्रजातियों में से लगभग 582 प्रजातियों की संख्या लगातार कम हो रही है।
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प्रवासी प्रजातियों के सामने प्रमुख खतरे:
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- आवास का नष्ट होना और विखंडन: आवास का नष्ट होना प्रवासी वन्यजीवों के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है। तेजी से बढ़ता शहरी विस्तार, तटीय विकास और आर्द्रभूमियों का क्षरण प्रवास के मार्गों को बाधित कर देता है और उपलब्ध आवास को कम कर देता है।
- अत्यधिक दोहन: अत्यधिक शिकार, मछली पकड़ना और वन्यजीवों का अवैध व्यापार प्रवासी जानवरों की आबादी को तेजी से घटाते हैं और उन्हें विलुप्त होने के खतरे के प्रति अधिक संवेदनशील बना देते हैं।
- अवसंरचनात्मक बाधाएँ: रेलवे लाइनें, सड़कें, बाड़ और पाइपलाइन जैसी बड़ी अवसंरचनाएँ पारंपरिक प्रवास मार्गों को अवरुद्ध कर सकती हैं। यह समस्या विशेष रूप से मध्य एशिया जैसे क्षेत्रों में खुर वाले जानवरों (Hoofed animals) के लिए अधिक गंभीर है।
- बीमारियों का प्रकोप: हाईली पैथोजेनिक एवियन इन्फ्लूएंजा (H5N1) के फैलाव ने प्रवासी पक्षियों और कुछ समुद्री स्तनधारियों में बड़े पैमाने पर मृत्यु की घटनाएँ पैदा की हैं, जिससे पहले से ही कमजोर आबादी पर और अधिक दबाव बढ़ गया है।
- आवास का नष्ट होना और विखंडन: आवास का नष्ट होना प्रवासी वन्यजीवों के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है। तेजी से बढ़ता शहरी विस्तार, तटीय विकास और आर्द्रभूमियों का क्षरण प्रवास के मार्गों को बाधित कर देता है और उपलब्ध आवास को कम कर देता है।
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प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण संबंधी सम्मेलन (CMS):
यह रिपोर्ट प्रवासी वन्यजीव प्रजातियों के संरक्षण संबंधी सम्मेलन (CMS) के अंतर्गत तैयार की गई है। यह 1979 में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के तहत अपनाई गई एक कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संधि है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय सीमाओं के पार प्रवासी जानवरों और उनके आवासों का संरक्षण करना है।
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- दो प्रमुख परिशिष्ट:
- परिशिष्ट–I: इसमें संकटग्रस्त प्रवासी प्रजातियाँ शामिल होती हैं और इनके लिए कड़ी सुरक्षा आवश्यक होती है, जैसे आवास का पुनर्स्थापन और शिकार पर प्रतिबंध।
- परिशिष्ट–II: इसमें वे प्रजातियाँ शामिल होती हैं जिनके संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता होती है।
- परिशिष्ट–I: इसमें संकटग्रस्त प्रवासी प्रजातियाँ शामिल होती हैं और इनके लिए कड़ी सुरक्षा आवश्यक होती है, जैसे आवास का पुनर्स्थापन और शिकार पर प्रतिबंध।
- दो प्रमुख परिशिष्ट:
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जैव विविधता संरक्षण के लिए महत्व:
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- प्रारंभिक चेतावनी संकेतक: प्रवासी प्रजातियाँ जैव संकेतक (बायोइंडिकेटर) के रूप में कार्य करती हैं और पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य तथा पर्यावरणीय परिवर्तनों को दर्शाती हैं।
- पारिस्थितिक संतुलन: ये परागण, पोषक तत्वों के परिवहन और खाद्य श्रृंखला की स्थिरता जैसे पारिस्थितिकीय प्रक्रियाओं को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता: क्योंकि प्रवासी प्रजातियाँ कई देशों की सीमाओं को पार करती हैं, इसलिए इनके संरक्षण के लिए वैश्विक सहयोग और समन्वित नीतियाँ अत्यंत आवश्यक हैं।
- प्रारंभिक चेतावनी संकेतक: प्रवासी प्रजातियाँ जैव संकेतक (बायोइंडिकेटर) के रूप में कार्य करती हैं और पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य तथा पर्यावरणीय परिवर्तनों को दर्शाती हैं।
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निष्कर्ष:
“स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स माइग्रेटरी स्पीशीज़” की अंतरिम रिपोर्ट उभरते हुए जैव विविधता संकट की ओर संकेत करती है। लगभग आधी प्रवासी प्रजातियों की आबादी घट रही है और कई प्रजातियाँ विलुप्ति के खतरे का सामना कर रही हैं, इसलिए इनके संरक्षण के लिए तुरंत वैश्विक स्तर पर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। प्रवासी वन्यजीव प्रजातियों के संरक्षण संबंधी सम्मेलन (CMS) के तहत अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना, आवासों की रक्षा करना और मानव गतिविधियों से उत्पन्न खतरों को कम करना प्रवासी वन्यजीवों के दीर्घकालिक अस्तित्व और वैश्विक पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।
