संदर्भ:
हाल ही में साइंस (Science) पत्रिका में प्रकाशित एक अध्ययन ने आर्बस्कुलर माइकोराइज़ल (AM) कवकों का पहला वैश्विक मानचित्र प्रस्तुत किया है। इस अध्ययन ने उन विशाल भूमिगत कवकीय जालों (फंगल नेटवर्क) के वास्तविक विस्तार को उजागर किया है, जो पौधों के जीवन को सहारा देने के साथ-साथ जलवायु विनियमन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अध्ययन के प्रमुख निष्कर्ष:
-
-
- विश्व की ऊपरी मृदा (Topsoil) में लगभग 110 क्वाड्रिलियन किलोमीटर लंबी कवकीय हाइफ़ा (Hyphae) पाई गई हैं, जो पृथ्वी और सूर्य के बीच लगभग एक अरब यात्राओं के बराबर दूरी के समान है।
- AM कवकीय नेटवर्क लगभग 30 करोड़ टन (300 मिलियन टन) कार्बन का भंडारण करते हैं।
- ये कवक प्रतिवर्ष लगभग 4 अरब टन CO₂-समतुल्य (CO₂-equivalent) कार्बन के अवशोषण (Sequestration) में योगदान देते हैं, जो वैश्विक मानव-जनित कार्बन उत्सर्जन का लगभग 11 प्रतिशत है।
- विश्व के लगभग 40 प्रतिशत AM कवकीय नेटवर्क घासभूमि (Grassland) पारिस्थितिक तंत्रों में केंद्रित हैं, जिनमें प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं-
- साउथ सूडान की घासभूमियाँ,
- तिब्बत का पठार ,
- बन्नी घासभूमियाँ, गुजरात
- साउथ सूडान की घासभूमियाँ,
- कृषि भूमि (Croplands) में प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत कम कवकीय घनत्व पाया गया।
- विश्व की ऊपरी मृदा (Topsoil) में लगभग 110 क्वाड्रिलियन किलोमीटर लंबी कवकीय हाइफ़ा (Hyphae) पाई गई हैं, जो पृथ्वी और सूर्य के बीच लगभग एक अरब यात्राओं के बराबर दूरी के समान है।
-
आर्बस्कुलर माइकोराइज़ल (AM) कवक क्या हैं?
AM कवक प्राचीन मृदा सूक्ष्मजीव हैं, जो पृथ्वी पर पाई जाने वाली लगभग 80 प्रतिशत स्थलीय पौध प्रजातियों के साथ पारस्परिक लाभकारी सहजीवी संबंध (Mutualistic Symbiosis) स्थापित करते हैं।
यह सहजीवी संबंध कैसे कार्य करता है?
कवक पौधों को प्रदान करते हैं:
-
-
- मृदा से फॉस्फोरस, नाइट्रोजन, जस्ता (जिंक) तथा जल उपलब्ध कराते हैं।
- अपने विस्तृत भूमिगत नेटवर्क के माध्यम से पोषक तत्त्वों के अवशोषण की क्षमता बढ़ाते हैं।
- मृदा से फॉस्फोरस, नाइट्रोजन, जस्ता (जिंक) तथा जल उपलब्ध कराते हैं।
-
पौधे कवकों को प्रदान करते हैं:
-
-
- प्रकाश-संश्लेषण द्वारा निर्मित शर्करा एवं कार्बनिक कार्बन यौगिक उपलब्ध कराते हैं।
- प्रकाश-संश्लेषण द्वारा निर्मित शर्करा एवं कार्बनिक कार्बन यौगिक उपलब्ध कराते हैं।
-
यह पोषक तत्त्वों का आदान-प्रदान पौधों की वृद्धि तथा सम्पूर्ण पारिस्थितिक तंत्र की उत्पादकता को बढ़ाता है।
महत्वपूर्ण संरचनाएँ
1. आर्बस्क्यूल (Arbuscules)
-
-
- ये जड़ कोशिकाओं के भीतर बनने वाली वृक्षाकार (Tree-like) संरचनाएँ होती हैं।
- पोषक तत्त्वों के आदान-प्रदान का प्रमुख स्थल होती हैं।
- ये जड़ कोशिकाओं के भीतर बनने वाली वृक्षाकार (Tree-like) संरचनाएँ होती हैं।
-
2. वेसिकल्स (Vesicles)
-
-
- ये भंडारण अंग (Storage Organs) होते हैं।
- इनमें वसा (Lipids) एवं पोषक तत्त्व संचित रहते हैं।
- ये भंडारण अंग (Storage Organs) होते हैं।
-
3. हाइफ़ा (Hyphae)
-
-
- ये धागेनुमा तंतु (Thread-like Filaments) होते हैं।
- ये विस्तृत भूमिगत नेटवर्क बनाकर पौधों और मृदा को आपस में जोड़ते हैं।
- ये धागेनुमा तंतु (Thread-like Filaments) होते हैं।
-
पारिस्थितिक एवं कृषि संबंधी महत्त्व:
1. जलवायु परिवर्तन न्यूनीकरण
-
-
- कार्बन पृथक्करण (Carbon Sequestration) की अत्यधिक क्षमता रखते हैं।
- मृदा में कार्बन संचयन को बढ़ाकर वायुमंडलीय CO₂ के स्तर को कम करने में सहायता करते हैं।
- कार्बन पृथक्करण (Carbon Sequestration) की अत्यधिक क्षमता रखते हैं।
-
2. मृदा स्वास्थ्य
-
-
- ये ग्लोमालिन (Glomalin) नामक ग्लाइकोप्रोटीन का उत्पादन करते हैं।
- इससे मृदा की संरचना सुदृढ़ होती है तथा मृदा अपरदन में कमी आती है।
- ये ग्लोमालिन (Glomalin) नामक ग्लाइकोप्रोटीन का उत्पादन करते हैं।
-
3. सतत कृषि
-
-
- पोषक तत्त्वों के उपयोग की दक्षता बढ़ाते हैं।
- सूखा एवं लवणीयता (Salinity) के प्रति पौधों की सहनशीलता में वृद्धि करते हैं।
- रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में सहायक होते हैं।
- पोषक तत्त्वों के उपयोग की दक्षता बढ़ाते हैं।
-
4. जैव विविधता संरक्षण
-
-
- पारिस्थितिक तंत्रों की प्रत्यास्थता (Resilience) को मजबूत करते हैं।
- पौध विविधता के संरक्षण में योगदान देते हैं।
- पारिस्थितिक तंत्रों की प्रत्यास्थता (Resilience) को मजबूत करते हैं।
-
AM कवकों के समक्ष चुनौतियाँ:
अध्ययन के अनुसार, AM कवकीय नेटवर्क निम्नलिखित कारणों से गंभीर खतरे का सामना कर रहे हैं-
-
-
- घासभूमियों का कृषि भूमि में रूपांतरण,
- गहन जुताई (Intensive Tillage) की प्रथाएँ,
- रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग,
- एकल फसल आधारित कृषि प्रणाली (Monoculture),
- भूमि क्षरण एवं आवासीय क्षेत्रों का विनाश।
- घासभूमियों का कृषि भूमि में रूपांतरण,
-
अध्ययन में यह भी चेतावनी दी गई है कि वर्तमान में घासभूमियों का कृषि भूमि में रूपांतरण वनों की तुलना में लगभग चार गुना अधिक तीव्र गति से हो रहा है, जिससे इन भूमिगत पारिस्थितिक तंत्रों के अस्तित्व पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।
भारत के लिए महत्त्व:
भारत की बन्नी घासभूमियाँ को AM कवकों की विविधता के वैश्विक हॉटस्पॉट के रूप में चिह्नित किया गया है। अध्ययन के निष्कर्ष निम्नलिखित क्षेत्रों में भारत के प्रयासों को सुदृढ़ आधार प्रदान करते हैं-
-
-
- प्राकृतिक खेती (Natural Farming),
- सतत कृषि,
- भूमि पुनर्स्थापन (Land Restoration),
- जलवायु परिवर्तन न्यूनीकरण,
- मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन।
- प्राकृतिक खेती (Natural Farming),
-
निष्कर्ष:
आर्बस्कुलर माइकोराइज़ल कवकों के वैश्विक मानचित्रण से यह स्पष्ट होता है कि पृथ्वी के भूमिगत कवकीय नेटवर्क एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक अवसंरचना (Ecological Infrastructure) के रूप में कार्य करते हैं। ये खाद्य सुरक्षा, जैव विविधता संरक्षण तथा जलवायु विनियमन को बनाए रखने में आधारभूत भूमिका निभाते हैं। अतः सतत कृषि और वैश्विक जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए इन अदृश्य किंतु अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिगत पारिस्थितिक तंत्रों की पहचान, संरक्षण और संवर्धन अनिवार्य है।
