संदर्भ:
हाल ही में इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट (Economist Intelligence Unit-EIU) ने ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स 2026 जारी किया, जिसमें विश्व के 173 शहरों की रहने योग्य (Liveability) परिस्थितियों का आकलन किया गया। भारतीय शहरों में नई दिल्ली को 120वाँ स्थान प्राप्त हुआ।
ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स क्या है?
ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स EIU द्वारा प्रतिवर्ष प्रकाशित की जाने वाली रिपोर्ट है, जो विश्व के प्रमुख शहरों में जीवन की गुणवत्ता (Quality of Life) का मूल्यांकन करती है।
उद्देश्य:
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- विभिन्न शहरों की रहने योग्य परिस्थितियों की तुलना करना।
- कर्मचारियों के लिए हार्डशिप अलाउंस (Hardship Allowance) निर्धारित करने में कंपनियों की सहायता करना।
- शहरी जीवन की समग्र गुणवत्ता का आकलन करना।
- विभिन्न शहरों की रहने योग्य परिस्थितियों की तुलना करना।
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मूल्यांकन के आधार:
यह सूचकांक 173 शहरों का मूल्यांकन 30 गुणात्मक एवं मात्रात्मक संकेतकों के आधार पर निम्नलिखित पाँच श्रेणियों में करता है-
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श्रेणी |
भार (%) |
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स्थिरता (Stability) |
25% |
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स्वास्थ्य सेवाएँ (Healthcare) |
20% |
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संस्कृति एवं पर्यावरण (Culture & Environment) |
25% |
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शिक्षा (Education) |
10% |
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अवसंरचना (Infrastructure) |
20% |
प्रत्येक शहर को 100 अंकों के पैमाने पर अंक दिए जाते हैं। अधिक अंक बेहतर रहने योग्य स्थिति को दर्शाते हैं।
शीर्ष स्थान प्राप्त शहर:
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रैंक |
शहर |
देश |
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1 |
कोपेनहेगन |
डेनमार्क |
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2 |
वियना |
ऑस्ट्रिया |
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3 |
मेलबर्न |
ऑस्ट्रेलिया |
भारतीय शहरों का प्रदर्शन:
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शहर |
रैंक |
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नई दिल्ली |
120 |
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मुंबई |
121 |
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चेन्नई |
123 |
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बेंगलुरु |
127 |
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- नई दिल्ली और मुंबई ने वर्ष 2025 की अपनी रैंकिंग बरकरार रखी।
- भारतीय शहरों को अवसंरचना, प्रदूषण, यातायात जाम एवं शहरी प्रशासन जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
- नई दिल्ली और मुंबई ने वर्ष 2025 की अपनी रैंकिंग बरकरार रखी।
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वैश्विक रुझान:
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- पश्चिमी यूरोप दुनिया का सबसे अधिक रहने योग्य क्षेत्र बना हुआ है, हालांकि उसके औसत स्कोर में विशेष बदलाव नहीं हुआ।
- एशियाई शहरों की रहने योग्य स्थिति में सुधार देखा गया है।
- रिपोर्ट के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र सहित विभिन्न भू-राजनीतिक तनावों के कारण कुछ शहरों के स्थिरता (Stability) स्कोर प्रभावित हुए हैं।
- पश्चिमी यूरोप दुनिया का सबसे अधिक रहने योग्य क्षेत्र बना हुआ है, हालांकि उसके औसत स्कोर में विशेष बदलाव नहीं हुआ।
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भारत में शहरीकरण:
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- वर्तमान में भारत की लगभग 35–36% जनसंख्या शहरी क्षेत्रों में रहती है, जो 2047 तक 50% होने का अनुमान है।
- भारतीय शहर देश के लगभग 66% GDP में योगदान देते हैं, जिसमें दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु का योगदान 30% से अधिक है।
- दिल्ली देश का सबसे बड़ा शहरी समूह (Urban Agglomeration) है।
- 74वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के तहत नगर पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम की व्यवस्था कर शहरी प्रशासन को सशक्त बनाया गया।
- स्मार्ट सिटीज मिशन (2015) के अंतर्गत 100 शहरों का चयन किया गया, जिनमें 94% से अधिक परियोजनाएँ पूरी हो चुकी हैं।
- इसके बावजूद यातायात जाम, शहरी गरीबी, झुग्गी बस्तियाँ और अपर्याप्त अवसंरचना जैसी समस्याएँ बनी हुई हैं। भारत की 17% से अधिक शहरी आबादी झुग्गी बस्तियों में रहती है, जबकि इंदौर, विशाखापत्तनम और लखनऊ जैसे शहर उभरते हुए टियर-II एवं टियर-III विकास केंद्र बन रहे हैं।
- वर्तमान में भारत की लगभग 35–36% जनसंख्या शहरी क्षेत्रों में रहती है, जो 2047 तक 50% होने का अनुमान है।
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भारतीय शहरों के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ:
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- तीव्र शहरीकरण एवं जनसंख्या वृद्धि।
- यातायात जाम और अपर्याप्त सार्वजनिक परिवहन।
- वायु प्रदूषण एवं पर्यावरणीय क्षरण।
- स्वास्थ्य सेवाओं एवं शहरी अवसंरचना पर बढ़ता दबाव।
- शहरी प्रशासन एवं सेवा वितरण में कमियाँ।
- तीव्र शहरीकरण एवं जनसंख्या वृद्धि।
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लिवेबिलिटी का महत्व:
बेहतर लिवेबिलिटी रैंकिंग से-
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- वैश्विक निवेश आकर्षित होता है।
- जीवन की गुणवत्ता एवं जीवन सुगमता (Ease of Living) में सुधार होता है।
- कुशल मानव संसाधन एवं प्रतिभाओं को आकर्षित करने में सहायता मिलती है।
- सतत एवं समावेशी शहरी विकास को बढ़ावा मिलता है।
- वैश्विक निवेश आकर्षित होता है।
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निष्कर्ष:
ग्लोबल लिवेबिलिटी इंडेक्स 2026 यह दर्शाता है कि भारतीय शहरों को अवसंरचना, शहरी प्रशासन और सार्वजनिक सेवाओं में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। रहने योग्य शहर केवल नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर नहीं बनाते, बल्कि निवेश, रोजगार, प्रतिभा और सतत आर्थिक विकास को भी प्रोत्साहित करते हैं।
