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Blog / 15 Jan 2026

जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की भारत यात्रा

संदर्भ

हाल ही में जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ भारत की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर थे। यह यात्रा भारतजर्मनी रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष और राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हुई। यह दौरा इस माह के अंत में प्रस्तावित भारतयूरोपीय संघ (EU) शिखर सम्मेलन से पहले तथा रूसयूक्रेन युद्ध और वैश्विक आपूर्ति-श्रृंखलाओं के पुनर्संरेखण से उत्पन्न भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच संपन्न हुआ।
यूरोपीय संघ की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के साथ-साथ जर्मनी भारत का यूरोप में सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है अतः यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों से कहीं आगे व्यापक रणनीतिक महत्व रखती है।

यात्रा के प्रमुख परिणाम

दोनों देशों के मध्य 19 समझौतों और समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर हुए। ये समझौते भारत के रणनीतिक, आर्थिक और भू-राजनीतिक अभिसरण को दर्शाते हैं।

रणनीतिक और रक्षा सहयोग

रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप पर संयुक्त आशय घोषणा (JDoI) पर हस्ताक्षर।
सह-विकास, सह-उत्पादन, प्रौद्योगिकी साझेदारी और रक्षा निर्यात मंज़ूरियों में तेजी पर ज़ोर।
पनडुब्बियों, काउंटर-यूएएस प्रणालियों, हेलीकॉप्टर प्लेटफॉर्म, संयुक्त सैन्य अभ्यास और सुरक्षा परामर्श में जारी सहयोग।

रणनीतिक प्रासंगिकता:
आत्मनिर्भर भारत और रक्षा स्वदेशीकरण को समर्थन।
रूसी रक्षा आपूर्तियों पर भारत की अत्यधिक निर्भरता कम करने में सहायक।
भारत के कुशल कार्यबल को जर्मनी की उन्नत रक्षा तकनीकों के साथ जोड़ना।

उच्च शिक्षा और वैश्विक कौशल साझेदारी

उच्च शिक्षा सहयोग के लिए व्यापक रोडमैप को अपनाया गया, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत जर्मनी को भारत में परिसर स्थापित करने का आमंत्रण।
स्वास्थ्य पेशेवरों की गतिशीलता को सुगम बनाने हेतु वैश्विक कौशल साझेदारी (JDoI) की शुरुआत।
स्कूलों, विश्वविद्यालयों और व्यावसायिक संस्थानों में जर्मन भाषा शिक्षा का विस्तार।
नवीकरणीय ऊर्जा में कौशल विकास हेतु भारतजर्मनी उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना।

आर्थिक और व्यापारिक संबंध

• 2024 में द्विपक्षीय व्यापार 50 अरब अमेरिकी डॉलर के पार, जो भारत–EU व्यापार का 25% से अधिक है।
लघु एवं मध्यम उद्यमों (SMEs), स्टार्टअप्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटलीकरण और आपूर्ति-श्रृंखला विविधीकरण में मज़बूत द्विदिश निवेश।
जर्मनइंडियन सीईओ फोरम के माध्यम से संस्थागत समर्थन।
भारतयूरोपियन यूनियन मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के शीघ्र निष्कर्ष पर बल।

महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियाँ

सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, दूरसंचार, एआई, स्वास्थ्य और जैव-अर्थव्यवस्था में सहयोग को सुदृढ़ करना।

प्रमुख पहलें:
सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम साझेदारी
महत्वपूर्ण खनिज सहयोग ढाँचा
भारतजर्मनी डिजिटल संवाद कार्य योजना (2026–27)

रणनीतिक उद्देश्य:
विश्वसनीय आपूर्ति-श्रृंखलाओं का निर्माण, डिजिटल संप्रभुता सुनिश्चित करना और चीन-केंद्रित प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र पर निर्भरता कम करना।

जलवायु, ऊर्जा और सततता

नवीकरणीय ऊर्जा में भारतजर्मनी उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना।
ग्रीन हाइड्रोजन मेगा-परियोजनाओं, शहरी गतिशीलता और जलवायु कार्रवाई में सहयोग।
ग्रीन और सतत विकास साझेदारी के तहत 2030 तक 10 अरब यूरो की जर्मनी की प्रतिबद्धता।

हिंद-प्रशांत और वैश्विक भू-राजनीति

मुक्त एवं खुले हिंद-प्रशांत, UNCLOS और अंतरराष्ट्रीय क़ानून के प्रति प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि।
इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव (IPOI) के तहत सहयोग।
प्रमुख वैश्विक मुद्दों पर चर्चा, जिनमें शामिल हैं
o यूक्रेन युद्ध (संयुक्त राष्ट्र चार्टर-आधारित शांति का समर्थन)
o ग़ाज़ा संघर्ष (दो-राज्य समाधान का समर्थन)
o आतंकवाद (भारत में हुए हमलों की कड़ी निंदा)
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधारों के लिए समर्थन और G4 ढाँचे के तहत समन्वय।

निष्कर्ष

जर्मन चांसलर मर्ज़ की यात्रा यूरोप की रणनीतिक सोच में भारत के बढ़ते महत्व को रेखांकित करती है। आर्थिक, रक्षा, तकनीकी और जलवायु क्षेत्रों में सहयोग के गहराते दायरे के साथ-साथ, इस यात्रा ने तेज़ी से विकसित हो रही बहुध्रुवीय दुनिया में हितों के समन्वय की जटिलताओं को भी उजागर किया। कुल मिलाकर, इन परिणामों ने भारतजर्मनी संबंधों को उल्लेखनीय रूप से मज़बूत किया है।