संदर्भ:
हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC) के स्टैटिक टेस्ट फैसिलिटी में सब-ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल फॉर एक्सपेरिमेंट्स (SOLVE) के ठोस (Solid) मोटर का पहला ग्राउंड टेस्ट सफलतापूर्वक संपन्न किया। यह परीक्षण भारत के प्रमुख गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
SOLVE क्या है?
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- SOLVE (Sub-Orbital Launch Vehicle for Experiments) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा विकसित एक विशेष ठोस मोटर परीक्षण वाहन (Solid Motor Test Vehicle) है। इसका उद्देश्य गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण तकनीकों का परीक्षण एवं सत्यापन करना है।
- यह विशेष रूप से क्रू मॉड्यूल (Crew Module) की एकीकृत पैराशूट प्रणाली तथा रिकवरी (Recovery) प्रक्रिया का वास्तविक उड़ान जैसी परिस्थितियों में परीक्षण करने के लिए विकसित किया गया है, ताकि मानवयुक्त मिशन से पहले इसकी विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके।
- SOLVE मिशन के दौरान मानव रहित (Uncrewed) क्रू मॉड्यूल को लगभग 10 से 17 किलोमीटर की ऊँचाई तक ले जाया जाता है। इसके बाद यह लॉन्च वाहन से अलग हो जाता है। फिर पूर्व निर्धारित क्रम में 10 पैराशूट खुलते हैं, जो मॉड्यूल की गति को धीरे-धीरे कम करते हैं और उसे सुरक्षित रूप से समुद्र में उतारते (Splashdown) हैं। इन परीक्षणों के माध्यम से मंदन (Deceleration) और रिकवरी प्रणाली की विश्वसनीयता का परीक्षण किया जाता है, जो अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।
- SOLVE (Sub-Orbital Launch Vehicle for Experiments) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा विकसित एक विशेष ठोस मोटर परीक्षण वाहन (Solid Motor Test Vehicle) है। इसका उद्देश्य गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण तकनीकों का परीक्षण एवं सत्यापन करना है।
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परीक्षण का महत्व:
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- SOLVE के सफल परीक्षण से क्रू मॉड्यूल की रिकवरी प्रणाली पर भरोसा और अधिक मजबूत हुआ है, जो किसी भी मानव अंतरिक्ष मिशन का सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा घटक होती है।
- यह परीक्षण इसरो को विभिन्न मिशन परिस्थितियों में कई प्रकार के योग्यता (Qualification) परीक्षण करने के लिए एक लचीला मंच उपलब्ध कराता है, जिससे अंतरिक्ष यात्रियों के प्रक्षेपण से पहले संभावित जोखिमों को कम किया जा सकता है।
- हाल ही में किए गए इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT-02) और मिशन मित्र (Mission MITRA) जैसे परीक्षणों के साथ SOLVE का सफल परीक्षण इस बात का संकेत है कि भारत अपने पहले स्वदेशी मानव अंतरिक्ष मिशन की दिशा में लगातार प्रगति कर रहा है।
- SOLVE के सफल परीक्षण से क्रू मॉड्यूल की रिकवरी प्रणाली पर भरोसा और अधिक मजबूत हुआ है, जो किसी भी मानव अंतरिक्ष मिशन का सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा घटक होती है।
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गगनयान मिशन के बारे में:
गगनयान इसरो का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य तीन अंतरिक्ष यात्रियों को लगभग 400 किलोमीटर की ऊँचाई पर स्थित निम्न पृथ्वी कक्षा (Low Earth Orbit) में अधिकतम सात दिनों के लिए भेजना तथा इसके बाद भारतीय समुद्री क्षेत्र में सुरक्षित स्प्लैशडाउन कराना है।
इस मिशन का प्रक्षेपण ह्यूमन-रेटेड एलवीएम-3 (HLVM3) रॉकेट के माध्यम से किया जाएगा।
इस अंतरिक्ष यान में निम्न प्रमुख घटक शामिल हैं-
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- क्रू मॉड्यूल (Crew Module)
- सर्विस मॉड्यूल (Service Module)
- पर्यावरण नियंत्रण एवं जीवन समर्थन प्रणाली (Environmental Control and Life Support System-ECLSS)
- क्रू एस्केप सिस्टम (Crew Escape System-CES), जो आपातकालीन स्थिति में अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
- क्रू मॉड्यूल (Crew Module)
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मानवयुक्त मिशन से पहले इसरो कई मानव रहित उड़ानों का संचालन करेगा, जिनमें व्योममित्र (Vyommitra) नामक ह्यूमनॉइड रोबोट को भी भेजा जाएगा।
गगनयान मिशन के लिए चयनित चार अंतरिक्ष यात्री हैं:
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- ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर
- ग्रुप कैप्टन अजीत कृष्णन
- ग्रुप कैप्टन अंगद प्रताप
- विंग कमांडर शुभांशु शुक्ला
- ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर
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निष्कर्ष:
SOLVE का सफल ग्राउंड टेस्ट भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस परीक्षण ने मिशन की रिकवरी प्रणाली जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण तकनीकों की विश्वसनीयता को प्रमाणित किया है, जिससे गगनयान मिशन की सुरक्षा और सफलता की संभावना और अधिक मजबूत हुई है। गगनयान कार्यक्रम न केवल भारत को स्वतंत्र मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता वाले चुनिंदा देशों की श्रेणी में स्थापित करेगा, बल्कि भविष्य के अंतरिक्ष अन्वेषण अभियानों, उन्नत अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के विकास तथा स्वदेशी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र को भी नई गति प्रदान करेगा।

