संदर्भ:
हाल ही में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने खाद्य सुरक्षा और मानक (वीगन खाद्य पदार्थ) संशोधन विनियम, 2026 के अंतर्गत यह अनिवार्य किया है कि जुलाई 2027 से सभी अनुमोदित वीगन खाद्य उत्पादों पर मानकीकृत वीगन लोगो लगाना आवश्यक होगा।
वीगन लोगो अनिवार्यकरण की प्रमुख विशेषताएँ:
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- अनिवार्य समयसीमा: सभी अनुमोदित वीगन उत्पादों की पैकेजिंग पर निर्धारित लोगो का प्रदर्शित होना अनिवार्य होगा।
- पूर्व स्वीकृति आवश्यकता: खाद्य व्यवसाय संचालकों (FBOs) को लोगो के उपयोग से पहले लाइसेंसिंग प्राधिकरण से स्पष्ट अनुमति प्राप्त करनी होगी।
- कठोर परिभाषा: केवल वही उत्पाद वीगन माने जाएंगे जो 100% पशु-उत्पत्ति रहित हों। इसमें दूध, मांस, अंडे, मछली, शहद तथा बोन चार जैसे प्रसंस्करण सहायक पदार्थ शामिल नहीं होंगे।
- आयात पर लागू: यह नियम घरेलू निर्माताओं के साथ-साथ भारत में आयातित वीगन उत्पादों पर भी समान रूप से लागू होगा।
- संचालनगत शुद्धता: निर्माताओं को गैर-वीगन उत्पाद लाइनों से पूर्ण पृथक्करण सुनिश्चित करना होगा या क्रॉस-कंटैमिनेशन रोकने हेतु कठोर स्वच्छता सत्यापन प्रोटोकॉल का पालन करना होगा।
- अनिवार्य समयसीमा: सभी अनुमोदित वीगन उत्पादों की पैकेजिंग पर निर्धारित लोगो का प्रदर्शित होना अनिवार्य होगा।
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इस कदम का महत्व:
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- उपभोक्ता विश्वास: सरकारी प्रमाणित लोगो से उत्पादों की प्रामाणिकता सुनिश्चित होगी और पादप-आधारित उत्पादों में विश्वास बढ़ेगा।
- उद्योग विकास: यह स्वास्थ्य, पर्यावरणीय स्थिरता और नैतिक उपभोग प्रवृत्तियों से प्रेरित पादप-आधारित बाजार के विस्तार को समर्थन देगा।
- स्पष्ट लेबलिंग: वीगन, डेयरी-फ्री और शाकाहारी जैसे शब्दों के बीच भ्रम को कम करते हुए मानकीकृत लेबलिंग सुनिश्चित करेगा।
- भ्रामक दावों की रोकथाम: ग्रीनवॉशिंग को रोकने में मदद करेगा तथा केवल प्रमाणित उत्पादों को ही वीगन दावा करने की अनुमति देगा, विशेषकर दूध विकल्प, मांस विकल्प और वीगन स्नैक्स में।
- उपभोक्ता विश्वास: सरकारी प्रमाणित लोगो से उत्पादों की प्रामाणिकता सुनिश्चित होगी और पादप-आधारित उत्पादों में विश्वास बढ़ेगा।
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भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण और इसकी नियामक भूमिका:
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) एक स्वायत्त वैधानिक निकाय है, जिसे खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के अंतर्गत स्थापित किया गया है। यह स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन कार्य करता है तथा भारत में खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण, वितरण, बिक्री और आयात का नियमन करता है।
इसका मुख्य दायित्व शामिल है:
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- विभिन्न बिखरे हुए खाद्य कानूनों को एकीकृत नियामक ढांचे में समाहित करना
- उपभोक्ताओं को सुरक्षित और शुद्ध खाद्य उपलब्ध कराना
- खाद्य उत्पादों और योजकों के लिए विज्ञान-आधारित मानक निर्धारित करना
- लेबलिंग, पैकेजिंग और खाद्य सुरक्षा अनुपालन का नियमन करना
- विभिन्न बिखरे हुए खाद्य कानूनों को एकीकृत नियामक ढांचे में समाहित करना
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निष्कर्ष:
FSSAI द्वारा अनिवार्य वीगन लोगो की शुरुआत भारत के खाद्य पारितंत्र में पारदर्शिता और विश्वास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मानकीकृत लेबलिंग और बेहतर नियामक निगरानी के माध्यम से यह पहल उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाएगी तथा पादप-आधारित खाद्य उद्योग के सुव्यवस्थित विकास को प्रोत्साहित करेगी।

