संदर्भ:
हाल ही में, भारत की यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों की अस्थायी सूची (UNESCO Tentative List of World Heritage Sites) में पाँच नए विरासत प्रस्ताव जोड़े गए हैं, जिससे देश में कुल 78 स्थल हो गए हैं। इन नए प्रस्तावों में मध्य प्रदेश के चार स्थल और भारत तथा दक्षिण अफ्रीका से जुड़ा एक क्रमिक अंतरराष्ट्रीय प्रस्ताव (serial transnational proposal) शामिल है।
यूनेस्को क्या है?
यूनेस्को (United Nations Educational, Scientific and Cultural Organization) संयुक्त राष्ट्र की एक विशिष्ट एजेंसी है, जिसकी स्थापना 1945 में शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति और संचार के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए की गई थी।
1972 का विश्व धरोहर कन्वेंशन (World Heritage Convention) उत्कृष्ट सार्वभौमिक मूल्य (Outstanding Universal Value - OUV) वाली सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों की पहचान तथा संरक्षण के लिए एक रूपरेखा प्रदान करता है।
अस्थायी सूची (Tentative List) उन संपत्तियों की एक सूची है, जिन्हें कोई देश भविष्य में विश्व धरोहर सूची में नामांकन के लिए उपयुक्त मानता है। अस्थायी सूची में शामिल होना एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक चरण है, लेकिन इससे स्वयं किसी स्थल को विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त नहीं होता है।
अस्थायी सूची में पाँच नए शामिल स्थल:
1. बाघ गुफा चित्रकला
बाघ गुफाओं में नौ शैल-कट बौद्ध गुफाएँ शामिल हैं, जो पश्चिमी मध्य प्रदेश में बागनी नदी के किनारे विंध्य पर्वतमाला की दक्षिणी ढलानों पर स्थित हैं।
ये गुफाएँ विशेष रूप से अपनी बौद्ध भित्ति चित्रकलाओं के लिए प्रसिद्ध हैं। ये गुफाएँ भूवैज्ञानिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये मुख्य रूप से बेसाल्ट से बने क्षेत्र में बलुआ पत्थर के एक उभार पर स्थित हैं।
2. चंबल घाटी के मंदिरों का समूह
इस प्रस्ताव में मध्य प्रदेश के बटेश्वर, पदावली और ककड़मठ के मंदिर परिसर शामिल हैं।
यह समूह क्षेत्र की मध्यकालीन मंदिर वास्तुकला, धार्मिक परंपराओं और मूर्तिकला विरासत को दर्शाता है तथा चंबल घाटी के सांस्कृतिक महत्व को उजागर करता है।
3. उदयगिरि गुफाएँ
मध्य प्रदेश में स्थित उदयगिरि गुफाएँ गुप्त काल के एक महत्वपूर्ण पवित्र सांस्कृतिक परिदृश्य का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिसका विकास मुख्य रूप से चौथी शताब्दी के उत्तरार्ध और पाँचवीं शताब्दी ईस्वी के प्रारंभ के बीच हुआ।
इस स्थल में 20 उत्खनित गुफाएँ, मूर्तिकला पैनल, अभिलेख, शैल-चिह्न तथा संबंधित स्थलाकृतिक और जलवैज्ञानिक विशेषताएँ शामिल हैं।
4. गिन्नौरगढ़ किला
मध्य प्रदेश में स्थित गिन्नौरगढ़ किला, गोंड शासकों की राजनीतिक और सैन्य विरासत को दर्शाता है।
इस पहाड़ी किले में किलेबंदी की दीवारें, प्रवेश द्वार, बुर्ज, बावड़ियाँ, महलनुमा संरचनाएँ और जलाशय मौजूद हैं। इसका वन क्षेत्र में स्थित होना और गोंड सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ाव इसे जनजातीय राज्य निर्माण और स्वदेशी स्थापत्य परंपराओं को समझने के लिए महत्वपूर्ण बनाता है।
5. सत्याग्रह के स्थल
सत्याग्रह के स्थल (Sites of Satyagraha) एक प्रस्तावित क्रमिक अंतरराष्ट्रीय संपत्ति (serial transnational property) है, जिसमें भारत और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। यह दक्षिण अफ्रीका में सत्याग्रह की अवधारणा के विकास से लेकर भारत में इसके प्रयोग, सुदृढ़ीकरण और संस्थागत रूप लेने तक की यात्रा को दर्शाता है।
इस प्रस्ताव में नौ घटक—दक्षिण अफ्रीका में दो और भारत में सात शामिल हैं। इनमें दक्षिण अफ्रीका के पीटरमैरिट्जबर्ग स्टेशन और फीनिक्स सेटलमेंट तथा भारत में साबरमती आश्रम, मणि भवन, सेवाग्राम आश्रम, आगा खान पैलेस और गांधी स्मृति जैसे स्थल शामिल हैं।
भारत के लिए महत्व:
इन स्थलों का जुड़ना भारत की सांस्कृतिक विरासत की विविधता को दर्शाता है, जिसमें बौद्ध कला, गुप्तकालीन वास्तुकला, मध्यकालीन मंदिर परंपराएँ, जनजातीय विरासत और अहिंसक प्रतिरोध का इतिहास शामिल हैं।
ये स्थल विरासत संरक्षण, सांस्कृतिक पर्यटन, स्थानीय रोजगार और सामुदायिक भागीदारी को भी बढ़ावा दे सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक पहचान ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थलों के संरक्षण के प्रयासों को मजबूत कर सकती है।
निष्कर्ष:
अस्थायी सूची के विस्तार से भारत के विरासत संरक्षण प्रयासों को मजबूती मिलती है। अब अगली प्राथमिकता वैज्ञानिक संरक्षण, उचित दस्तावेजीकरण, सामुदायिक भागीदारी और सतत पर्यटन होनी चाहिए, ताकि इन स्थलों को विश्व धरोहर की मान्यता की दिशा में आगे बढ़ाया जा सके और साथ ही इन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके।
