चर्चा में क्यों?
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों को सितंबर 2026 तक नए एफसीएनआर(बी) जमा जुटाने की अनुमति दी है तथा हेजिंग लागत को कम करने के लिए एक स्वैप सुविधा प्रदान की है। इसके बावजूद हाल के दिनों में इन जमाओं में प्रवाह कमजोर बना हुआ है, जिससे एनआरआई निधियों को आकर्षित करने के लिए उच्च ब्याज दरों की आवश्यकता बढ़ गई है।
एफसीएनआर(बी) जमा के बारे में:
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- फॉरेन करेंसी नॉन-रेज़िडेंट (बैंक) अथवा एफसीएनआर(बी) जमा भारत में एनआरआई, ओसीआई और पीआईओ द्वारा खोले जाने वाले निश्चित अवधि के जमा खाते हैं। ये खाते अमेरिकी डॉलर, यूरो, पाउंड स्टर्लिंग, येन, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और कनाडाई डॉलर जैसी विदेशी मुद्राओं में जमा की अनुमति देते हैं, बिना उन्हें भारतीय रुपये में परिवर्तित किए।
- इन जमाओं पर अर्जित ब्याज पात्र अनिवासियों के लिए भारत में कर-मुक्त होता है। बैंक इन जमाओं पर वैश्विक मानक ब्याज दरों से संबद्ध दरें प्रदान करते हैं।
- फॉरेन करेंसी नॉन-रेज़िडेंट (बैंक) अथवा एफसीएनआर(बी) जमा भारत में एनआरआई, ओसीआई और पीआईओ द्वारा खोले जाने वाले निश्चित अवधि के जमा खाते हैं। ये खाते अमेरिकी डॉलर, यूरो, पाउंड स्टर्लिंग, येन, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और कनाडाई डॉलर जैसी विदेशी मुद्राओं में जमा की अनुमति देते हैं, बिना उन्हें भारतीय रुपये में परिवर्तित किए।
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वर्तमान स्थिति और रुझान:
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- एफसीएनआर(बी) जमाओं में आने वाली राशि में तीव्र गिरावट आई है। वित्त वर्ष 2025-26 में इन जमाओं का प्रवाह 86% घटकर 946 मिलियन डॉलर रह गया, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 7.1 बिलियन डॉलर था। एफसीएनआर(बी) जमाओं की कुल बकाया राशि 33.8 बिलियन डॉलर थी।
- कुल एनआरआई जमाओं में भी वित्त वर्ष 2025-26 में गिरावट दर्ज की गई और यह 16.16 बिलियन डॉलर से घटकर 14.41 बिलियन डॉलर रह गई। हालांकि, एनआरई और एनआरओ जमाओं में वृद्धि हुई, जिससे एफसीएनआर(बी) जमाओं में आई गिरावट का प्रभाव आंशिक रूप से संतुलित हो गया। एनआरई और एनआरओ दोनों खाते भारतीय रुपये में जारी किए जाते हैं।
- एफसीएनआर(बी) जमाओं में आने वाली राशि में तीव्र गिरावट आई है। वित्त वर्ष 2025-26 में इन जमाओं का प्रवाह 86% घटकर 946 मिलियन डॉलर रह गया, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में यह 7.1 बिलियन डॉलर था। एफसीएनआर(बी) जमाओं की कुल बकाया राशि 33.8 बिलियन डॉलर थी।
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ब्याज दर अंतर और प्रतिस्पर्धात्मकता:
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- भारत में एफसीएनआर(बी) जमा पर ब्याज दरें घरेलू रुपये की सावधि जमाओं तथा वैश्विक विकल्पों की तुलना में अपेक्षाकृत कम हैं। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे प्रमुख भारतीय बैंक एफसीएनआर(बी) जमाओं पर लगभग 2.9% से 3.6% तक ब्याज प्रदान करते हैं, जबकि तुलनीय रुपये की सावधि जमाओं पर लगभग 6.3% से 6.5% तक ब्याज मिलता है।
- इसके विपरीत, विदेशी बाजारों में अमेरिकी डॉलर जमा और जमा प्रमाणपत्र (Certificates of Deposit) 4% से अधिक प्रतिफल प्रदान करते हैं। उदाहरण के लिए, मेरिक बैंक और मॉर्गन स्टेनली जैसे अमेरिकी बैंक 4% से 4.3% तक वार्षिक प्रतिफल देते हैं, जिससे वे एनआरआई निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बन जाते हैं।
- विशेषज्ञों का सुझाव है कि प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए भारतीय बैंकों को एफसीएनआर(बी) जमा दरों में कम-से-कम 100 आधार अंक (Basis Points) की वृद्धि करनी पड़ सकती है।
- भारत में एफसीएनआर(बी) जमा पर ब्याज दरें घरेलू रुपये की सावधि जमाओं तथा वैश्विक विकल्पों की तुलना में अपेक्षाकृत कम हैं। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे प्रमुख भारतीय बैंक एफसीएनआर(बी) जमाओं पर लगभग 2.9% से 3.6% तक ब्याज प्रदान करते हैं, जबकि तुलनीय रुपये की सावधि जमाओं पर लगभग 6.3% से 6.5% तक ब्याज मिलता है।
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आरबीआई के उपाय और स्वैप सुविधा:
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- प्रवाह बढ़ाने के लिए आरबीआई ने एक स्वैप सुविधा शुरू की है, जो एफसीएनआर(बी) जमा जुटाने वाले बैंकों की हेजिंग लागत को वहन करती है। इससे जोखिम कम होता है और बैंकों की लाभप्रदता में सुधार होता है।
- बैंक विदेशी मुद्रा जमाओं को रियायती दर पर आरबीआई के साथ विनिमय कर सकते हैं, जिससे डॉलर निधियों को जुटाना आसान हो जाता है। यह सुविधा सितंबर 2026 तक जुटाई गई जमाओं के लिए मान्य है।
- प्रवाह बढ़ाने के लिए आरबीआई ने एक स्वैप सुविधा शुरू की है, जो एफसीएनआर(बी) जमा जुटाने वाले बैंकों की हेजिंग लागत को वहन करती है। इससे जोखिम कम होता है और बैंकों की लाभप्रदता में सुधार होता है।
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जमा जुटाने में चुनौतियाँ:
नीतिगत समर्थन के बावजूद, कम ब्याज प्रतिस्पर्धात्मकता तथा विदेशी बाजारों, विशेषकर अमेरिका में 4% से अधिक उपलब्ध आकर्षक प्रतिफलों के कारण प्रवाह कमजोर बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नियामकीय समर्थन पर्याप्त नहीं होगा, जब तक जमा दरों में वृद्धि नहीं की जाती।
भारत के लिए महत्त्व:
एफसीएनआर(बी) जमा भारत की बाह्य स्थिरता के लिए विदेशी मुद्रा वित्तपोषण का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत है। अधिक प्रवाह से विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत होता है, बैंकिंग प्रणाली को समर्थन मिलता है तथा बाह्य वित्तपोषण पर दबाव कम होता है।
निष्कर्ष:
यद्यपि आरबीआई की स्वैप सुविधा एफसीएनआर(बी) जमाओं को अधिक आकर्षक बनाती है, फिर भी कमजोर प्रवाह उच्च ब्याज दरों की आवश्यकता को दर्शाता है। एनआरआई निधियों को प्रभावी रूप से आकर्षित करने के लिए भारतीय बैंकों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा, हेजिंग लागत और घरेलू वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलन स्थापित करना होगा।

