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Blog / 17 Aug 2026

छोटे करदाताओं की विदेशी परिसंपत्तियाँ – प्रकटीकरण योजना (FAST-DS)

संदर्भ:

हाल ही में, आयकर विभाग ने छोटे करदाताओं की विदेशी परिसंपत्तियाँ प्रकटीकरण योजना (Foreign Assets of Small Taxpayers – Disclosure Scheme: FAST-DS) के तहत 16 अगस्त से 31 दिसंबर 2026 तक एकमुश्त स्वैच्छिक प्रकटीकरण की सुविधा शुरू की है। यह योजना पात्र करदाताओं को निर्धारित सीमा के भीतर कुछ अघोषित विदेशी आय और परिसंपत्तियों को नियमित करने का अवसर प्रदान करती है।

FAST-DS क्या है?

FAST-DS का उद्देश्य ऐसे करदाताओं को राहत देना है, जैसे छात्र, युवा पेशेवर, प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारी और स्थानांतरित होकर भारत आए एनआरआई जो अपने आयकर रिटर्न (ITR) में विदेशी आय या परिसंपत्तियों का उल्लेख करने से चूक गए हों।

यह योजना मुख्य रूप से दो श्रेणियों को शामिल करती है:

      • ₹1 करोड़ तक की अघोषित विदेशी आय या परिसंपत्तियाँ।
      • ₹5 करोड़ तक की कुछ विदेशी परिसंपत्तियाँ, जिन पर पहले ही कर का भुगतान किया जा चुका है या जिन्हें करदाता द्वारा गैर-निवासी रहते हुए अर्जित किया गया था, लेकिन संबंधित ITR की अनुसूची में उनका विवरण नहीं दिया गया था।

Foreign Assets of Small Taxpayers – Disclosure Scheme (FAST-DS)

क्या-क्या घोषित किया जा सकता है?

      • करदाता विदेशी बैंक खाते, अचल संपत्ति, आभूषण, कलाकृतियाँ, शेयर, प्रतिभूतियाँ और अन्य विदेशी परिसंपत्तियों या आय का प्रकटीकरण कर सकते हैं। अघोषित रिस्ट्रिक्टेड स्टॉक यूनिट्स (RSUs) और एम्प्लॉई स्टॉक ऑप्शंस (ESOPs) भी इस योजना के दायरे में आ सकते हैं।
      • हालाँकि, निर्धारित सीमाएँ पूर्ण अधिकतम सीमाएँ (absolute ceilings) हैं, न कि अलग-अलग स्लैब। इसलिए, ₹1.5 करोड़ की अघोषित विदेशी आय या ₹6.5 करोड़ मूल्य की पात्र विदेशी परिसंपत्ति को संबंधित श्रेणी के तहत इस योजना में शामिल नहीं किया जा सकता।

कर और भुगतान:

      • ₹1 करोड़ तक की अघोषित विदेशी आय या परिसंपत्तियों के लिए करदाता को 30% कर तथा अभियोजन से छूट प्राप्त करने के लिए दंड के बदले अतिरिक्त 30% आयकर का भुगतान करना होगा।
      • वहीं, ₹5 करोड़ तक की कुछ विदेशी परिसंपत्तियों के लिए, जिन्हें पहले से कर चुकाई गई आय से अर्जित किया गया हो या जिन्हें करदाता ने गैर-निवासी रहते हुए अर्जित किया हो, ₹1 लाख शुल्क का भुगतान करके प्रकटीकरण किया जा सकता है।

योजना के तहत प्रतिरक्षा (Immunity):

      • वैध घोषणा करने और निर्धारित भुगतान पूरा करने के बाद, करदाताओं को घोषित आय या परिसंपत्तियों के संबंध में ब्लैक मनी (अघोषित विदेशी आय और परिसंपत्तियाँ) एवं कर अधिरोपण अधिनियम, 2015 के तहत आगे के कर, दंड और अभियोजन से प्रतिरक्षा प्राप्त होगी।
      • हालाँकि, यह योजना उन परिसंपत्तियों पर लागू नहीं होगी जो अपराध से प्राप्त आय (proceeds of crime) का प्रतिनिधित्व करती हैं और जिनके संबंध में धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA) के तहत कार्यवाही शुरू हो चुकी है या लंबित है।

यह योजना क्यों महत्वपूर्ण है?

      • आयकर विभाग को पहले से ही कॉमन रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड (CRS) और फॉरेन अकाउंट टैक्स कंप्लायंस एक्ट (FATCA) जैसे अंतरराष्ट्रीय सूचना-साझाकरण तंत्रों के माध्यम से विदेशी वित्तीय परिसंपत्तियों से संबंधित जानकारी प्राप्त होती है।
      • यह जानकारी करदाताओं के वार्षिक सूचना विवरण (AIS) में भी दिखाई देती है। इसलिए, FAST-DS करदाताओं को ऐतिहासिक रिपोर्टिंग में हुई गलतियों या चूकों को सुधारने का एक सीमित अवसर प्रदान करती है, इससे पहले कि उनके कारण बड़ी मात्रा में कर, दंड या अन्य कानूनी कार्रवाई हो।

विदेशी परिसंपत्तियों का मूल्यांकन:

      • इस योजना के तहत परिसंपत्तियों के मूल्यांकन की तिथि 31 मार्च 2026 निर्धारित की गई है। उचित बाजार मूल्य (Fair Market Value – FMV) सामान्यतः परिसंपत्ति के अधिग्रहण की लागत और 31 मार्च 2026 को खुले बाजार में उस परिसंपत्ति की सामान्य रूप से मिलने वाली कीमत में से जो अधिक हो, उसके आधार पर निर्धारित किया जाएगा।
      • विदेशी कंपनियों के सूचीबद्ध और गैर-सूचीबद्ध शेयरों, प्रतिभूतियों, अचल संपत्तियों तथा विदेशी साझेदारियों या LLP में हिस्सेदारी के लिए विशिष्ट मूल्यांकन नियम लागू होंगे।

प्रकटीकरण कैसे करें?

      • घोषणा Form 1 के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप से दाखिल करनी होगी। निर्धारित भुगतान सामान्यतः आयकर प्राधिकरण द्वारा आदेश पारित किए जाने के दो महीने के भीतर करना होगा।
      • भुगतान में देरी होने पर योजना में निर्धारित अधिकतम अवधि के अधीन, प्रत्येक महीने या महीने के किसी भाग के लिए 1% साधारण ब्याज लगाया जा सकता है।

महत्व:

FAST-DS कर अनुपालन को बढ़ावा देने और छोटे करदाताओं के सामने आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों के बीच संतुलन स्थापित करने का एक लक्षित प्रयास है। यह पात्र व्यक्तियों को विदेशी परिसंपत्तियों से संबंधित पुरानी रिपोर्टिंग चूकों को नियमित करने का एक अस्थायी अवसर प्रदान करती है। साथ ही, यह भारत की कर पारदर्शिता और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सूचना-साझाकरण व्यवस्था को और मजबूत करने में योगदान देती है।

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