संदर्भ:
हाल ही में नीति आयोग द्वारा निर्यात तैयारी सूचकांक 2024 जारी किया गया है। यह सूचकांक वर्ष 2020 में प्रारंभ होने के बाद इसका चौथा संस्करण है। इसका प्रमुख उद्देश्य भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की निर्यात हेतु तैयारी, संस्थागत क्षमता तथा कार्यान्वयन प्रभावशीलता का समग्र मूल्यांकन करना है। यह सूचकांक वर्ष 2030 तक 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के वस्तु निर्यात लक्ष्य और विकसित भारत @2047 की दीर्घकालिक राष्ट्रीय परिकल्पना के अनुरूप तैयार किया गया है।
सूचकांक की संरचना:
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- यह सूचकांक 4 मुख्य स्तंभों, 13 उप-स्तंभों और 70 संकेतकों पर आधारित है, जिससे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की निर्यात तैयारी का विस्तृत, तुलनात्मक और तथ्य-आधारित मूल्यांकन संभव हो पाता है।
- यह सूचकांक 4 मुख्य स्तंभों, 13 उप-स्तंभों और 70 संकेतकों पर आधारित है, जिससे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की निर्यात तैयारी का विस्तृत, तुलनात्मक और तथ्य-आधारित मूल्यांकन संभव हो पाता है।
मुख्य स्तंभ और उनके घटक
1. निर्यात अवसंरचना (20%)
o व्यापार और रसद अवसंरचना
o कनेक्टिविटी और उपयोगिताएँ
o औद्योगिक अवसंरचना
2. व्यावसायिक पारिस्थितिकी तंत्र (40%)
o व्यापक आर्थिक स्थिरता
o लागत प्रतिस्पर्धात्मकता
o मानव पूंजी विकास
o वित्त तक पहुंच
o एमएसएमई पारिस्थितिकी तंत्र
o औद्योगिक और नवाचार वातावरण
3. नीति और शासन (20%)
o राज्य-स्तरीय नीति समर्थन
o विनियामक वातावरण और अनुपालन
4. निर्यात प्रदर्शन (20%)
o राज्य-स्तरीय निर्यात रुझान
o निर्यात संवर्धन और सुविधा
o निर्यात विविधीकरण और बाजार पहुंच
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- वर्ष 2024 के संस्करण में नए आयाम जोड़े गए हैं, जिसमें व्यापक आर्थिक स्थिरता, वित्त तक पहुँच, मानव संसाधन विकास तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को सशक्त बनाना शामिल है। पूर्ववर्ती संकेतकों को नीति प्रासंगिकता और विश्लेषणात्मक गहराई बढ़ाने के लिए परिष्कृत किया गया है।
- वर्ष 2024 के संस्करण में नए आयाम जोड़े गए हैं, जिसमें व्यापक आर्थिक स्थिरता, वित्त तक पहुँच, मानव संसाधन विकास तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को सशक्त बनाना शामिल है। पूर्ववर्ती संकेतकों को नीति प्रासंगिकता और विश्लेषणात्मक गहराई बढ़ाने के लिए परिष्कृत किया गया है।
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राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का वर्गीकरण
निर्यात तैयारी सूचकांक के अंतर्गत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बड़े राज्य, छोटे राज्य, पूर्वोत्तर राज्य तथा केंद्र शासित प्रदेश की श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।
प्रत्येक श्रेणी के भीतर संबंधित क्षेत्रों को निम्नलिखित तीन समूहों में विभाजित किया गया है:
· नेतृत्वकर्ता – वे क्षेत्र जिनकी निर्यात तैयारी का स्तर उच्च है।
· चुनौतीकर्ता – वे क्षेत्र जिनकी तैयारी मध्यम स्तर की है और जिनमें सुधार की पर्याप्त संभावनाएँ विद्यमान हैं।
· आकांक्षी – वे क्षेत्र जहाँ निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र अभी प्रारंभिक अवस्था में है।
इसके अतिरिक्त, यह सूचकांक जिला-स्तरीय रणनीतियों पर विशेष बल देता है, जिससे स्थान-आधारित विकास, क्षेत्रीय संतुलन तथा वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ गहन एकीकरण को प्रोत्साहन मिलता है।
शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्य और केंद्र शासित प्रदेश
बड़े राज्यों में नेतृत्वकर्ता
· महाराष्ट्र
· तमिलनाडु
· गुजरात
· उतार प्रदेश।
· आंध्र प्रदेश
छोटे राज्यों, पूर्वोत्तर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नेतृत्वकर्ता
· उत्तराखंड
· जम्मू और कश्मीर
· नगालैंड
· दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव
· गोवा
ये राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अवसंरचना, व्यापार वातावरण, नीतिगत सहयोग और निर्यात परिणामों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं तथा अन्य क्षेत्रों के लिए मार्गदर्शक उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
सूचकांक का महत्व:
· यह सूचकांक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की आर्थिक संरचनाओं में निहित विविधता को स्पष्ट रूप से मान्यता देता है।
· यह निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र की ताकतों और संरचनात्मक कमजोरियों की पहचान कर साक्ष्य-आधारित तथा लक्ष्य-उन्मुख नीति निर्माण में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करता है।
· जिला-स्तरीय प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित कर राष्ट्रीय निर्यात लक्ष्यों को स्थानीय स्तर पर प्रभावी रूप से क्रियान्वित करने योग्य बनाता है।
· रोजगार सृजन, क्षेत्रीय असंतुलनों में कमी तथा बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ गहन एकीकरण को बढ़ावा देता है।
· उत्पाद गुणवत्ता, लागत प्रतिस्पर्धात्मकता तथा मजबूत संस्थागत ढाँचों को वैश्विक व्यापार में दीर्घकालिक सफलता के निर्णायक कारक के रूप में रेखांकित करता है।
नीतिगत प्रभाव:
• निर्यात अवसंरचना को सुदृढ़ करना तथा लॉजिस्टिक्स लागत में कमी लाना प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए अनिवार्य है।
• संस्थागत क्षमता, वित्त तक पहुँच और मानव संसाधन विकास को सशक्त बनाना निर्यात तैयारी को तीव्र गति प्रदान कर सकता है।
• जिला-केंद्रित रणनीतियाँ समावेशी विकास को प्रोत्साहित करती हैं और क्षेत्रीय असंतुलनों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
• यह सूचकांक भारत के निर्यात विविधीकरण, वैश्विक व्यापार के साथ एकीकरण तथा 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर के वस्तु निर्यात लक्ष्य को सुदृढ़ करता है।
निष्कर्ष:
निर्यात तैयारी सूचकांक 2024 यह स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है कि राज्य और जिला स्तर पर सुदृढ़ तैयारी भारत की निर्यात-आधारित विकास रणनीति की मूल आधारशिला है। संरचनात्मक कमजोरियों और नीतिगत अवसरों की पहचान के माध्यम से यह सूचकांक भारत की वैश्विक व्यापार प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने, रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने तथा विकसित भारत @2047 की दीर्घकालिक परिकल्पना को साकार करने में एक महत्वपूर्ण नीतिगत उपकरण के रूप में उभरता है।
