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Blog / 31 Jul 2026

पर्यावरणीय प्रदर्शन सूचकांक (EPI) 2026

संदर्भ:

हाल ही में पर्यावरणीय प्रदर्शन सूचकांक (Environmental Performance Index–EPI) 2026 जारी किया गया, जिसमें 177 देशों में भारत की 176वीं रैंकिंग है।

पर्यावरणीय प्रदर्शन सूचकांक (EPI) क्या है?

      • पर्यावरणीय प्रदर्शन सूचकांक (EPI) एक द्विवार्षिक (हर दो वर्ष में प्रकाशित होने वाला), डेटा-आधारित मूल्यांकन है, जिसे येल सेंटर फॉर एनवायरनमेंटल लॉ एंड पॉलिसी (YCELP), सेंटर फॉर इंटरनेशनल अर्थ साइंस इंफॉर्मेशन नेटवर्क (CIESIN), कोलंबिया विश्वविद्यालय तथा येल सेंटर फॉर जियोस्पेशियल सॉल्यूशंस द्वारा मैककॉल मैकबेन फाउंडेशन के सहयोग से विकसित किया गया है।
      • यह देशों के पर्यावरणीय प्रदर्शन की तुलना करने के लिए एक वैज्ञानिक रूपरेखा प्रदान करता है तथा नीति-निर्माताओं को उनकी शक्तियों, कमजोरियों और नीति-हस्तक्षेप की आवश्यकता वाले क्षेत्रों की पहचान करने में सहायता करता है।

India Ranks 176th out of 177 Countries in 2026 Environment Performance Index  - Political Science Solution

पर्यावरणीय प्रदर्शन सूचकांक (EPI) 2026 की प्रमुख विशेषताएँ:

      • वर्ष 2026 के संस्करण में 177 देशों का मूल्यांकन 47 संकेतकों के आधार पर किया गया है, जिन्हें 12 विषयगत श्रेणियों में विभाजित किया गया है। ये तीन व्यापक नीतिगत उद्देश्यों के अंतर्गत आते हैं-
        • पर्यावरणीय स्वास्थ्य (Environmental Health)
        • पारिस्थितिकी तंत्र की सुदृढ़ता (Ecosystem Vitality)
        • जलवायु परिवर्तन शमन (Climate Change Mitigation)
      • इन संकेतकों के माध्यम से वायु गुणवत्ता, जल संसाधन, स्वच्छता, जैव विविधता संरक्षण, सतत वानिकी, मत्स्य पालन, कृषि, अपशिष्ट प्रबंधन तथा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों का आकलन किया जाता है। EPI वैश्विक पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं की दिशा में प्रगति की निगरानी के लिए एक वस्तुनिष्ठ स्कोरकार्ड के रूप में कार्य करता है।

प्रमुख निष्कर्ष:

      • EPI 2026 आर्थिक समृद्धि और पर्यावरणीय प्रदर्शन के बीच एक मजबूत संबंध को दर्शाता है, जिसमें राष्ट्रीय आय और EPI स्कोर के बीच 0.69 का सहसंबंध गुणांक पाया गया है। हालांकि, प्रभावी शासन व्यवस्था कई मध्यम-आय वाले देशों को अधिक समृद्ध देशों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करने में सक्षम बनाती है।
      • शीर्ष पाँच देश हैं:
        • एस्टोनिया
        • लक्ज़मबर्ग
        • यूनाइटेड किंगडम
        • फ़िनलैंड
        • नीदरलैंड
      • लाओस 21.78 अंकों के साथ अंतिम स्थान पर रहा।

भारत का प्रदर्शन:

भारत ने 22.46 के कुल स्कोर के साथ 176वाँ स्थान प्राप्त किया, जो 31.81 के क्षेत्रीय औसत से काफी कम है। रिपोर्ट में प्रमुख जैव विविधता क्षेत्रों में वृक्ष आवरण की कमी जैसी चिंताओं को रेखांकित किया गया है, जो वनों और पारिस्थितिकी तंत्र पर बढ़ते दबाव को दर्शाती हैं। यद्यपि भारत की रैंकिंग 2022 में 180 देशों में 180वें स्थान से सुधरकर 2026 में 176वें स्थान पर पहुँची है, फिर भी उसका पर्यावरणीय प्रदर्शन वैश्विक स्तर पर सबसे कमजोर देशों में बना हुआ है।

निष्कर्ष:

पर्यावरणीय प्रदर्शन सूचकांक 2026 सतत विकास की प्राप्ति में साक्ष्य-आधारित पर्यावरणीय शासन के बढ़ते महत्व को रेखांकित करता है। यद्यपि भारत की निम्न रैंकिंग ने सूचकांक की कार्यप्रणाली को लेकर बहस को पुनः तेज कर दिया है, फिर भी यह पर्यावरणीय डेटा प्रणालियों को सुदृढ़ करने, पारिस्थितिक संरक्षण में सुधार करने तथा जलवायु संबंधी कार्यवाहियों में तेजी लाने की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।

 

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