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Blog / 03 Sep 2026

निर्वाचक नामावली से नाम हटाना, प्रपत्र-7 और बीएलओ की भूमिका

संदर्भ:

हाल ही में, झारखंड के गोड्डा में कई मतदान केंद्रों पर बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) ने कथित रूप से बताया कि कई कार्यकर्ताओं ने निर्वाचक नामावली से कई नाम हटाने के लिए प्रपत्र-7 (Form 7) के आवेदन प्रस्तुत किए थे। इनमें से कुछ आवेदन कथित रूप से निर्धारित प्रारूप के अनुरूप नहीं थे और उन्हें अस्वीकार कर दिया गया।

संवैधानिक आधार:

      • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 324 भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति प्रदान करता है। यह प्रावधान संविधान के भाग XV (अनुच्छेद 324–329) के अंतर्गत आता है।
      • भारत निर्वाचन आयोग संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव कराता है। हालांकि, पंचायत एवं नगरपालिका चुनाव क्रमशः अनुच्छेद 243K और 243ZA के अंतर्गत राज्य निर्वाचन आयोगों द्वारा कराए जाते हैं।

भारत निर्वाचन आयोग का संवैधानिक दायित्व:

      • भारत निर्वाचन आयोग निर्वाचक नामावलियों की तैयारी एवं पुनरीक्षण की निगरानी करता है तथा स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए चुनावों का संचालन करता है।
      • यह चुनावी तंत्र पर नियंत्रण भी रखता है और निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता तथा निष्पक्षता बनाए रखने का प्रयास करता है।

निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO):

      • निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) वैधानिक प्राधिकारी होते हैं, जो विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की निर्वाचक नामावलियों को तैयार करने, उनका पुनरीक्षण करने तथा उन्हें अंतिम रूप देने के लिए उत्तरदायी होते हैं।
      • वे दावों एवं आपत्तियों पर कार्रवाई करते हैं, बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) की निगरानी करते हैं तथा निर्वाचक नामावली में नाम जोड़ने, सुधार करने और हटाने से संबंधित निर्णय लेते हैं।

बूथ लेवल अधिकारी (BLO):

      • BLO चुनावी तंत्र के जमीनी स्तर के प्रतिनिधि होते हैं। वे ERO की सहायता करते हुए क्षेत्रीय सत्यापन करते हैं तथा मृत, स्थानांतरित या दोहरे रूप से दर्ज मतदाताओं की पहचान करते हैं।
      • वे विभिन्न प्रपत्रों की प्रक्रिया में सहायता करते हैं और नागरिकों को निर्वाचक नामावली से संबंधित सेवाएँ उपलब्ध कराने में सहयोग करते हैं।
      • महत्वपूर्ण अंतर: BLO का मुख्य कार्य सत्यापन और सुविधा प्रदान करना है, जबकि दावों एवं आपत्तियों पर निर्णय लेने का सक्षम प्राधिकारी ERO होता है।

प्रपत्र-7 (Form 7) क्या है?

      • प्रपत्र-7 का उपयोग किसी व्यक्ति के नाम को निर्वाचक नामावली में शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज करने अथवा स्वयं का नाम हटाने का अनुरोध करने के लिए किया जाता है।
      • इसके अंतर्गत स्वीकार्य आधारों में शामिल हैं:
        • मृत्यु
        • निर्धारित आयु से कम होना
        • स्थायी रूप से स्थानांतरित होना/अनुपस्थित होना
        • पहले से निर्वाचक नामावली में दर्ज होना
        • भारतीय नागरिक न होना
      • यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि प्रपत्र-7 स्वयं नाम हटाने का आदेश नहीं है। यह निर्धारित कानूनी प्रक्रिया को आरंभ करने का माध्यम मात्र है।

नाम हटाने के लिए कानूनी प्रावधान:

      • लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 22 के अंतर्गत निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी निर्धारित आधारों पर निर्वाचक नामावली में प्रविष्टियों को सुधार, एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित अथवा हटाने की कार्रवाई कर सकता है।
      • इस प्रक्रिया में उचित जाँच-पड़ताल तथा संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना आवश्यक है।
      • धारा 31 निर्वाचक पंजीकरण से संबंधित कुछ झूठे कथनों या घोषणाओं के लिए दंडात्मक प्रावधान करती है।

नाम हटाने की प्रक्रिया में कमियाँ:

      • प्रमुख चिंताओं में बड़ी संख्या में प्रपत्र-7 आवेदन प्रस्तुत किया जाना, अपर्याप्त क्षेत्रीय सत्यापन, मतदाताओं तक नोटिस न पहुँच पाना, सूचना की असमानता तथा गलत तरीके से नाम हटाए जाने की संभावना शामिल हैं।
      • डिजिटल माध्यम से आवेदन की सुविधा प्रक्रिया की दक्षता बढ़ा सकती है, लेकिन यह जमीनी स्तर पर होने वाले सत्यापन का स्थान नहीं ले सकती।

आगे की राह:

निर्वाचक नामावली के प्रबंधन में स्वच्छ एवं अद्यतन मतदाता सूची सुनिश्चित करने तथा मतदाताओं को मताधिकार से वंचित होने से बचाने के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। मजबूत लेखा-परीक्षण व्यवस्था, समय पर नोटिस, पारदर्शी सत्यापन, सुलभ शिकायत निवारण तंत्र तथा झूठी आपत्तियाँ दर्ज करने वालों के प्रति जवाबदेही चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और अखंडता को मजबूत कर सकती है।

 

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