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Blog / 09 Feb 2026

आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26: वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत की आर्थिक मजबूती

सन्दर्भ:

केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने 29 जनवरी 2026 को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 प्रस्तुत किया। यह सर्वेक्षण भारत की व्यापक आर्थिक स्थिति, क्षेत्रवार प्रवृत्तियों तथा मध्यम अवधि की नीति प्राथमिकताओं का विस्तृत आकलन प्रस्तुत करता है। ऐसे समय में जब वैश्विक अनिश्चितता बढ़ी हुई है, सर्वेक्षण भारत को एक स्थिर, तीव्र गति से बढ़ती और लचीली अर्थव्यवस्था के रूप में रेखांकित करता है।

वैश्विक अनिश्चितता के बीच विकास:

      • वैश्विक आर्थिक परिवेश अभी भी नाजुक बना हुआ है, जिसमें भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार विखंडन तथा वित्तीय कमजोरियाँ प्रमुख हैं। यद्यपि वैश्विक विकास अपेक्षा से बेहतर रहा है, फिर भी जोखिम ऊँचे बने हुए हैं और उनका पूर्ण प्रभाव विलंब से सामने आ सकता है।
      • इस पृष्ठभूमि में भारत का आर्थिक प्रदर्शन अत्यंत सशक्त रहा है। प्रथम अग्रिम अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025–26 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि सकल मूल्य वर्धन (GVA) की वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत आंकी गई है। इसके साथ ही भारत लगातार चौथे वर्ष विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
      • विकास व्यापक और मांग-आधारित रहा है। निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE) वित्तीय वर्ष 2026 में 7.0 प्रतिशत बढ़कर जीडीपी का 61.5 प्रतिशत हो गया, जो 2012 के बाद सबसे अधिक है। कम मुद्रास्फीति, स्थिर रोजगार, वास्तविक आय में वृद्धि और सुदृढ़ कृषि प्रदर्शन से ग्रामीण मांग को बल मिला, जबकि कर युक्तिकरण और श्रम बाजार की बेहतर स्थिति ने शहरी उपभोग को समर्थन दिया।
      • निवेश गतिविधियों में भी तेजी आई। सकल स्थिर पूंजी निर्माण (GFCF) 7.8 प्रतिशत बढ़ा और जीडीपी के 30 प्रतिशत के स्वस्थ स्तर पर बना रहा। इसे निरंतर सार्वजनिक पूंजीगत व्यय तथा निजी निवेश में पुनरुद्धार से समर्थन मिला, जो बढ़ती कॉरपोरेट घोषणाओं में परिलक्षित हुआ।
      • आपूर्ति पक्ष पर, सेवा क्षेत्र विकास का प्रमुख इंजन बना रहा। वित्तीय वर्ष 25-26 की पहली छमाही में सेवा क्षेत्र की सकल मूल्य वर्धन (GVA) वृद्धि 9.3 प्रतिशत रही और पूरे वर्ष के लिए इसके 9.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह आधुनिक, व्यापार योग्य और डिजिटल सेवाओं पर भारत की बढ़ती निर्भरता को दर्शाता है।

राजकोषीय समेकन और मौद्रिक स्थिरता:

      • आर्थिक सर्वेक्षण भारत की व्यापक आर्थिक स्थिरता के आधार स्तंभ के रूप में विश्वसनीय राजकोषीय समेकन को रेखांकित करता है। विवेकपूर्ण राजकोषीय प्रबंधन से नीति की विश्वसनीयता बढ़ी है और निवेशकों का विश्वास सुदृढ़ हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप 2025 में मॉर्निंगस्टार DBRS, S&P ग्लोबल रेटिंग्स और R&I द्वारा भारत की रेटिंग को बढ़ाया गया।
      • केंद्र सरकार की राजस्व प्राप्तियों में संरचनात्मक सुधार हुआ है। वित्त वर्ष 2016–20 के दौरान जीडीपी के औसतन 8.5 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में यह 9.2 प्रतिशत हो गई। यह मुख्यतः गैर-कॉरपोरेट कर संग्रह में वृद्धि के कारण हुआ, जो बेहतर अनुपालन और आय वृद्धि को दर्शाता है। आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या वित्त वर्ष 2022 में 6.9 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 9.2 करोड़ हो गई, जिसे प्रौद्योगिकी-सक्षम कर प्रशासन से सहायता मिली।
      • जीएसटी संग्रह मजबूत बना रहा। अप्रैलदिसंबर 2025 के दौरान सकल जीएसटी संग्रह ₹17.4 लाख करोड़ रहा, जो वर्ष-दर-वर्ष 6.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। ई-वे बिल जैसे उच्च आवृत्ति संकेतक भी सशक्त आर्थिक गतिविधि की ओर संकेत करते हैं।
      • सार्वजनिक निवेश विकास का प्रमुख चालक बना रहा। केंद्र का प्रभावी पूंजीगत व्यय वित्तीय वर्ष 25 में जीडीपी के लगभग 4 प्रतिशत तक पहुँच गया, जो महामारी-पूर्व अवधि में 2.7 प्रतिशत था। राज्यों को पूंजीगत व्यय बनाए रखने के लिए राज्यों को पूंजीगत व्यय हेतु विशेष सहायतायोजना के माध्यम से प्रोत्साहित किया गया।
      • ऋण स्थिरता के मोर्चे पर भी प्रगति हुई। 2020 के बाद से सामान्य सरकारी ऋण-से-जीडीपी अनुपात में लगभग 7.1 प्रतिशत अंकों की गिरावट आई, जबकि सार्वजनिक निवेश ऊँचा बना रहा, जो विकास समर्थन और राजकोषीय विवेक के संतुलन को दर्शाता है।
      • मौद्रिक और वित्तीय क्षेत्र में भारत का नियामक ढाँचा और सुदृढ़ हुआ। सितंबर 2025 में सकल एनपीए 2.2 प्रतिशत और शुद्ध एनपीए 0.5 प्रतिशत पर आ गए, जो कई दशकों के न्यूनतम स्तर हैं। दिसंबर 2025 तक ऋण वृद्धि 14.5 प्रतिशत (वर्ष-दर-वर्ष) रही।  अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोषविश्व बैंक के वित्तीय क्षेत्र आकलन कार्यक्रम (FSAP) ने भारत की सुदृढ़ और पर्याप्त पूंजीयुक्त वित्तीय प्रणाली की पुष्टि की।

बाह्य क्षेत्र और मुद्रास्फीति: वैश्विक एकीकरण के साथ स्थिरता

      • सर्वेक्षण वैश्विक मंदी के बावजूद वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत के स्थिर एकीकरण को रेखांकित करता है। 2005 से 2024 के बीच वैश्विक वस्तु निर्यात में भारत की हिस्सेदारी लगभग दोगुनी हुई, जबकि वैश्विक सेवा निर्यात में इसकी हिस्सेदारी दोगुने से अधिक बढ़ी।
      • वित्तीय वर्ष 25 में भारत का कुल निर्यात रिकॉर्ड USD 825.3 अरब तक पहुँचा, जिसका मुख्य कारण सेवा निर्यात रहा। सेवा निर्यात USD 387.6 अरब रहा और 13.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे आईटी और व्यापार सेवाओं में भारत की वैश्विक स्थिति सुदृढ़ हुई। गैर-पेट्रोलियम निर्यात भी ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुँचा।
      • चालू खाता घाटा Q2 वित्तीय वर्ष 26 में जीडीपी के लगभग 1.3 प्रतिशत पर नियंत्रित रहा। इसे मजबूत सेवा निर्यात और रिकॉर्ड USD 135.4 अरब के प्रेषण (रेमिटेंस) से समर्थन मिला, जिससे भारत विश्व का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता बना। जनवरी 2026 तक विदेशी मुद्रा भंडार USD 701.4 अरब तक पहुँच गया, जो लगभग 11 महीनों के आयात कवर के बराबर है।
      • वैश्विक निवेश वातावरण के कमजोर रहने के बावजूद, अप्रैलनवंबर 2025 के दौरान भारत ने USD 64.7 अरब का सकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आकर्षित किया और 2024 में ग्रीनफील्ड निवेश घोषणाओं में विश्व में चौथा स्थान प्राप्त किया।
      • मुद्रास्फीति, भारत की एक प्रमुख व्यापक आर्थिक उपलब्धि के रूप में उभरी। अप्रैलदिसंबर 2025 के दौरान औसत शीर्षक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति 1.7 प्रतिशत रही, जो CPI श्रृंखला शुरू होने के बाद सबसे कम है। यह मुख्यतः खाद्य और ईंधन कीमतों में गिरावट के कारण संभव हुआ।

क्षेत्रीय परिवर्तन: कृषि, उद्योग, सेवाएँ और अवसंरचना

      • सर्वेक्षण विभिन्न क्षेत्रों में संरचनात्मक परिवर्तन को रेखांकित करता है।
      • कृषि क्षेत्र में, बेहतर मानसून से खाद्यान्न उत्पादन AY 2024–25 में बढ़कर 3,577.3 लाख मीट्रिक टन हो गया। बागवानी उत्पादन 362 मिलियन टन तक पहुँच गया, जो खाद्यान्न उत्पादन से अधिक है। पशुधन और मत्स्य क्षेत्र में दीर्घकालिक रूप से मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), पीएम-किसान हस्तांतरण और पेंशन योजनाओं से किसानों की आय को समर्थन मिला, जबकि ई-नाम जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से बाजार तक पहुँच बेहतर हुई।
      • वैश्विक प्रतिकूलताओं के बावजूद औद्योगिक क्षेत्र मजबूत हुआ। वित्तीय वर्ष 2025-26 में विनिर्माण सकल मूल्य वर्धन (GVA) वृद्धि में उल्लेखनीय तेजी आई। उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं के तहत ₹2 लाख करोड़ से अधिक का निवेश आकर्षित हुआ, बड़े पैमाने पर उत्पादन हुआ और 12 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए। वैश्विक नवाचार सूचकांक 2025 में भारत 38वें स्थान पर पहुँचा। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन ने घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को आगे बढ़ाया।
      • सेवा क्षेत्र का प्रभुत्व बना रहा, जो जीडीपी का 53 प्रतिशत से अधिक और सकल मूल्य वर्धन (GVA) का 56 प्रतिशत योगदान देता है तथा हाल के वर्षों में 80 प्रतिशत से अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आकर्षित करता रहा है।
      • अवसंरचना निवेश भारत की विकास रणनीति का केंद्रीय तत्व बना रहा। वित्तीय वर्ष 18 के बाद से सरकारी पूंजीगत व्यय चार गुना से अधिक बढ़ा। राजमार्ग, रेलवे, हवाई अड्डे, विद्युत क्षमता, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल कनेक्टिविटी, जल आपूर्ति और अंतरिक्ष अवसंरचना में उल्लेखनीय विस्तार हुआ।

सामाजिक विकास और रोजगार:

      • सर्वेक्षण मानव विकास और समावेशन में प्रगति को रेखांकित करता है। भारत विश्व की सबसे बड़ी स्कूली शिक्षा प्रणालियों में से एक संचालित करता है। उच्च शिक्षा का तीव्र विस्तार हुआ है, जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति, लचीले क्रेडिट ढाँचे और अंतरराष्ट्रीयकरण से समर्थन मिला।
      • स्वास्थ्य परिणामों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। मातृ, शिशु और बाल मृत्यु दर में तीव्र गिरावट आई है, जो वैश्विक औसत से कहीं बेहतर है। रोजगार संकेतक सकारात्मक रहे। Q2 वित्तीय वर्ष 2025-26 में 56 करोड़ से अधिक लोग कार्यरत थे। श्रम सुधारों से गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा का दायरा मिला। ई-श्रम पोर्टल ने असंगठित श्रमिकों, विशेषकर महिलाओं की कवरेज को सुदृढ़ किया। ग्रामीण विकास पहलों, गरीबी में कमी और सामाजिक सेवाओं पर बढ़ते व्यय ने समावेशी विकास को मजबूती दी।
      • AI का प्रसार, क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट प्रणालियों के माध्यम से शहरी कनेक्टिविटी, और आयात प्रतिस्थापन से रणनीतिक लचीलापन एवं अनिवार्यता की ओर नीति बदलाव भारत के दूरदर्शी दृष्टिकोण को दर्शाते हैं।

निष्कर्ष:

आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 ऐसी अर्थव्यवस्था की तस्वीर प्रस्तुत करता है जिसने उच्च विकास दर के साथ व्यापक आर्थिक स्थिरता, गहरे संरचनात्मक सुधार और वैश्विक अनिश्चितता के बीच मजबूत लचीलापन हासिल किया है। नियंत्रित मुद्रास्फीति, सशक्त सार्वजनिक निवेश, विस्तारित सेवा क्षेत्र, बेहतर मानव विकास और रणनीतिक वैश्विक दृष्टिकोण के साथ भारत आने वाले वर्षों में समावेशी, लचीले और वैश्विक रूप से एकीकृत विकास को बनाए रखने की मजबूत स्थिति में है।

 

UPSC/PCS मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बावजूद भारत के लचीले विकास मॉडलके प्रमुख आधार क्या हैं? आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 के आलोक में विवेचना कीजिए।