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Blog / 07 Sep 2026

वर्ष 2029 तक नशा-मुक्त भारत रोडमैप

संदर्भ:

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में घोषणा की कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2029 तक भारत को नशा-मुक्त बनाने के लिए तीन वर्षीय रोडमैप तैयार किया है। इस पहल का उद्देश्य मादक पदार्थों के नेटवर्क को नष्ट करना, उनके वित्तीय स्रोतों को बाधित करना, कृत्रिम मादक पदार्थों पर नियंत्रण करना तथा रोकथाम, उपचार और पुनर्वास को मजबूत करना है।

पृष्ठभूमि:

      • मादक पदार्थों का दुरुपयोग केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंता नहीं है, बल्कि यह आंतरिक सुरक्षा, संगठित अपराध और सामाजिक स्थिरता का भी मुद्दा है।
      • प्रमुख मादक पदार्थ उत्पादक क्षेत्रों गोल्डन क्रिसेंट और गोल्डन ट्रायंगल के बीच भारत की स्थिति होने के कारण यह अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क के प्रति संवेदनशील है। देश की बड़ी युवा आबादी मादक पदार्थों के दुरुपयोग से निपटने के महत्व को और बढ़ा देती है।

कानूनी और संस्थागत ढाँचा:

      • भारत में मादक पदार्थों को नियंत्रित करने वाला प्रमुख कानून स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 (NDPS Act) है। यह निर्दिष्ट मादक पदार्थों और मन:प्रभावी पदार्थों के उत्पादन, कब्जे, बिक्री, परिवहन और तस्करी को नियंत्रित तथा प्रतिबंधित करता है और गंभीर अपराधों के लिए कठोर दंड का प्रावधान करता है।
      • स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थों के अवैध व्यापार की रोकथाम अधिनियम, 1988 अवैध मादक पदार्थों की तस्करी में शामिल व्यक्तियों की निवारक हिरासत की अनुमति देता है।
      • संस्थागत स्तर पर स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (NCB) प्रवर्तन संबंधी प्रयासों का समन्वय करता है, जबकि राज्य पुलिस, सीमा शुल्क विभाग, BSF और अन्य एजेंसियाँ आपूर्ति में कमी लाने में योगदान देती हैं।

चार-स्तंभ आधारित दृष्टिकोण:

सरकार का रोडमैप चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित है:

      • खुफिया सूचना और अभियान आधारित प्रवर्तन: ध्यान छोटे स्तर के अपराधियों को गिरफ्तार करने से हटकर खुफिया सूचना आधारित अभियानों और समन्वित प्रवर्तन के माध्यम से पूरे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ नेटवर्क को नष्ट करने की ओर स्थानांतरित किया जा रहा है।
      • कृत्रिम मादक पदार्थों पर नियंत्रण: कृत्रिम मादक पदार्थ और गुप्त प्रयोगशालाएँ एक उभरती हुई चुनौती हैं। सरकार का उद्देश्य निगरानी में सुधार करना, अवैध प्रयोगशालाओं को नष्ट करना तथा मादक पदार्थ उत्पादन नेटवर्क और पूर्वगामी रसायनों की निगरानी को मजबूत करना है।
      • मांग और हानि में कमी: रणनीति में प्रवर्तन के साथ जागरूकता, परामर्श, उपचार और पुनर्वास को शामिल किया गया है। मादक पदार्थों की लत से प्रभावित व्यक्तियों को सहायता प्रदान करने के लिए मानस हेल्पलाइन (1933) भी शुरू की गई है।
      • क्षमता निर्माण और समन्वय: एनकॉर्ड (NCORD) तंत्र, जिसकी स्थापना 2019 में की गई थी, राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर एजेंसियों के बीच समन्वय को बढ़ावा देता है। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मादक पदार्थ विरोधी कार्यबल भी स्थापित किए गए हैं, जबकि NCB को मजबूत किया गया है।

प्रमुख लक्ष्य:

मार्च 2029 तक सरकार का लक्ष्य है:

      • 100 राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ नेटवर्क को नष्ट करना।
      • मादक पदार्थों से संबंधित गतिविधियों में शामिल 100 भगोड़ों को वापस लाना।
      • मार्च 2027 तक मादक पदार्थों की आपूर्ति शृंखला की शुरुआत से अंत तक दृश्यता प्राप्त करना।
      • 2026 में कम-से-कम 75 गुप्त प्रयोगशालाओं को नष्ट करना।

चुनौतियाँ:

इन उपायों के बावजूद, भारत के सामने छिद्रपूर्ण सीमाएँ, कृत्रिम मादक पदार्थ, डिजिटल तस्करी, संगठित अपराध, अपर्याप्त पुनर्वास अवसंरचना और नशे की लत से जुड़ा सामाजिक कलंक जैसी चुनौतियाँ हैं।

आगे की राह:

भारत को संपूर्ण सरकार और पूरे समाज के दृष्टिकोण की आवश्यकता है। इसके लिए मजबूत सीमा निगरानी, वित्तीय जाँच, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, पूर्वगामी रसायनों की निगरानी और प्रौद्योगिकी आधारित खुफिया जानकारी को मजबूत करना आवश्यक है। साथ ही, सस्ती उपचार सुविधाओं, प्रशिक्षित परामर्शदाताओं, विद्यालय स्तर पर जागरूकता और समुदाय आधारित पुनर्वास का विस्तार किया जाना चाहिए।

निष्कर्ष:

नशा-मुक्त भारत 2029 का रोडमैप खंडित प्रवर्तन से हटकर आपूर्ति, मांग, वित्तपोषण और पुनर्वास को लक्षित करने वाली एकीकृत रणनीति की ओर बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है। मादक पदार्थों से प्रभावी ढंग से निपटना भारत के युवाओं की सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने और विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।

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