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Blog / 02 Mar 2026

डीआरडीओ द्वारा बहुत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली का सफल परीक्षण

संदर्भ:

हाल ही में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने बहुत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली (VSHORADS) के लगातार तीन उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न किए हैं। यह पूरी तरह स्वदेशी रूप से विकसित वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली है। इन परीक्षणों की सफलता से भारत की नज़दीकी हवाई खतरों से निपटने की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ये परीक्षण ओडिशा तट के पास चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) से किए गए। 

VSHORADS के बारे में:

      • स्वदेशी विकास: VSHORADS एक कंधे पर रखकर दागी जाने वाली (मैन-पोर्टेबल) वायु रक्षा प्रणाली है। इसे डीआरडीओ के रिसर्च सेंटर इमारत (आरसीआई) ने अन्य डीआरडीओ प्रयोगशालाओं तथा भारतीय उद्योग सहयोगियों के साथ मिलकर देश में ही डिजाइन और विकसित किया है। यह भारत की स्वदेशी रक्षा अनुसंधान क्षमता का प्रमुख उदाहरण है।
      • तीनों सेनाओं के लिए उपयोगी: इस प्रणाली को भारतीय सशस्त्र बलों की तीनों शाखाओं थलसेना, नौसेना और वायुसेनाकी परिचालन आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इससे भारत की बहु-स्तरीय (मल्टी-लेयर्ड) वायु रक्षा संरचना को मजबूती मिलती है।

भारत की रक्षा संरचना में रणनीतिक महत्व:

भारत की वायु रक्षा रणनीति विभिन्न दूरी और ऊँचाई पर आने वाले खतरों से निपटने के लिए बहु-स्तरीय ढांचे में विकसित की गई है:

फेज़

प्रणाली के उदाहरण

भूमिका

लंबी दूरी

S-400 ट्रायम्फ (आयातित), भविष्य के DRDO सिस्टम

दूरस्थ और उच्च-ऊंचाई वाले खतरों का मुकाबला

मध्यम-श्रेणी

आकाश सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइल

रणनीतिक क्षेत्रों और संरचनाओं की सुरक्षा

कम दूरी

त्वरित प्रतिक्रिया सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (QRSAM)

गतिशील बलों की रक्षा

बहुत कम दूरी

VSHORADS

अग्रिम मोर्चे की इकाइयों को निकटवर्ती खतरों से सुरक्षा

VSHORADS इस बहु-स्तरीय रक्षा ढांचे में एक महत्वपूर्ण कमी को दूर करता है। यह विशेष रूप से कम ऊँचाई पर उड़ने वाले लक्ष्यों, ड्रोन, हेलीकॉप्टर तथा दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में आने वाले अचानक खतरों से प्रभावी सुरक्षा प्रदान करता है।

रणनीतिक महत्व:

      • युद्धक्षेत्र में जीवटता (Survivability) में वृद्धि: यह प्रणाली सैनिकों और महत्वपूर्ण सैन्य संसाधनों को तेज़, कम ऊँचाई पर उड़ने वाले हवाई खतरों से तत्काल सुरक्षा देती है। आधुनिक युद्ध में ड्रोन, लोइटरिंग म्यूनिशन और हेलीकॉप्टरों के बढ़ते उपयोग को देखते हुए यह क्षमता अत्यंत आवश्यक हो गई है।
      • आत्मनिर्भर भारत को मजबूती: VSHORADS भारत के स्वदेशी रक्षा तकनीक विकास के संकल्प को दर्शाता है। पहले भारत कंधे से दागी जाने वाली विदेशी प्रणालियों, विशेषकर रूसी मूल की प्रणालियों, पर निर्भर था; अब स्वदेशी विकल्प उपलब्ध होने से आयात पर निर्भरता कम होगी।
      • संयुक्त संचालन क्षमता में वृद्धि: यह प्रणाली थलसेना, नौसेना और वायुसेना, तीनों के लिए उपयुक्त है। अन्य भारतीय वायु रक्षा प्रणालियों के साथ समन्वय स्थापित कर यह संयुक्त सैन्य तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमता को सुदृढ़ बनाती है।

निष्कर्ष:

VSHORADS के सफल उड़ान परीक्षण भारत की वायु रक्षा क्षमता में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह बदलते और जटिल होते हवाई खतरों के विरुद्ध देश की बहु-स्तरीय रक्षा संरचना को और अधिक प्रभावी बनाता है। वास्तविक परिचालन परिस्थितियों में अंतिम तैनाती विन्यास के साथ सफल परीक्षण यह दर्शाते हैं कि डीआरडीओ अत्याधुनिक एवं स्वदेशी रक्षा तकनीक विकसित करने में सक्षम है, जो भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक आत्मनिर्भरता को दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करेगी।