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Blog / 20 Jan 2026

एक नई समुद्री क्रस्टेशियन प्रजाति की खोज

संदर्भ:

कोचीन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (CUSAT) के शोधकर्ताओं ने लक्षद्वीप के कवरत्ती लैगून (दक्षिण-पूर्वी अरब सागर) से समुद्री क्रस्टेशियन (Marine Crustacean) की एक नई वंश (Genus)  और नई प्रजाति की खोज की है। यह अत्यंत सूक्ष्म आकार का जीव हार्पैक्टिकोइड कोपेपॉड (Harpacticoid Copepod) समूह से संबंधित है। इस नई प्रजाति का वैज्ञानिक नाम इंडियाफोंटे बिजोयी (Indiaphonte bijoyi) रखा गया है।

खोज से जुड़े प्रमुख तथ्य:

      • वर्गीकीय पहचान:
        • यह जीव हार्पैक्टिकोइडा (Harpacticoida) ऑर्डर से संबंधित है, जो अत्यंत छोटे क्रस्टेशियन होते हैं और सामान्यतः समुद्री तलछट (marine sediments) में पाए जाते हैं।
        • यह सूक्ष्म आकार का जीव है और मियोफॉना (Meiofauna) का हिस्सा है। मियोफॉना वे बहुत छोटे जीव होते हैं जिनका आकार 1 मिमी से कम होता है और जो समुद्री तल के पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
      • नामकरण और वैज्ञानिक योगदान:
        • जीनस का नाम इंडियाफोंटे (Indiaphonte): यह नाम भारत को समर्पित है और समुद्री वर्गिकी (Marine Taxonomy) के क्षेत्र में भारत के बढ़ते योगदान को दर्शाता है।
        • प्रजाति का नाम बिजोयी (bijoyi): यह नाम प्रोफेसर एस. बिजोय नंदन के सम्मान में रखा गया है, जो एक प्रतिष्ठित समुद्री पारिस्थितिकी विज्ञानी हैं, कन्नूर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति रह चुके हैं।
        • इस प्रजाति का औपचारिक वैज्ञानिक विवरण CUSAT की नीलिमा वासु के. ने मेक्सिको की नेशनल ऑटोनॉमस यूनिवर्सिटी के सैमुएल ई. गोमेज़ नोगुएरा के सहयोग से प्रस्तुत किया।

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वैज्ञानिक महत्व:

      • विशिष्ट संरचना (Unique Morphology):
        • यह नया जीनस लाओफोंटिडी (Laophontidae) परिवार के अन्य ज्ञात सदस्यों से स्पष्ट रूप से अलग है। इसके कुछ प्रमुख पहचान योग्य गुण इस प्रकार हैं:
          • तैरने वाले पैरों (swimming legs) की विशिष्ट खंड संरचना,
          • पूंछ जैसे अंगों (caudal rami) की अलग बनावट
          • एंटीना (antenna) की विशेष संरचना।
      • लैंगिक द्विरूपता का अभाव:
        • अधिकांश हार्पैक्टिकोइड कोपेपॉड्स में नर और मादा के शरीर की बनावट में अंतर पाया जाता है, लेकिन इंडियाफोंटे बिजोयी में यह अंतर नहीं है। नर और मादा बाहरी रूप से लगभग समान दिखते हैं, जो इस समूह में एक दुर्लभ विशेषता मानी जाती है।

समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में भूमिका:

      • आकार में अत्यंत छोटे होने के बावजूद, हार्पैक्टिकोइड कोपेपॉड्स समुद्री पर्यावरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये:
        • समुद्री तलछट में पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण करते हैं,
        • सूक्ष्म शैवाल (microalgae) पर भोजन करते हैं,
        • जलीय खाद्य शृंखला (aquatic food web) की एक आधारभूत कड़ी होते हैं।

भारत की समुद्री विज्ञान के लिए यह खोज क्यों महत्वपूर्ण है?

      • कम अध्ययन वाली समुद्री जैव विविधता: दक्षिण-पूर्वी अरब सागर और लक्षद्वीप के लैगून जैव विविधता से अत्यंत समृद्ध हैं, लेकिन सूक्ष्म जीवों और मियोफॉना के स्तर पर इन क्षेत्रों का वैज्ञानिक अध्ययन अब तक बहुत सीमित रहा है। यह खोज इन समुद्री क्षेत्रों में गहन और व्यवस्थित अनुसंधान की आवश्यकता को स्पष्ट रूप से सामने लाती है।
      • वैश्विक वर्गिकी में योगदान: यह खोज केवल एक नई प्रजाति तक सीमित नहीं है, बल्कि एक पूरे नए जीनस की पहचान को दर्शाती है। इससे समुद्री वर्गिकी के क्षेत्र में भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भूमिका और वैज्ञानिक क्षमता उजागर होती है। जीवन की जैव विविधता को समझने के लिए वर्गिकी एक मूल आधार है, और इस क्षेत्र में भारत का योगदान लगातार सशक्त हो रहा है।
      • संरक्षण से जुड़े निहितार्थ: ऐसे सूक्ष्म समुद्री जीवों का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए अत्यंत आवश्यक है:
        • समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिति और स्वास्थ्य का आकलन,
        • जलवायु परिवर्तन के समुद्री पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों का अध्ययन, तथा
        • संवेदनशील प्रवाल भित्ति और लैगून पारिस्थितिक तंत्र में सतत एवं संतुलित संसाधन प्रबंधन।

निष्कर्ष:

इंडियाफोंटे बिजोयी की खोज केवल एक वर्गीकीय उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह वैश्विक समुद्री जैव विविधता के ज्ञान में भारतीय वैज्ञानिकों का एक महत्वपूर्ण योगदान है। सूक्ष्म स्तर पर किए गए सावधानीपूर्ण क्षेत्रीय अनुसंधान और कठोर वैज्ञानिक वर्गीकरण के माध्यम से CUSAT के वैज्ञानिकों ने भारतीय महासागर में मियोफॉना की विविधता की समझ को और अधिक गहराई प्रदान की है। यह उपलब्धि पारिस्थितिकी, संरक्षण विज्ञान और जैव विविधता अध्ययन के लिए दूरगामी महत्व रखती है।