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Blog / 19 Feb 2026

डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023: RTI संशोधन और संवैधानिक चिंताएं

संदर्भ:

हाल ही में, नेशनल कैंपेन फॉर पीपुल्स राइट टू इंफॉर्मेशन (NCPRI), पारदर्शिता कार्यकर्ता वेंकटेश नायक और 'रिपोर्टर्स कलेक्टिव ट्रस्ट' द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में तीन अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं। इन याचिकाओं में डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम की संवैधानिकता को चुनौती दी गई है। याचिकाओं का तर्क है कि DPDP अधिनियम सूचना के अधिकार (RTI) को कमजोर करता है, खोजी पत्रकारिता में बाधा डालता है और राज्य की निगरानी शक्तियों का विस्तार करता है।

प्रमुख आपत्तियां:

      • RTI अधिनियम में संशोधन: एक मुख्य आपत्ति DPDP अधिनियम की धारा 44(3) के तहत सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 में किए गए संशोधन को लेकर है। यह संशोधन RTI अधिनियम के जनहित सर्वोपरि के प्रावधान को व्यक्तिगत जानकारी के लिए पूर्ण छूट (Blanket Exemption) से प्रतिस्थापित कर देता है। पूर्व में, लोक सूचना अधिकारी व्यक्तिगत जानकारी तब साझा कर सकते थे जब उससे कोई व्यापक जनहित सिद्ध होता हो। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि नया प्रावधान सूचना और निजता के इस संतुलन को समाप्त कर देता है, जिससे अधिकारियों को महत्वपूर्ण जानकारी रोकने (Withhold) की शक्ति मिल जाती है, जो अंततः प्रशासनिक पारदर्शिता को प्रभावित कर सकती है।
      • पुट्टास्वामी निर्णय का उल्लंघन: इन याचिकाओं में सर्वोच्च न्यायालय के पुट्टास्वामी निर्णय (2017) का संदर्भ दिया गया है, जिसके अनुसार मौलिक अधिकारों पर लगाया गया कोई भी प्रतिबंध 'आनुपातिकता परीक्षण' (Proportionality Test) की कसौटी पर खरा उतरना अनिवार्य है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि DPDP अधिनियम इस परीक्षण में विफल रहता है, क्योंकि यह अधिकारों को सीमित करने के लिए 'न्यूनतम प्रतिबंधात्मक' (Least Restrictive) विकल्पों को नहीं अपनाता है। इसके अतिरिक्त, यह मनमाने ढंग से RTI ढांचे को संकुचित करता है, जिससे सहभागी लोकतंत्र (Participatory Democracy) के समक्ष गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है।
      • खोजी पत्रकारिता पर प्रभाव:यह अधिनियम व्यक्तिगत डेटा का उपयोग करने वाले पत्रकारों को 'डेटा फिडुशियरी' (Data Fiduciaries) के रूप में वर्गीकृत करता है। इसके तहत पत्रकारों पर सहमति लेने और सहमति न मिलने पर डेटा मिटाने की बाध्यता थोपी गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि:
        • ये प्रावधान खोजी रिपोर्टिंग के लिए व्यावहारिक नहीं हैं।
        • इससे तथ्यों के बाद के सत्यापन (Post-facto verification) में कठिनाई होगी। 
        • ​250 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने के कारण पत्रकारों में डर का माहौल पैदा होगा, जिससे भ्रष्टाचार और सरकारी जवाबदेही पर रिपोर्टिंग हतोत्साहित हो सकती है। 

राज्य की शक्ति और निगरानी का विस्तार:

धारा 36 केंद्र सरकार को यह शक्ति देती है कि वह किसी भी 'डेटा फिडुशियरी' (डेटा रखने वाली संस्था) से जानकारी मांग सके। इसके लिए सरकार को किसी स्वतंत्र संस्था या कानूनी अधिकारी से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह प्रावधान सरकार को व्यक्तिगत डेटा तक अनियंत्रित पहुंच (Unrestricted Access) देता है, जिससे पत्रकारों के गुमनाम स्रोतों (Anonymous Sources) की पहचान उजागर होने का खतरा है। इससे न केवल निजता का हनन होता है, बल्कि चुनावी प्रक्रियाओं में डेटा के दुरुपयोग की भी गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं।

डेटा संरक्षण बोर्ड की स्वतंत्रता:

अधिनियम कानून लागू करने और दंड देने के लिए एक डेटा संरक्षण बोर्ड (DPB) की स्थापना करता है। याचिकाकर्ताओं ने रेखांकित किया है कि इसकी नियुक्ति प्रक्रिया में सरकारी सचिवों और नामित व्यक्तियों का दबदबा है, जो 'शक्तियों के पृथक्करण' के सिद्धांत को कमजोर कर सकता है। चूंकि राज्य स्वयं सबसे बड़ा डेटा संग्रहकर्ता है, इसलिए इस अर्ध-न्यायिक निकाय पर कार्यकारी नियंत्रण इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाता है।

डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम, 2023 के बारे में:

यह भारत का पहला व्यापक कानून है जिसे डिजिटल व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा और व्यक्तियों की निजता बनाए रखने के लिए बनाया गया है। इसे 11 अगस्त, 2023 को अधिनियमित किया गया और 14 नवंबर, 2025 को 'DPDP नियम 2025' के साथ पूरी तरह से लागू किया गया। इसका लक्ष्य व्यक्तिगत निजता, व्यावसायिक उपयोगिता और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना है।

निष्कर्ष:

यद्यपि DPDP अधिनियम का लक्ष्य डिजिटल निजता सुरक्षा को मजबूत करना है, लेकिन संवैधानिक चुनौतियां पारदर्शिता, प्रेस की स्वतंत्रता और राज्य की शक्ति पर अंकुश लगाने जैसे मुद्दों के साथ इसके टकराव को उजागर करती हैं। अब सर्वोच्च न्यायालय यह तय करेगा कि क्या यह अधिनियम निजता, जनहित और लोकतांत्रिक जवाबदेही के बीच सही संतुलन बनाता है।