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Blog / 31 Aug 2026

डिजिटल कृषि क्रांति: एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली (iFMS) का नया चरण

चर्चा में क्यों?

हाल ही में रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के उर्वरक विभाग (DoF) ने एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली (iFMS) को एक डेटा-संचालित (Data-Driven) आधुनिक चरण में स्थानांतरित कर दिया है। इस नए ढांचे के तहत iFMS को हरियाणा के 'मेरी फसल मेरा ब्योरा' (MFMB) पोर्टल और राष्ट्रीय स्तर पर 'एग्रीस्टैक' (AgriStack) जैसी पहलों के साथ एकीकृत किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य भूमि रिकॉर्ड और वास्तविक फसल आवश्यकताओं के आधार पर उर्वरकों का सटीक वितरण सुनिश्चित करना है।

एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली (iFMS):

      • एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली (iFMS) भारत सरकार का एक व्यापक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो उर्वरकों के उत्पादन, आयात, परिवहन, स्टॉक की उपलब्धता, खुदरा बिक्री और सब्सिडी के वितरण की पूरी श्रृंखला की निगरानी करता है। इसके जरिए राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर उर्वरक आपूर्ति और स्टॉक की रियल-टाइम (वास्तविक समय) निगरानी की जाती है।
      • यह देश की सबसे बड़ी डिजिटल प्रणालियों में से एक है, जो उर्वरक उत्पादन से लेकर अंतिम छोर तक वितरण की निगरानी करती है

एकीकरण के प्रमुख लाभ:

      • भूमि और फसल डेटा का सत्यापन (Crop & Land Mapping): iFMS को 'मेरी फसल मेरा ब्योरा' (MFMB) के साथ जोड़ने से अब किसी भी किसान द्वारा खरीदे जाने वाले उर्वरक की मात्रा को उसके स्वामित्व वाली भूमि और बोई गई फसल के रकबे से मिलाया जा सकेगा। इससे उर्वरकों की जमाखोरी, कालाबाजारी और गैर-कृषि कार्यों (जैसे उद्योगों में उपयोग) के लिए होने वाले अवैध डायवर्जन पर पूरी तरह रोक लगेगी।
      • उन्नत निर्णय सहायता डैशबोर्ड (Decision Support System): नीति निर्माताओं के लिए एक केंद्रीकृत विश्लेषणात्मक डैशबोर्ड विकसित किया गया है। यह राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर स्टॉक की उपलब्धता की रीयल-टाइम निगरानी करता है, जिससे किसी भी क्षेत्र में संभावित कमी या असामान्य खरीद का तुरंत पता लगाकर आपूर्ति को सुचारू बनाया जा सकता है।
      • मोबाइल-ऐप आधारित प्री-बुकिंग प्रणाली: 'फर्टिलाइजर सेल फ्रेमवर्क' (FFS) के तहत किसान अब 'एग्रीस्टैक' (AgriStack) पहचान पत्र का उपयोग करके मोबाइल ऐप के माध्यम से उर्वरक की प्री-बुकिंग कर सकते हैं। इसके बाद डीलर के पास जाकर केवल क्यूआर (QR) कोड स्कैन करके तुरंत उर्वरक प्राप्त किया जा सकता है, जिससे लंबी लाइनों से मुक्ति मिलेगी।
      • आपूर्ति श्रृंखला और वित्तीय सुरक्षा: उर्वरक ले जाने वाले वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम (VLTS) लगाया गया है ताकि पारगमन (Transit) के दौरान होने वाली चोरी को रोका जा सके। इसके अतिरिक्त, ई-सब्सिडी बिलिंग को सीधे सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) से जोड़ा गया है, जिससे कंपनियों को सब्सिडी का भुगतान तेजी से और सीधे होता है।

निष्कर्ष:

यह कदम भारत में 'सटीक कृषि' (Precision Farming) और 'डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे' (DPI) को मजबूत करने की दिशा में उपलब्ध है। यह उर्वरक सब्सिडी के अधिक लक्षित एवं पारदर्शी प्रशासन के माध्यम से राजकोषीय संसाधनों के अधिक कुशल उपयोग में योगदान दे सकता है। संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देकर मृदा स्वास्थ्य (Soil Health) की भी रक्षा करेगा। हालांकि, इसके सफल कार्यान्वयन के लिए देश के में इंटरनेट कनेक्टिविटी को मजबूत करना और छोटे किसानों को डिजिटल रूप से साक्षर बनाना अनिवार्य होगा।

 

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