संदर्भ:
हाल ही में कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE) ने भारतीय नौसेना को एक साथ तीन प्रमुख नौसैनिक प्लेटफॉर्म आईएनएस दुनागिरी (INS Dunagiri), आईएनएस संशोधक (INS Sanshodhak) और आईएनएस अग्रय (INS Agray) सौंपकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह पहला अवसर है जब किसी भारतीय शिपयार्ड ने एक ही दिन में तीन अलग-अलग श्रेणियों के युद्धपोत वितरित किए हैं।
युद्धपोतों का सामरिक विश्लेषण:
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- आईएनएस दुनागिरी (P17A स्टील्थ फ्रिगेट):
- यह 'प्रोजेक्ट 17A' के तहत निर्मित दूसरा उन्नत स्टील्थ फ्रिगेट है।
- विशेषता: इसमें उन्नत रडार प्रणाली, कम रडार सिग्नेचर (Stealth) और घातक हथियार प्रणालियां शामिल हैं।
- महत्व: यह हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
- यह 'प्रोजेक्ट 17A' के तहत निर्मित दूसरा उन्नत स्टील्थ फ्रिगेट है।
- आईएनएस संशोधक (सर्वेक्षण पोत):
- यह चार 'सर्वे वेसल लार्ज' (SVL) परियोजनाओं में से चौथा जहाज है।
- कार्य: इसका मुख्य कार्य तटीय और गहरे पानी के हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण करना है।
- महत्व: सटीक समुद्री मानचित्रण, सुरक्षित नौवहन, और भविष्य की नौसैनिक रणनीतियों के लिए आवश्यक डेटा उपलब्ध कराता है। यह ‘ब्लू इकोनॉमी’ को भी मजबूती देता है।
- यह चार 'सर्वे वेसल लार्ज' (SVL) परियोजनाओं में से चौथा जहाज है।
- आईएनएस अग्रय (ASW SWC):
- यह एक एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट है।
- कार्य: इसे तटीय जल में पनडुब्बी रोधी अभियानों और कम तीव्रता वाले समुद्री कार्यों के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें आधुनिक सोनार और निगरानी प्रणालियाँ हैं।
- महत्व: यह भारत की तटीय सुरक्षा और पनडुब्बी-खतरे से निपटने की क्षमता को सुदृढ़ करता है।
- यह एक एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट है।
- आईएनएस दुनागिरी (P17A स्टील्थ फ्रिगेट):
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'आत्मनिर्भर भारत' और रक्षा स्वदेशीकरण:
यह उपलब्धि केवल निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' पहल की सफलता का प्रतिबिंब है।
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- स्वदेशी सामग्री: इन जहाजों में लगभग 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जिससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) और स्थानीय उद्योगों को बल मिला है।
- आयात निर्भरता में कमी: पहले भारत महत्वपूर्ण युद्धपोतों के लिए रूस या पश्चिमी देशों पर निर्भर था। अब, डिजाइन से लेकर निर्माण तक की पूरी प्रक्रिया घरेलू स्तर पर संपन्न हो रही है।
- स्वदेशी सामग्री: इन जहाजों में लगभग 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जिससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) और स्थानीय उद्योगों को बल मिला है।
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GRSE की बढ़ती क्षमता और रणनीतिक भूमिका:
GRSE ने अब तक कुल 118 युद्धपोत वितरित किए हैं, जिनमें से 80 विशेष रूप से भारतीय नौसेना के लिए हैं। एक साथ तीन प्लेटफार्मों की डिलीवरी निम्नलिखित पहलुओं को रेखांकित करती है:
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- बेहतर परियोजना प्रबंधन: जटिल युद्धपोतों के निर्माण में लगने वाले समय (Gestation Period) में कमी आई है।
- आधुनिक बुनियादी ढांचा: एकीकृत निर्माण (Integrated Construction) पद्धति का उपयोग करके उत्पादन क्षमता में वृद्धि की गई है।
- ब्लू इकोनॉमी और समुद्री सुरक्षा: ये जहाज न केवल युद्ध के लिए हैं, बल्कि समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और आपदा राहत (HADR) कार्यों में भी सक्षम हैं।
- बेहतर परियोजना प्रबंधन: जटिल युद्धपोतों के निर्माण में लगने वाले समय (Gestation Period) में कमी आई है।
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निष्कर्ष:
तीन युद्धपोतों की एक साथ सुपुर्दगी भारत की समुद्री शक्ति, औद्योगिक क्षमता, हिंद महासागर में बढ़ती भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और रणनीतिक आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। GRSE द्वारा इन जहाजों की डिलीवरी भारत के 'सागर' (SAGAR - Security and Growth for All in the Region) दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह न केवल भारत की 'नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर' (Net Security Provider) की भूमिका को मजबूत करता है, बल्कि वैश्विक रक्षा निर्यात बाजार में भी भारत की साख बढ़ाता है।

