संदर्भ:
हाल ही में दिल्ली सरकार ने प्रधानमंत्री ई-ड्राइव (नवोन्मेषी वाहन संवर्धन हेतु विद्युत चालित क्रांति) योजना के अंतर्गत 2,800 वातानुकूलित निम्न तल (लो-फ्लोर) विद्युत बसों को शामिल करने की घोषणा की है।
प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना के बारे में:
यह योजना ₹10,900 करोड़ की एक केंद्रीय क्षेत्रीय योजना है, जिसे भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य विद्युत वाहनों को प्रोत्साहन देना, चार्जिंग अवसंरचना को सुदृढ़ करना तथा विद्युत वाहन घटकों के स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देना है।
उद्देश्य:
विद्युत वाहनों के लिए मांग आधारित प्रोत्साहन प्रदान करना।
सुदृढ़ सार्वजनिक चार्जिंग नेटवर्क का विकास करना।
हरितगृह गैस उत्सर्जन तथा शहरी प्रदूषण में कमी लाना।
भारत के वर्ष 2070 तक शून्य-कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य का समर्थन करना।
प्रमुख विशेषताएँ:
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- मांग प्रोत्साहन: विद्युत दोपहिया, तिपहिया, एम्बुलेंस, ट्रक एवं बसों पर अनुदान।
- ई-वाउचर प्रणाली: आधार-आधारित डिजिटल वाउचर द्वारा पारदर्शी अनुदान वितरण।
- विद्युत बसें: प्रमुख नगरों में 14,000 से अधिक विद्युत बसों के संचालन में सहायता।
- विद्युत ट्रक: पुराने डीजल ट्रकों के स्क्रैप पर प्रति वाहन ₹9.6 लाख तक प्रोत्साहन।
- चार्जिंग अवसंरचना: सार्वजनिक चार्जिंग केंद्रों एवं राजमार्ग चार्जिंग गलियारों की स्थापना हेतु वित्तीय सहायता।
- मांग प्रोत्साहन: विद्युत दोपहिया, तिपहिया, एम्बुलेंस, ट्रक एवं बसों पर अनुदान।
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भारत के विद्युत वाहन (EV) पारितंत्र के लिए महत्त्व:
भारत का विद्युत वाहन क्षेत्र, विशेषकर दोपहिया और तिपहिया खंड में तीव्र गति से विकास कर रहा है। PM ई-ड्राइव जैसी सरकारी योजनाएँ, राज्य स्तरीय EV नीतियाँ तथा बढ़ती ईंधन कीमतों ने इसके अपनाने को बढ़ावा दिया है। विद्युत बसों का बड़े पैमाने पर उपयोग शहरी प्रदूषण को काफी हद तक कम कर सकता है, सार्वजनिक परिवहन की दक्षता बढ़ा सकता है तथा जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटा सकता है।
चुनौतियाँ:
इसके बावजूद कई चुनौतियाँ विद्यमान हैं:
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- विद्युत वाहनों की उच्च प्रारंभिक लागत।
- अपर्याप्त चार्जिंग अवसंरचना।
- शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में चार्जिंग सुविधा में असमानता।
- लिथियम और कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के लिए आयात पर निर्भरता।
- विद्युत वितरण नेटवर्क पर संभावित दबाव।
- विद्युत वाहनों की उच्च प्रारंभिक लागत।
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आगे की राह:
भारत को बैटरी एवं EV घटकों के घरेलू उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, चार्जिंग अवसंरचना का विस्तार करना चाहिए, बैटरी पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना चाहिए तथा स्मार्ट ग्रिड एकीकरण को सुदृढ़ करना चाहिए। सतत गतिशीलता प्राप्त करने और दीर्घकालिक जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने के लिए निरंतर नीतिगत समर्थन और सार्वजनिक परिवहन के विद्युतीकरण में निवेश आवश्यक होगा।
निष्कर्ष:
PM ई-ड्राइव योजना के अंतर्गत दिल्ली में विद्युत बसों का विस्तार स्वच्छ और अधिक कुशल शहरी परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल न केवल सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करती है, बल्कि उत्सर्जन में कमी, ऊर्जा सुरक्षा में वृद्धि और एक सतत परिवहन प्रणाली के निर्माण में भी योगदान देती है।
