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Blog / 23 Jun 2026

मई 2026 में कोर सेक्टर की वृद्धि घटकर 0.5% रही

संदर्भ:

हाल ही में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत के आठ प्रमुख कोर औद्योगिक क्षेत्रों की वृद्धि दर मई 2026 में घटकर 0.5% रह गई, जो पिछले 21 महीनों में दूसरा सबसे निम्न स्तर है।

आठ प्रमुख उद्योगों के सूचकांक (ICI) के बारे में:

आठ प्रमुख उद्योगों का सूचकांक ((Index of Eight Core Industries -ICI) आधारभूत अवसंरचना से जुड़े प्रमुख क्षेत्रों के प्रदर्शन को मापता है और समग्र औद्योगिक गतिविधि (IIP) का एक अग्रणी संकेतक (Leading Indicator) माना जाता है।

ICI में कोर सेक्टरों की हिस्सेदारी:

पेट्रोलियम रिफाइनरी उत्पाद: 28.04%
बिजली: 19.85%
इस्पात: 17.92%
कोयला: 10.33%
कच्चा तेल: 8.98%
प्राकृतिक गैस: 6.88%
सीमेंट: 5.37%
उर्वरक: 2.63%

ये आठ क्षेत्र मिलकर औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में लगभग 40.27% भार (Weightage) रखते हैं।

India Core Infrastructure Output Slows to 0.5% in May: Key Sectors Decline  - Rediff.com

आंकड़ों की प्रमुख विशेषताएँ:

      • मई 2026 में भारत के कोर सेक्टर की वृद्धि दर घटकर 0.5% रह गई, जो पिछले 21 महीनों का दूसरा सबसे निम्न स्तर है। यह मई 2025 में दर्ज 1.2% वृद्धि की तुलना में उल्लेखनीय गिरावट को दर्शाता है और औद्योगिक गतिविधियों की गति में कमजोरी का संकेत देता है। यह आंकड़ा अक्टूबर 2025 में दर्ज -0.1% के संकुचन से केवल थोड़ा बेहतर है, जो आधारभूत अवसंरचना से जुड़े उद्योगों में लगातार बनी हुई अस्थिरता को दर्शाता है।
      • ऊर्जा से जुड़े प्रमुख क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर संकुचन देखा गया। कच्चे तेल (-4.6%), प्राकृतिक गैस (-4.9%), रिफाइनरी उत्पाद (-8.7%), कोयला (-9.3%) और उर्वरक (-0.9%) क्षेत्रों में नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। पेट्रोलियम और कोयला क्षेत्र के उत्पादन में तेज गिरावट समग्र कोर सेक्टर प्रदर्शन पर सबसे बड़ा दबाव रही, जबकि रिफाइनरी उत्पादों में पिछले तीन वर्षों से अधिक अवधि की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
      • इसके विपरीत, केवल कुछ क्षेत्रों में सकारात्मक वृद्धि देखने को मिली। बिजली उत्पादन में 8.7% की वृद्धि हुई, जिसे मुख्य रूप से निम्न आधार प्रभाव (Low Base Effect) का समर्थन मिला। इस्पात उत्पादन में 5.0% की वृद्धि दर्ज की गई, हालांकि यह पिछले 13 महीनों की सबसे कम वृद्धि दर रही। सीमेंट उत्पादन में 8.4% की वृद्धि हुई, जो निर्माण गतिविधियों की स्थिर मांग के कारण मामूली सुधार को दर्शाती है।

कोर सेक्टर के प्रदर्शन का महत्त्व:

आर्थिक संकेतक
कोर सेक्टर औद्योगिक उत्पादन (IIP) का एक अग्रणी संकेतक है।
यह विनिर्माण एवं अवसंरचना क्षेत्रों में मांग की स्थिति को प्रतिबिंबित करता है।

अर्थव्यवस्था में उच्च योगदान
ये क्षेत्र IIP में लगभग 40% हिस्सेदारी रखते हैं, जिससे ये GDP वृद्धि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बन जाते हैं।

अवसंरचना से संबंध
इस्पात, सीमेंट और बिजली जैसे क्षेत्र सीधे निर्माण एवं अवसंरचना विकास से जुड़े हुए हैं।

नीतिगत प्रासंगिकता
यह नीति-निर्माताओं को औद्योगिक मंदी या सुधार की प्रवृत्तियों का वास्तविक समय (Real-Time) में आकलन करने में सहायता प्रदान करता है।

चिंताएँ:

• ऊर्जा से जुड़े क्षेत्रों (कोयला, तेल, गैस और रिफाइनरी) में कमजोरी।
उर्वरक क्षेत्र में लगातार संकुचन, जिससे कृषि इनपुट प्रभावित हो सकते हैं।
विनिर्माण और अवसंरचना क्षेत्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने का जोखिम।
ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं को प्रभावित करने वाली वैश्विक अनिश्चितताएँ।

निष्कर्ष:

मई 2026 में कोर सेक्टर की वृद्धि दर का घटकर 0.5% रह जाना औद्योगिक गतिविधियों की कमजोर पड़ती गति का संकेत है, जिसका प्रमुख कारण ऊर्जा से जुड़े उद्योगों में संकुचन है। यद्यपि बिजली और सीमेंट जैसे कुछ क्षेत्रों ने मजबूती दिखाई है, फिर भी स्थायी सुधार के लिए वैश्विक ऊर्जा बाजारों में स्थिरता, घरेलू मांग में पुनरुद्धार तथा अवसंरचना-आधारित विकास को बढ़ावा देने की आवश्यकता होगी।

 

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