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Blog / 02 Apr 2026

वन्यजीव प्रवासी प्रजाति संरक्षण सम्मेलन (CMS COP15)

वन्यजीव प्रवासी प्रजाति संरक्षण सम्मेलन (CMS COP15)

संदर्भ:

हाल ही में ब्राजील के कैम्पो ग्रांडे में वन्यजीवों की प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर कन्वेंशन (CMS) के 15वें पक्षकारों के सम्मेलन (COP15) का आयोजन संपन्न हुआ। इस शिखर सम्मेलन का विषय "प्रकृति को जोड़ना, जीवन को बनाए रखना" (Connecting Nature to Sustain Life) था। इस शिखर सम्मेलन में प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण के लिए कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए, जिनमें 40 नई प्रजातियों को सुरक्षा सूची में शामिल करना प्रमुख है।

प्रमुख निष्कर्ष:

      • सुरक्षा सूची (Appendices) का विस्तार: COP15 में कुल 40 नई प्रजातियों, उप-प्रजातियों और आबादी को CMS के परिशिष्टों (Appendices) में जोड़ा गया है:
        • परिशिष्ट I (Appendix I): इसमें उन लुप्तप्राय प्रजातियों को रखा गया है जिन्हें सख्त सुरक्षा की आवश्यकता है। इस बार बर्फीला उल्लू (Snowy Owl) और विशाल ऊदबिलाव (Giant Otter) जैसी प्रजातियों को इसमें शामिल किया गया है।
        • परिशिष्ट II (Appendix II): इसमें उन प्रजातियों को रखा गया है जिनके संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है। इसमें धारीदार लकड़बग्घा (Striped Hyena) और थ्रेशर शार्क की विभिन्न प्रजातियों को स्थान मिला है।
      • समुद्री फ्लाईवे (Marine Flyways) की मान्यता: सम्मेलन में पहली बार वैश्विक 'समुद्री फ्लाईवे' (Marine Flyways) को औपचारिक रूप से मान्यता दी गई। यह समुद्री पक्षियों और अन्य समुद्री जीवों के प्रवास मार्गों को संरक्षित करने के लिए सदस्य देशों के बीच समन्वय को बढ़ावा देगा।
      • अवैध शिकार पर वैश्विक पहल: प्रवासी प्रजातियों के अवैध और असुरक्षित शिकार (Illegal Taking) को रोकने के लिए एक नई वैश्विक पहल शुरू की गई है। यह पहल विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर केंद्रित है जहाँ प्रवासी पक्षियों और स्तनधारियों का बड़े पैमाने पर शिकार किया जाता है।
      • पारिस्थितिक कनेक्टिविटी: COP15 का मुख्य जोर 'पारिस्थितिक कनेक्टिविटी' पर रहा। इसका अर्थ है कि केवल प्रजातियों को बचाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके प्रवास के रास्तों (जैसे गलियारे और वेटलैंड्स) को भी निर्बाध और सुरक्षित रखना आवश्यक है।

cmscop15 | Convention on Migratory Species (CMS)

भारत और वन्य जीवों की प्रवासी प्रजातियों का संरक्षण (CMS):

भारत 1983 से CMS का एक हस्ताक्षरकर्ता देश है। भारत ने फरवरी 2020 में गांधीनगर में COP13 की मेजबानी की थी। भारत वर्तमान में 'सेंट्रल एशियन फ्लाईवे' (CAF) के संरक्षण में अग्रणी भूमिका निभा रहा है, जो उत्तर ध्रुवीय क्षेत्र से हिंद महासागर तक फैला हुआ है।

वन्य जीवों की प्रवासी प्रजातियों का संरक्षण (CMS):

इसे 'बॉन कन्वेंशन' के नाम से भी जाना जाता है। यह संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के तत्वावधान में एकमात्र वैश्विक संधि है जो प्रवासी प्रजातियों और उनके आवासों के संरक्षण के लिए काम करती है।

      • सचिवालय: बॉन, जर्मनी।
      • अगला सम्मेलन (COP16): वर्ष 2029 में जर्मनी में आयोजित होगा, जो CMS की 50वीं वर्षगांठ भी होगी।
      • शामिल नई प्रजातियां: धारीदार लकड़बग्घा, विशाल ऊदबिलाव, जिम्बाब्वे की चीता आबादी, और अमेज़ॅन की प्रवासी कैटफ़िश।

जीवों की प्रवासी प्रजातियों का महत्त्व:

प्रवासी प्रजातियां पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य की सूचक होती हैं। वे परागण, बीज प्रसार और कीट नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। हालांकि, जलवायु परिवर्तन, आवास का विखंडन (Habitat Fragmentation) और रैखिक बुनियादी ढांचा (जैसे सड़कें और बिजली की लाइनें) उनके अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं। CMS COP15 के निर्णय 'कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे' (GBF) के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं।

निष्कर्ष:

CMS COP15 ने यह स्पष्ट किया है कि प्रवासी प्रजातियों का संरक्षण सीमाओं से परे एक साझा वैश्विक दायित्व है। 40 नई प्रजातियों का शामिल होना वैश्विक जैव विविधता संकट की गंभीरता को दर्शाता है, साथ ही उन्हें बचाने के सामूहिक संकल्प को भी दृढ़ करता है।