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Blog / 27 May 2026

भारतीय वैज्ञानिकों ने ‘CLEAR’ तकनीक विकसित की

चर्चा में क्यों:

हाल ही में भारतीय चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सफलता के रूप में बेंगलुरु के वैज्ञानिकों ने प्रोटीन इमेजिंग की एक नई और क्रांतिकारी तकनीक CLEAR’ (Cleavable Light-Erased Antibody Reporter) विकसित की है। यह तकनीक 'प्रिसिजन मेडिसिन' (सटीक चिकित्सा), कैंसर की शुरुआती पहचान और न्यूरोलॉजिकल (तंत्रिका तंत्र) रोगों के इलाज में एक महत्वपूर्ण खोज सिद्ध हो सकती है।  वैज्ञानिकों की इस खोज को रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री के प्रतिष्ठित जर्नल 'केमिकल साइंस' में भी प्रकाशित किया गया है।

CLEAR तकनीक के विषय में:

      • पारंपरिक तरीकों में कोशिकाओं के भीतर विभिन्न प्रोटीनों की पहचान करने के लिए कई तरह के फ्लोरोसेंट मार्करों (चमकदार रंगों) का उपयोग करना पड़ता है। यह प्रक्रिया काफी जटिल होती है और अक्सर इससे जैविक ऊतक (टिश्यूज) खराब हो जाते हैं।
      • CLEAR तकनीक इस पूरी प्रक्रिया को एक 'बायोलॉजिकल ब्लैकबोर्ड' की तरह आसान बना देती है। इसमें केवल एक ही फ्लोरोसेंट मार्कर का उपयोग करके अनगिनत प्रोटीनों का नक्शा तैयार किया जा सकता है:
        • टैगिंग (Tagging): सबसे पहले फ्लोरोसेंट टैग की मदद से कोशिका के चुनिंदा प्रोटीन को चमकाया जाता है।
        • इमेजिंग (Imaging): माइक्रोस्कोप के जरिए इसकी हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीर ली जाती है।
        • इरेजिंग (Erasing): इसके बाद 365 nm LED लाइट की एक हल्की किरण डालकर उस चमक (सिग्नल) को पूरी तरह मिटा दिया जाता है।
        • रिपीटिंग (Repeating): ब्लैकबोर्ड साफ होने के बाद, उसी नमूने पर दूसरे प्रोटीनों को फिर से टैग और स्कैन किया जाता है। यह चक्र लगातार चलता रहता है।
      • 'जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च' (JNCASR), बेंगलुरु के प्रोफेसर सरित एस. अगस्ती और उनकी टीम ने इस तकनीक को डिजाइन और सिंथेसाइज किया है और 'भारतीय विज्ञान संस्थान' (IISc) बेंगलुरु ने इम्यून कोशिकाओं (प्रतिरक्षा कोशिकाओं) जैसे जटिल जैविक प्रणालियों पर इस तकनीक का सफल परीक्षण करने में मदद की।

Indian Scientists Develop ‘CLEAR’ Technology

चिकित्सा क्षेत्र में इस तकनीक का अनुप्रयोग:

      • कैंसर की शुरुआती पहचान: यह तकनीक डॉक्टरों को कोशिकाओं के स्तर पर होने वाले उन सूक्ष्म बदलावों को देखने में मदद करेगी जो पारंपरिक स्कैन में दिखाई नहीं देते। इससे कैंसर का बेहद शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकेगा।
      • दिमागी बीमारियों को समझना: अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसी जटिल न्यूरोलॉजिकल बीमारियों में प्रोटीनों के व्यवहार को समझना अब तक बहुत कठिन था, लेकिन CLEAR तकनीक से इनका सटीक अध्ययन संभव होगा।
      • प्रिसिजन मेडिसिन (सटीक उपचार): हर मरीज का शरीर और उसकी बीमारी अलग होती है। यह तकनीक मरीज के प्रोटीनोमिक प्रोफाइल का सटीक डेटा देगी, जिससे डॉक्टर 'वन-साइज-फिट्स-ऑल' के बजाय मरीज के अनुसार सटीक दवाएं तैयार कर सकेंगे।
      • कम लागत और अधिक दक्षता: केवल एक मार्कर और सामान्य एलईडी लाइट का उपयोग होने के कारण यह तकनीक मौजूदा वैश्विक तकनीकों की तुलना में काफी सस्ती और सुरक्षित है।

निष्कर्ष:

'CLEAR' तकनीक का विकास आत्मनिर्भर भारत और वैश्विक चिकित्सा विज्ञान के लिए एक गर्व का क्षण है। भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा बनाई गई यह तकनीक न केवल प्रयोगशाला अनुसंधान की गति को तेज करेगी, बल्कि आने वाले समय में दुनिया भर के करोड़ों मरीजों को कम खर्च में सटीक और जीवन रक्षक इलाज मुहैया कराने का मार्ग प्रशस्त करेगी।

 

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