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Blog / 02 Jul 2026

सिविल पंजीकरण प्रणाली (Civil Registration System- CRS) रिपोर्ट, 2024

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त (Registrar General of India) (RGI) द्वारा जारी सिविल पंजीकरण प्रणाली (CRS) रिपोर्ट, 2024 में बताया गया है कि वर्ष 2024 में देशभर में 99% से अधिक जन्म और मृत्यु का पंजीकरण किया गया। यह भारत की सिविल पंजीकरण प्रणाली में उल्लेखनीय प्रगति को दर्शाता है।

CRS रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष:

    • जन्म पंजीकरण की दर 99.1% रही। पंजीकृत जन्मों की संख्या 2.52 करोड़ (2023) से बढ़कर 2.54 करोड़ (2024) हो गई।
    • मृत्यु पंजीकरण की दर 99.4% रही। पंजीकृत मृत्यु की संख्या 86.6 लाख (2023) से बढ़कर 89.4 लाख (2024) हो गई।
    • 13 राज्यों में जन्म पंजीकरण 90% से अधिक दर्ज किया गया, जबकि 15 राज्यों में मृत्यु पंजीकरण 90% से अधिक रहा।
    • वर्ष 2024 में 81,117 मृतजन्म (Stillbirths) दर्ज किए गए, जिनमें से लगभग 69% शहरी क्षेत्रों में हुए।
    • रिपोर्ट के अनुसार जन्म, मृत्यु एवं मृतजन्म के पंजीकरण में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिससे भारत की जनसांख्यिकीय प्रवृत्तियों का अधिक विश्वसनीय आकलन संभव हुआ है।

CRS 2024: India's Sex Ratio at Birth Moves Toward Balance

जन्म के समय लिंगानुपात (Sex Ratio at Birth - SRB) के बारे में:

जन्म के समय लिंगानुपात (SRB) से आशय किसी निश्चित अवधि में प्रति 1,000 जीवित पुरुष जन्मों पर जीवित जन्म लेने वाली बालिकाओं की संख्या से है। यह लैंगिक समानता, प्रजनन स्वास्थ्य तथा लिंग-चयन आधारित भ्रूणहत्या (Sex-selective practices) की स्थिति का एक महत्वपूर्ण संकेतक है।

भारत का जन्म के समय लिंगानुपात (2024)

    • 917 बालिकाएँ प्रति 1,000 बालक

सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्य/केंद्रशासित प्रदेश

    • अरुणाचल प्रदेश – 1,050
    • अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह – 984
    • मेघालय – 974
    • मिजोरम – 972
    • केरल – 970

सबसे कम जन्म के समय लिंगानुपात वाले राज्य/केंद्रशासित प्रदेश

    • नागालैंड – 865
    • लक्षद्वीप – 865
    • झारखंड – 890

यद्यपि राष्ट्रीय स्तर पर जन्म के समय लिंगानुपात में सुधार हुआ है, फिर भी रिपोर्ट विभिन्न राज्यों के बीच क्षेत्रीय असंतुलन को दर्शाती है, जो देश के कुछ हिस्सों में अब भी लैंगिक भेदभाव के बने रहने की ओर संकेत करता है।

रिपोर्ट के निष्कर्षों का महत्व:

    • यदि जन्म के समय लिंगानुपात प्राकृतिक जैविक सीमा (लगभग 950 बालिकाएँ प्रति 1,000 बालक) के निकट होता है, तो यह व्यापक स्तर पर लिंग-चयन आधारित गर्भपात की अनुपस्थिति तथा बेहतर लैंगिक समानता का संकेत माना जाता है।
    • ऐतिहासिक रूप से भारत में पुत्र वरीयता तथा सामाजिक भेदभाव के कारण पुरुष-प्रधान लिंगानुपात देखने को मिलता रहा है।
    • रिपोर्ट के अनुसार केरल, मेघालय, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों ने संतुलित अथवा बालिकाओं के पक्ष में बेहतर लिंगानुपात प्राप्त किया है, जबकि कुछ राज्यों में अभी भी लक्षित हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
    • जन्म एवं मृत्यु के बेहतर पंजीकरण से साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण (Evidence-based Policymaking) को मजबूती मिलती है, क्योंकि इससे स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक कल्याण और जनसंख्या नीति के लिए अधिक सटीक जनसांख्यिकीय आँकड़े उपलब्ध होते हैं।

सिविल पंजीकरण प्रणाली (Civil Registration System- CRS) क्या है?

सिविल पंजीकरण प्रणाली (CRS) भारत में जन्म, मृत्यु एवं मृतजन्म (Stillbirth) का सतत, अनिवार्य और सार्वभौमिक पंजीकरण करने की आधिकारिक व्यवस्था है।

कानूनी आधार

      • इसका संचालन जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 के अंतर्गत किया जाता है।
      • इसका क्रियान्वयन भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त (Registrar General of India) (RGI) द्वारा गृह मंत्रालय के अधीन किया जाता है।
      • पंजीकरण की प्रक्रिया राज्य सरकारों एवं स्थानीय पंजीकरण अधिकारियों के माध्यम से संचालित की जाती है।

उद्देश्य

      • जन्म, मृत्यु एवं मृतजन्म का पूर्ण एवं स्थायी अभिलेख तैयार करना।
      • जन्म पंजीकरण के माध्यम से प्रत्येक नागरिक को वैधानिक पहचान प्रदान करना।
      • जनसंख्या नियोजन एवं जनसांख्यिकीय विश्लेषण के लिए विश्वसनीय जीवन सांख्यिकी (Vital Statistics) उपलब्ध कराना।
      • स्वास्थ्य एवं सामाजिक कल्याण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सहायता करना।

चुनौतियाँ:

    • विभिन्न राज्यों में पंजीकरण की गुणवत्ता एवं लिंगानुपात में क्षेत्रीय असमानताएँ।
    • कुछ क्षेत्रों में पुत्र वरीयता एवं लिंग-चयन आधारित प्रथाओं का बने रहना।
    • दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों में पंजीकरण में विलंब।
    • जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण की अनिवार्यता के संबंध में जन-जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता।
    • राज्यों के बीच डिजिटल अवसंरचना एवं डेटा इंटरऑपरेबिलिटी को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता।

निष्कर्ष:

सिविल पंजीकरण प्रणाली (CRS) रिपोर्ट, 2024 यह दर्शाती है कि भारत ने जन्म, मृत्यु एवं अन्य महत्वपूर्ण जीवन घटनाओं के सार्वभौमिक पंजीकरण की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है, जिससे देश के जनसांख्यिकीय आँकड़ों का आधार और अधिक मजबूत हुआ है। हालाँकि, कई राज्यों में जन्म के समय लिंगानुपात में सुधार उत्साहजनक है, फिर भी विभिन्न क्षेत्रों के बीच विद्यमान असमानताएँ यह संकेत देती हैं कि लैंगिक भेदभाव को समाप्त करने तथा संतुलित जनसांख्यिकीय विकास सुनिश्चित करने के लिए निरंतर एवं लक्षित प्रयासों की आवश्यकता बनी हुई है।

 

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