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Blog / 17 Apr 2026

चीन ने अमेरिका को पीछे छोड़कर FY26 में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना

संदर्भ:

हाल ही में चीन ने संयुक्त राज्य अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए वित्त वर्ष 2025–26 में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया है, जहाँ द्विपक्षीय व्यापार 151.1 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया। यह स्थिति पिछले चार वर्षों (FY22–FY25) के बाद बदली है,इसके पहले अमेरिका शीर्ष स्थान पर था।

भारत–चीन व्यापार के मुख्य बिंदु:

      • वित्त वर्ष 2025–26 में भारत–चीन का द्विपक्षीय व्यापार 151.1 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया, जो दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों के महत्वपूर्ण विस्तार को दर्शाता है। इसी अवधि में भारत का चीन को निर्यात 19.47 अरब डॉलर रहा, जिसमें हर वर्ष 36.66% की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई, जबकि चीन से आयात बढ़कर 131.63 अरब डॉलर हो गया, जो 16% की वृद्धि है।
      • इसके परिणामस्वरूप भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा बढ़कर लगभग 112.6 अरब डॉलर हो गया, जो अब तक का सबसे अधिक स्तर है। यह व्यापार संबंधों में एक संरचनात्मक असंतुलन को दर्शाता है, जहाँ निर्यात में वृद्धि के बावजूद भारत चीन से आयात पर अत्यधिक निर्भर बना हुआ है, जिससे व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है।

China surpasses US as India’s largest trading partner in FY26

भारत–अमेरिका व्यापार प्रदर्शन:

हालाँकि संयुक्त राज्य अमेरिका अब भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार नहीं रहा, फिर भी यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण निर्यात गंतव्य बना हुआ है। भारत का अमेरिका को निर्यात 87.3 अरब डॉलर रहा, जिसमें 0.92% की मामूली वृद्धि हुई, जबकि अमेरिका से आयात 15.95% बढ़कर 52.9 अरब डॉलर हो गया। इसके परिणामस्वरूप भारत का अमेरिका के साथ व्यापार अधिशेष (surplus) घटकर 34.4 अरब डॉलर रह गया, जो पिछले वर्ष 40.89 अरब डॉलर था।

भारत की समग्र व्यापार स्थिति:

      • भारत के बाह्य क्षेत्र (external sector) में घाटा बढ़ रहा है। कुल निर्यात 860.09 अरब डॉलर (+4.22%) तक पहुँचा, जबकि आयात 979.40 अरब डॉलर (+6.47%) तक बढ़ गया, जिसके परिणामस्वरूप 119.3 अरब डॉलर का व्यापार घाटा हुआ।
      • वस्तु व्यापार (merchandise) में निर्यात 441.78 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 774.98 अरब डॉलर रहा, जिससे बड़ा घाटा उत्पन्न हुआ। हालांकि सेवा क्षेत्र (services) के निर्यात 418.31 अरब डॉलर रहे, जिससे 213.89 अरब डॉलर का मजबूत अधिशेष (surplus) बना, जिसने इस अंतर को आंशिक रूप से संतुलित किया।

चीन के पुनः शीर्ष पर आने के कारण:

      • चीन का भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनना इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, रसायन और मध्यवर्ती उत्पादों (intermediates) के आयात पर निर्भरता के कारण है, साथ ही आयात-प्रधान विनिर्माण वृद्धि भी इसका एक प्रमुख कारण है। इसके विपरीत, भारत–अमेरिका व्यापार वृद्धि अपेक्षाकृत धीमी रही है।
      • 112 अरब डॉलर के व्यापार घाटे में वृद्धि बाहरी निर्भरता, आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता और विविधीकरण की आवश्यकता को दर्शाती है। नीति स्तर पर घरेलू विनिर्माण (PLI), निर्यात विविधीकरण और “चाइना+1” रणनीति के माध्यम से आयात निर्भरता कम करने पर ध्यान देना आवश्यक है।

निष्कर्ष:

वित्त-वर्ष 26 में चीन का भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनना वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के गहरे एकीकरण को दर्शाता है, न कि किसी अचानक भू-राजनीतिक बदलाव को। हालांकि बढ़ता व्यापार घाटा यह दिखाता है कि भारत अभी भी आयातित मध्यवर्ती वस्तुओं पर निर्भर है। दीर्घकालिक व्यापार स्थिरता घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने, निर्यात विविधीकरण और रणनीतिक आयात निर्भरता को कम करने पर निर्भर करेगी।

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