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Blog / 01 Sep 2025

चंद्रयान-5 मिशन

संदर्भ:

हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) ने चंद्रयान-5 मिशन के लिए एक कार्यान्वयन समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह दोनों देशों का एक संयुक्त चंद्र अन्वेषण अभियान है, जिसका मुख्य उद्देश्य चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्रों, विशेषकर दक्षिणी ध्रुव, का वैज्ञानिक अध्ययन और अन्वेषण करना है।

चंद्रयान-5 मिशन के बारे में:

  • चंद्रयान-5 मिशन, जिसे लूनर पोलर एक्सप्लोरेशन मिशन (LUPEX) भी कहा जाता है, इसरो और जाक्सा का एक संयुक्त चंद्र अभियान है।
  • चंद्रयान-5 मिशन, जिसे लूनर पोलर एक्सप्लोरेशन मिशन (LUPEX) भी कहा जाता है, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) का एक संयुक्त चंद्र अभियान है।

मिशन के उद्देश्य:

·        चंद्रमा के वाष्प तत्वों का अध्ययन: चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर स्थित स्थायी रूप से छाया वाले क्षेत्रों (PSR) में वाष्पशील पदार्थों, विशेषकर पानी की उपस्थिति और प्रकृति का पता लगाना।

·        सटीक और सुरक्षित लैंडिंग: नई तकनीकों का प्रदर्शन करना, जिनसे चंद्रमा की सतह पर सुरक्षित व सटीक लैंडिंग संभव हो सके। इसमें चंद्र रात्रि के दौरान अन्वेषण करने की क्षमता का परीक्षण शामिल है।

·        पानी की खोज और विश्लेषण: चंद्रमा की मिट्टी (Regolith) में मौजूद पानी की मात्रा, गुणवत्ता और रासायनिक संरचना का अध्ययन करना, ताकि भविष्य में मानव मिशनों और टिकाऊ चंद्र अन्वेषण के लिए आधार तैयार किया जा सके।

अंतरिक्ष यान के घटक:

·        लैंडर: इसे इसरो विकसित करेगा। इसकी पेलोड क्षमता कम से कम 350 किलोग्राम होगी।

·        रोवर: इसे JAXA तैयार करेगा। इसका भार लगभग 350 किलोग्राम होगा। इसमें ISRO और JAXA दोनों के वैज्ञानिक उपकरण लगाए जाएंगे। साथ ही इसमें एक ड्रिलिंग प्रणाली होगी, जिसके माध्यम से चंद्र सतह के नीचे से नमूने एकत्र किए जाएंगे।

·        लॉन्च व्हीकल: इस पूरे मिशन को अंतरिक्ष में प्रक्षेपित करने के लिए JAXA का H3-24L रॉकेट इस्तेमाल किया जाएगा।

पेलोड (उपकरण):

         रेवा (REIWA): ड्रिल से निकाले गए नमूनों में पानी की मात्रा और विभिन्न रासायनिक तत्वों का विस्तृत अध्ययन करेगा।

         एलटीजीए (LTGA): ड्रिल किए गए नमूनों की ऊष्मा-गुरुत्वमितीय जाँच करेगा, जिससे उनमें मौजूद पानी की सटीक मात्रा का पता लगाया जा सकेगा।

         ट्राइटन (TRITON): नमूनों में मौजूद वाष्पशील (आसानी से उड़ जाने वाले) घटकों की पहचान और उनका अध्ययन करेगा।

         आईसैप (ISAP): ड्रिल किए गए नमूनों की खनिजीय (खनिज संबंधी) और तत्त्वीय (तत्वों से जुड़ी) संरचना का मापन करेगा।

साझेदारी का महत्व:

ISRO और JAXA की यह साझेदारी न केवल अंतरिक्ष अनुसंधान को मजबूत बनाएगी, बल्कि उद्योगों और स्टार्टअप्स में नवाचार को भी बढ़ावा देगी। इसके साथ ही यह भारत की चंद्र अन्वेषण क्षमताओं को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी।

         यह मिशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर मौजूद स्थायी छाया वाले क्षेत्रों की गहन जानकारी उपलब्ध कराएगा और अंतरिक्ष विज्ञान की सीमाओं को और आगे बढ़ाएगा।

         चंद्रयान-5 भारत के दीर्घकालिक चंद्र अभियान रोडमैप का एक अहम मील का पत्थर है। इस रोडमैप के अंतर्गत भारत का लक्ष्य है कि वर्ष 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की सतह पर उतरें।

चंद्रयान मिशनों के बारे में:

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अपने चंद्रयान कार्यक्रम के तहत लगातार चंद्र अन्वेषण में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।

         चंद्रयान-1 (2008): इस मिशन ने चंद्र सतह पर जल के अणुओं और हाइड्रॉक्सिल की खोज कर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।

         चंद्रयान-2 (2019): इसका उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग और रोवर का संचालन था। ऑर्बिटर सफल रहा, लेकिन लैंडर और रोवर लैंडिंग के प्रयास के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गए।

         चंद्रयान-3 (2023): इसका लक्ष्य सुरक्षित और सॉफ्ट लैंडिंग करना तथा चंद्रमा की सतह पर रोवर संचालित करना था। इसने सफलतापूर्वक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर ऐतिहासिक सॉफ्ट लैंडिंग की, जिससे भारत ऐसा करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया।

o   विन्यास: एक लैंडर (विक्रम) और एक रोवर (प्रज्ञान)।

         चंद्रयान-4 (नियोजित):

o   उद्देश्य:

§  चंद्र सतह पर सुरक्षित लैंडिंग

§  चंद्रमा से नमूना एकत्र करना

§  चंद्र सतह से प्रस्थान (Ascent)

§  चंद्र कक्षा में डॉकिंग

§  नमूनों को पृथ्वी पर वापस लाना

o   अपेक्षित प्रक्षेपण: वर्ष 2027

निष्कर्ष:

चंद्रयान-5 मिशन भारत और जापान के बीच मजबूत होती अंतरिक्ष साझेदारी का सशक्त प्रमाण है। यह मिशन तकनीकी और वैज्ञानिक दोनों ही दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके सफल होने से न केवल चंद्रमा के रहस्यों को समझने में मदद मिलेगी, बल्कि यह भविष्य में मानव-केन्द्रित अंतरिक्ष अन्वेषण और दीर्घकालिक चंद्र अभियानों की दिशा में भी दूरगामी प्रभाव डालेगा।

 

 

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