CGSMFI-2.0: भारत में माइक्रोफाइनेंस के लिए क्रेडिट गारंटी योजना
संदर्भ:
हाल ही में भारत सरकार ने सूक्ष्म वित्त संस्थानों के लिए ऋण गारंटी योजना-2.0 (CGSMFI-2.0) शुरू की है। इस संशोधित योजना का उद्देश्य माइक्रोफाइनेंस संस्थानों (MFIs) को ऋण गारंटी कवर प्रदान कर उन्हें निम्न-आय वर्ग, विशेषकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में, बिना जमानत के ऋण उपलब्ध कराने में सक्षम बनाना है।
सूक्ष्म वित्त संस्थान (MFIs) के बारे में:
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- सूक्ष्म वित्त संस्थान (MFIs) वे वित्तीय संस्थाएं हैं जो निम्न-आय वर्ग के व्यक्तियों या समूहों को छोटे ऋण, बचत, बीमा और धन हस्तांतरण जैसी सेवाएं प्रदान करती हैं, जिन्हें पारंपरिक बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध नहीं होतीं।
- ये संस्थान विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्यमियों को सशक्त बनाते हैं, गरीबी को कम करने और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में सहायक होते हैं। ये अक्सर संयुक्त दायित्व समूह (JLG) या स्वयं सहायता समूह (SHG) मॉडल के माध्यम से कार्य करते हैं।
- हालांकि, हाल के वित्तीय दबावों के कारण बैंकों ने MFIs को ऋण देने में सावधानी बरतनी शुरू कर दी है, विशेषकर छोटे MFIs के प्रति, जिससे ऋण प्रवाह में कमी आई है। CGSMFI-2.0 इसी समस्या का समाधान करने के लिए एक संरचित जोखिम-साझाकरण तंत्र के माध्यम से बैंकों को प्रोत्साहित करता है।
- सूक्ष्म वित्त संस्थान (MFIs) वे वित्तीय संस्थाएं हैं जो निम्न-आय वर्ग के व्यक्तियों या समूहों को छोटे ऋण, बचत, बीमा और धन हस्तांतरण जैसी सेवाएं प्रदान करती हैं, जिन्हें पारंपरिक बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध नहीं होतीं।
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CGSMFI-2.0 की प्रमुख विशेषताएं:
1. ऋण गारंटी तंत्र:
यह योजना बैंकों/वित्तीय संस्थानों को NBFC-MFIs/MFIs को दिए गए ऋणों पर संभावित हानि के विरुद्ध गारंटी कवर प्रदान करती है, ताकि वे आगे ऋण वितरित कर सकें।
यह गारंटी नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (NCGTC) के माध्यम से दी जाती है।
2. पात्र उधारकर्ता:
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की परिभाषा के अनुसार मौजूदा या नए छोटे उधारकर्ता।
3. गारंटी कवरेज:
छोटे MFIs के लिए: 80%
मध्यम MFIs के लिए: 75%
बड़े MFIs के लिए: 70%
4. गारंटी शुल्क:
पहले वर्ष: स्वीकृत राशि का 0.50% प्रति वर्ष
उसके बाद: बकाया राशि पर लागू
5. वैधता:
यह योजना 30 जून 2026 तक या ₹20,000 करोड़ की गारंटी सीमा पूरी होने तक (जो पहले हो) लागू रहेगी।
उद्देश्य:
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- माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र में ऋण प्रवाह बढ़ाना
- NBFC-MFIs और छोटे MFIs को वित्तीय सहायता देना
- निम्न-आय वर्ग के लिए सस्ती ऋण उपलब्धता बढ़ाना
- वित्तीय समावेशन को सुदृढ़ करना और अनौपचारिक ऋण पर निर्भरता कम करना
- माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र में ऋण प्रवाह बढ़ाना
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महत्त्व:
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- वित्तीय समावेशन: कमजोर वर्गों को औपचारिक ऋण तक पहुंच प्रदान करता है।
- MFIs को समर्थन: छोटे MFIs को संस्थागत वित्त प्राप्त करने में मदद करता है।
- महिला सशक्तिकरण: माइक्रोफाइनेंस के अधिकांश लाभार्थी महिलाएं होती हैं, जिससे उनकी आर्थिक भागीदारी बढ़ती है।
- आर्थिक विकास: ग्रामीण आजीविका, स्वरोजगार और सूक्ष्म उद्यमों को बढ़ावा मिलता है।
- जोखिम न्यूनीकरण: ऋणदाताओं को कम जोखिम के साथ MFIs क्षेत्र में पुनः निवेश के लिए प्रेरित करता है।
- वित्तीय समावेशन: कमजोर वर्गों को औपचारिक ऋण तक पहुंच प्रदान करता है।
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प्रभाव:
इस योजना से माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र में तरलता में सुधार होने की उम्मीद है और NBFC-MFIs/MFIs लगभग 36 लाख छोटे उधारकर्ताओं को ऋण प्रदान कर सकेंगे, जिससे जमीनी स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी।
निष्कर्ष:
CGSMFI-2.0 माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र को पुनर्जीवित और सशक्त बनाने की दिशा में एक लक्षित पहल है। यह योजना ऋण गारंटी तंत्र के माध्यम से वित्तीय बाधाओं को दूर कर वित्तीय समावेशन को गहरा करने और समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, बशर्ते इसका प्रभावी क्रियान्वयन और उचित निगरानी सुनिश्चित की जाए।

