संदर्भ:
हाल ही में, भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In) ने 4 नवंबर 2026 को अपने AI सुरक्षा ऑडिट दिशानिर्देश (AI Security Auditing Guidelines) जारी किए। इन दिशानिर्देशों के माध्यम से एजेंटिक AI सहित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रणालियों के सुरक्षित, जवाबदेह और जोखिम-आधारित ऑडिट के लिए एक रूपरेखा स्थापित की गई है। इनका उद्देश्य स्वायत्त AI प्रणालियों से उत्पन्न होने वाले उभरते साइबर सुरक्षा खतरों का समाधान करना तथा भारत के डिजिटल सुरक्षा ढाँचे को मजबूत बनाना है।
एजेंटिक AI क्या है?
एजेंटिक AI से तात्पर्य ऐसी कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रणालियों से है, जो सीमित मानवीय हस्तक्षेप के साथ स्वतंत्र रूप से योजना बनाने, निर्णय लेने और कई चरणों वाले कार्यों को पूरा करने में सक्षम होती हैं।
पारंपरिक जनरेटिव AI मुख्य रूप से टेक्स्ट, चित्र या अन्य सामग्री तैयार करता है, जबकि एजेंटिक AI बाहरी एप्लिकेशन के साथ संवाद कर सकता है, डेटाबेस तक पहुँच बना सकता है, डिजिटल उपकरणों का उपयोग कर सकता है तथा उपयोगकर्ताओं की ओर से विभिन्न कार्य कर सकता है। हालाँकि, अत्यधिक स्वायत्तता के कारण अनधिकृत पहुँच, डेटा लीक और साइबर हमलों जैसे जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं।
CERT-In क्या है?
CERT-In का पूरा नाम भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (Indian Computer Emergency Response Team) है। यह इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अंतर्गत कार्य करता है तथा साइबर सुरक्षा संबंधी घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने वाली भारत की राष्ट्रीय नोडल एजेंसी है।
इसे सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 70B से वैधानिक अधिकार प्राप्त हैं। इसके प्रमुख कार्यों में साइबर खतरों की निगरानी करना, सुरक्षा संबंधी परामर्श जारी करना, साइबर हमलों के प्रति प्रतिक्रिया का समन्वय करना तथा साइबर सुरक्षा तैयारियों को मजबूत बनाना शामिल है।
दिशानिर्देशों के प्रमुख प्रावधान:
इन दिशानिर्देशों में AI प्रणालियों को उनकी स्वायत्तता और संभावित प्रभाव के आधार पर चार स्तरों में वर्गीकृत किया गया है:
· निम्न जोखिम (Low Risk)
· मध्यम जोखिम (Moderate Risk)
· उच्च जोखिम (High Risk)
· गंभीर जोखिम (Critical Risk)
इनमें जोखिम-आधारित सुरक्षा ऑडिट, उच्च जोखिम वाली प्रणालियों के लिए स्वतंत्र मूल्यांकन तथा गंभीर जोखिम वाली प्रणालियों की निरंतर निगरानी की सिफारिश की गई है।
AI से संबंधित रिपोर्ट करने योग्य साइबर सुरक्षा घटनाओं की सूचना छह घंटे के भीतर देना अनिवार्य किया गया है, जबकि सुरक्षा लॉग (Security Logs) को कम-से-कम 180 दिनों तक सुरक्षित रखना होगा।
यह रूपरेखा मानवीय निगरानी, जवाबदेही और AI बिल ऑफ मैटेरियल्स (AI-BOM) के रखरखाव को भी बढ़ावा देती है। AI-BOM के अंतर्गत उपयोग किए गए मॉडल, डेटासेट, उपकरणों और सॉफ्टवेयर घटकों का दस्तावेजीकरण किया जाता है।
इसके अतिरिक्त, प्रॉम्प्ट इंजेक्शन (Prompt Injection), अत्यधिक अनुमतियों और उपकरणों के अनधिकृत उपयोग से निपटने के लिए विशेष सुरक्षा उपायों की व्यवस्था की गई है।
भारत के लिए महत्त्व:
ये दिशानिर्देश भारत की साइबर सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने, महत्त्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा करने तथा डेटा उल्लंघन (Data Breaches) के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकते हैं।
ये जिम्मेदार AI विकास को बढ़ावा देने, पारदर्शिता एवं जवाबदेही में सुधार करने तथा डिजिटल शासन में जनता का विश्वास बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ये दिशानिर्देश विशेष रूप से बैंकिंग, स्वास्थ्य सेवा, दूरसंचार और सरकारी डिजिटल सेवाओं के लिए प्रासंगिक हैं। इसके अतिरिक्त, ये भारत को एक विश्वसनीय वैश्विक AI केंद्र (Global AI Hub) बनाने की महत्त्वाकांक्षा को भी समर्थन प्रदान करते हैं।
चुनौतियाँ:
प्रमुख चुनौतियों में अनुपालन की उच्च लागत, प्रौद्योगिकी में तेजी से होने वाले बदलाव, निजता संबंधी चिंताएँ, कुशल साइबर सुरक्षा पेशेवरों की कमी तथा स्वायत्त AI द्वारा लिए गए निर्णयों के लिए जवाबदेही निर्धारित करने में कठिनाई शामिल हैं।
आगे की राह:
भारत को नियमित सुरक्षा ऑडिट, प्राइवेसी-बाय-डिजाइन (Privacy-by-Design), ह्यूमन-इन-द-लूप (Human-in-the-Loop) तंत्र, स्वदेशी साइबर सुरक्षा प्रौद्योगिकियों तथा न्यूनतम विशेषाधिकार के सिद्धांत (Principle of Least Privilege) को बढ़ावा देना चाहिए। इसके तहत AI एजेंटों को केवल उतनी ही पहुँच प्रदान की जानी चाहिए, जितनी किसी कार्य को पूरा करने के लिए आवश्यक हो।
निष्कर्ष:
CERT-In के ये दिशानिर्देश एक सुरक्षित और विश्वसनीय AI पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में महत्त्वपूर्ण कदम हैं। जिम्मेदार AI और सुरक्षित डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भारत को तकनीकी नवाचार के साथ साइबर सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही के बीच संतुलन स्थापित करना होगा।
