होम > Blog

Blog / 06 Jan 2026

स्टार्टअप्स के लिए फंडिंग नियमों में छूट

संदर्भ:

हाल ही में भारत सरकार ने डीप टेक स्टार्टअप्स को वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) के माध्यम से वित्तीय सहायता प्राप्त करने हेतु पात्रता मानकों में ढील प्रदान की है।

पृष्ठभूमि:

      • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन कार्यरत वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) औद्योगिक अनुसंधान एवं विकास प्रोत्साहन कार्यक्रम के तहत पात्र स्टार्टअप्स को ₹1 करोड़ तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराता है। पूर्व में इस सहायता के लिए यह अनिवार्य था कि स्टार्टअप कम से कम तीन वर्षों तक अपनी वित्तीय स्थिरता और व्यावसायिक व्यवहार्यता सिद्ध करे। इस शर्त के कारण अनेक शुरुआती चरण के डीप टेक स्टार्टअप्स इस महत्वपूर्ण सहायता से वंचित रह जाते थे।
      • डीप टेक स्टार्टअप्स (जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी, उन्नत सामग्री तथा स्वच्छ प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में कार्यरत होते हैं) को प्रायः बाज़ार में उतरने से पहले लंबी शोध एवं विकास प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। परिणामस्वरूप, पहले के कठोर नियम कई नवोन्मेषी स्टार्टअप्स को उनके प्रारंभिक और निर्णायक चरण में ही अवसर से बाहर कर देते थे।

मुख्य नीतिगत बदलाव:

घोषित सुधार का सबसे अहम पक्ष डीएसआईआर से वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए निर्धारित तीन वर्ष की अनिवार्य अवधि की शर्त को समाप्त करना है। संशोधित प्रावधानों के अंतर्गत:

      • अब स्टार्टअप्स को पात्रता के लिए कम से कम तीन वर्षों का संचालन अनुभव प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं होगा।
      • योग्य डीप टेक स्टार्टअप्स को पूर्व की भांति ₹1 करोड़ तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती रहेगी।
      • स्टार्टअप्स का आकलन अब उनके तकनीकी परिपक्वता स्तर और नवाचार की संभावनाओं के आधार पर किया जाएगा, न कि केवल उनके अस्तित्व की अवधि के आधार पर।

इस कदम का महत्व:

      • नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना: तीन वर्ष की कठोर पात्रता शर्त समाप्त होने से शुरुआती चरण के डीप टेक स्टार्टअप्स के लिए प्रवेश बाधाएँ कम होंगी। इससे उन्हें शोध, विकास और व्यावसायीकरण के लिए आवश्यक प्रारंभिक वित्तीय सहायता समय पर उपलब्ध हो सकेगी।
      • अन्य सहायता योजनाओं के साथ समन्वय: यह सुधार ₹1 लाख करोड़ के अनुसंधान, विकास एवं नवाचार कोष का पूरक है, जो मुख्यतः उन्नत तकनीकी स्तर वाले स्टार्टअप्स को समर्थन प्रदान करता है, जबकि यह पहल नए और प्रारंभिक चरण के नवोन्मेषकों की आवश्यकताओं को संबोधित करती है।
      • विविध और व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहन: फंडिंग तक आसान पहुँच से पहली बार उद्यम शुरू करने वाले उद्यमियों, शैक्षणिक संस्थानों से निकले स्टार्टअप्स तथा उच्च जोखिमउच्च प्रतिफल वाले नवोन्मेषकों की भागीदारी बढ़ने की संभावना है, जो पहले लंबी अवधि की पात्रता शर्तों को पूरा नहीं कर पाते थे।

निष्कर्ष:

डीएसआईआर फंडिंग नियमों में ढील देने का केंद्र सरकार का निर्णय डीप टेक क्षेत्र में शुरुआती चरण के नवाचार को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण नीतिगत पहल है। तीन वर्ष की व्यवहार्यता संबंधी अनिवार्यता हटने से स्टार्टअप्स को अपेक्षाकृत प्रारंभिक अवस्था में ही आवश्यक वित्तीय सहायता प्राप्त हो सकेगी, जिससे शोध, विकास और व्यावसायीकरण की प्रक्रिया में तेजी आएगी। यह कदम वैश्विक नवाचार परिदृश्य में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को सुदृढ़ करने और तकनीक आधारित उद्यमिता के लिए एक मजबूत तथा अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।