होम > Blog

Blog / 13 Mar 2026

CE20 क्रायोजेनिक इंजन

संदर्भ:

हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने तमिलनाडु के महेंद्रगिरि स्थित इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स में CE20 क्रायोजेनिक इंजन का समुद्र-स्तरीय हॉट टेस्ट सफलतापूर्वक संपन्न किया। यह इंजन 165 सेकंड तक संचालित हुआ और लगभग 22 टन का थ्रस्ट उत्पन्न किया, जिससे भारत के भारी प्रक्षेपण यानों की क्षमता में सुधार प्रदर्शित हुआ।

CE20 क्रायोजेनिक इंजन:

      • CE20 भारत का सबसे शक्तिशाली स्वदेशी क्रायोजेनिक रॉकेट इंजन है।
      • यह LVM3 प्रक्षेपण यान के ऊपरी क्रायोजेनिक चरण को शक्ति प्रदान करता है।
      • यह इंजन तरल हाइड्रोजन और तरल ऑक्सीजन को प्रणोदक (propellants) के रूप में उपयोग करता है।
      • यह उपग्रहों या अंतरिक्ष यानों को कक्षा में स्थापित करने के लिए आवश्यक अंतिम थ्रस्ट प्रदान करता है।

परीक्षण का महत्व:

      • LVM3 रॉकेट की क्षमता में वृद्धि: इस उन्नत इंजन से LVM3 भारी प्रक्षेपण यान की पेलोड क्षमता में वृद्धि होगी, जिससे भारत भारी उपग्रहों का प्रक्षेपण कर सकेगा तथा अधिक महत्वाकांक्षी गहरे अंतरिक्ष मिशनों को संभव बना सकेगा।
      • गगनयान मिशन को बढ़ावा: CE20 इंजन LVM3 के ऊपरी चरण को शक्ति देता है, जिसे भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान के लिए प्रक्षेपण यान के रूप में चुना गया है।
      • स्वदेशी क्रायोजेनिक प्रौद्योगिकी को सुदृढ़ करना: क्रायोजेनिक इंजन रॉकेट प्रौद्योगिकी की सबसे जटिल तकनीकों में से एक हैं। इस सफल परीक्षण से उन्नत अंतरिक्ष प्रणोदन प्रणालियों में भारत की आत्मनिर्भरता और अधिक मजबूत होगी।

भविष्य के अंतरिक्ष मिशन:

अधिक थ्रस्ट वाले इंजन निम्नलिखित मिशनों को समर्थन देंगे

      • भारी उपग्रहों का प्रक्षेपण
      • अंतरग्रहीय मिशन
      • मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम

LVM3 रॉकेट के बारे में:

लॉन्च व्हीकल मार्क–3 (LVM3), जिसे पहले GSLV Mk-III कहा जाता था, इसरो द्वारा विकसित भारत का सबसे भारी परिचालन प्रक्षेपण यान है।

मुख्य विशेषताएँ:

      • तीन-चरणीय रॉकेट (दो ठोस बूस्टर, तरल कोर चरण और क्रायोजेनिक ऊपरी चरण)
      • पेलोड क्षमता:
        • लगभग 10,000 किलोग्राम - निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO)
        • लगभग 4,200 किलोग्राम - भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा (GTO)
      • इस रॉकेट के क्रायोजेनिक तृतीय चरण (C25) को CE20 इंजन शक्ति प्रदान करता है, जो उपग्रहों या अंतरिक्ष यानों को कक्षा में स्थापित करने के लिए आवश्यक अंतिम थ्रस्ट प्रदान करता है।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO):

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) भारत की राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी है, जिसकी स्थापना 1969 में हुई थी और यह अंतरिक्ष विभाग के अंतर्गत कार्य करती है। इसका मुख्यालय बेंगलुरु, कर्नाटक में स्थित है।

मुख्य विशेषताएँ:

      • अंतरिक्ष अन्वेषण, उपग्रह प्रक्षेपण और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी विकास के लिए जिम्मेदार
      • कम लागत वाले मिशनों के लिए प्रसिद्ध, जैसे चंद्रयान-1, चंद्रयान-3 तथा मार्स ऑर्बिटर मिशन
      • प्रमुख प्रक्षेपण यान संचालित करता है, जैसे PSLV, GSLV और LVM3

निष्कर्ष:

22 टन थ्रस्ट उत्पन्न करने वाले CE20 क्रायोजेनिक इंजन का सफल ग्राउंड टेस्ट भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। LVM3 रॉकेट की क्षमता में वृद्धि के साथ यह परीक्षण भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान, भारी उपग्रह प्रक्षेपण और गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण की महत्वाकांक्षाओं को और मजबूत करेगा।