संदर्भ:
हाल ही में, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने घोषणा की है कि मतुआ समुदाय के लगभग 2.5 लाख पात्र सदस्यों को वर्ष 2026 के अंत तक नागरिकता संशोधन अधिनियम (Citizenship Amendment Act-CAA), 2019 के तहत नागरिकता प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे।
पृष्ठभूमि:
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- मतुआ समुदाय एक हिंदू धार्मिक एवं सामाजिक सुधार समुदाय है, जिसकी पश्चिम बंगाल में बड़ी आबादी है। इसकी उत्पत्ति 19वीं शताब्दी में हरिचंद ठाकुर और गुरुचंद ठाकुर से जुड़ी हुई है।
- इस समुदाय के कई सदस्य धार्मिक उत्पीड़न, सामाजिक भेदभाव और राजनीतिक अस्थिरता के कारण तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) से भारत आए थे। परिणामस्वरूप, समुदाय के कुछ वर्गों के लिए नागरिकता और कानूनी मान्यता महत्त्वपूर्ण चिंताएँ बनी हुई हैं।
- मतुआ समुदाय एक हिंदू धार्मिक एवं सामाजिक सुधार समुदाय है, जिसकी पश्चिम बंगाल में बड़ी आबादी है। इसकी उत्पत्ति 19वीं शताब्दी में हरिचंद ठाकुर और गुरुचंद ठाकुर से जुड़ी हुई है।
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नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), 2019 के बारे में:
नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 ने नागरिकता अधिनियम, 1955 में संशोधन किया। इसके तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए पात्र हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैनियों, पारसियों और ईसाइयों को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने का एक सरल एवं त्वरित मार्ग प्रदान किया गया है, बशर्ते वे 31 दिसंबर 2014 या उससे पहले भारत में प्रवेश कर चुके हों।
प्रमुख प्रावधान:
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- पात्र प्रवासियों के लिए नागरिकता प्राप्त करने हेतु प्राकृतिककरण (Naturalisation) की निवास अवधि को 11 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष करना।
- अवैध प्रवासियों से संबंधित कुछ निर्दिष्ट प्रावधानों से छूट प्रदान करना।
- यह स्वतः नागरिकता प्रदान नहीं करता है; पात्र आवेदकों को इसके लिए आवेदन करना आवश्यक है।
- CAA के नियमों को मार्च 2024 में अधिसूचित किया गया था।
- पात्र प्रवासियों के लिए नागरिकता प्राप्त करने हेतु प्राकृतिककरण (Naturalisation) की निवास अवधि को 11 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष करना।
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नागरिकता से संबंधित संवैधानिक प्रावधान:
भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5–11) में नागरिकता से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। अनुच्छेद 5 संविधान लागू होने के समय नागरिकता से संबंधित है; अनुच्छेद 6 पाकिस्तान से भारत आए प्रवासियों की नागरिकता से संबंधित है; अनुच्छेद 7 पाकिस्तान में प्रवास करने वाले व्यक्तियों से संबंधित है; अनुच्छेद 8 विदेशों में रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों की नागरिकता से संबंधित है; अनुच्छेद 9 स्वेच्छा से विदेशी नागरिकता प्राप्त करने से संबंधित है; जबकि अनुच्छेद 10 नागरिकता की निरंतरता का प्रावधान करता है। महत्त्वपूर्ण रूप से, अनुच्छेद 11 संसद को कानून बनाकर नागरिकता को विनियमित करने का अधिकार देता है, जिसके तहत नागरिकता अधिनियम, 1955 बनाया गया था।
प्रमुख चुनौतियाँ:
CAA के क्रियान्वयन से समानता और गैर-भेदभाव से संबंधित चिंताएँ उत्पन्न होती हैं। इसके अतिरिक्त, प्रवासी परिवारों के सामने आवश्यक दस्तावेजों की कमी, प्रशासनिक देरी तथा केंद्र और राज्य प्राधिकरणों के बीच प्रभावी समन्वय जैसी चुनौतियाँ भी हैं। इसके अलावा, नागरिकता प्राप्त करने से स्वतः मतदाता पंजीकरण या अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा प्राप्त होने की गारंटी नहीं मिलती है।
आगे की राह:
सरकार को आवेदनों के पारदर्शी एवं समयबद्ध निपटान को सुनिश्चित करना चाहिए, पात्र प्रवासियों को कानूनी और प्रशासनिक सहायता प्रदान करनी चाहिए तथा विभिन्न प्राधिकरणों के बीच समन्वय को मजबूत करना चाहिए। नागरिकता से संबंधित निर्णय उचित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होने चाहिए तथा समानता, गरिमा और बंधुत्व के संवैधानिक सिद्धांतों को बनाए रखना चाहिए।
निष्कर्ष:
मतुआ समुदाय की नागरिकता का मुद्दा प्रवासन, पहचान, सामाजिक न्याय और संवैधानिक शासन के बीच संबंधों को उजागर करता है। CAA का प्रभावी क्रियान्वयन करते समय अनुच्छेद 11 के तहत संसद के अधिकार और अनुच्छेद 14 के तहत समानता तथा अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा के संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
