सन्दर्भ:
हाल ही में, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने घोषणा की कि पहला “मेड इन इंडिया” C-295 सैन्य परिवहन विमान गुजरात के वडोदरा स्थित एयरबस–टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) की अंतिम असेम्बली लाइन से सितंबर 2026 से पहले रोल-आउट किया जाएगा।
C-295 विमान के बारे में:
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- एयरबस C-295 एक मध्यम दूरी का, ट्विन-इंजन टर्बोप्रॉप सामरिक परिवहन विमान है, जिसे मूल रूप से स्पेन की CASA (अब एयरबस डिफेंस एंड स्पेस का हिस्सा) ने डिजाइन किया था। यह बहु-भूमिकाओं में सक्षम है, जैसे सैनिकों और कार्गो का परिवहन, पैराड्रॉपिंग, मेडिकल इवैक्यूएशन और लॉजिस्टिक सपोर्ट और विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों तथा अलग-अलग रनवे स्थितियों में प्रभावी प्रदर्शन करता है।
- भारत ने 2021 में एयरबस डिफेंस एंड स्पेस के साथ ₹21,935 करोड़ का अनुबंध 56 C-295 विमानों के लिए किया था, जिसका उद्देश्य भारतीय वायुसेना के पुराने एवरो-748 बेड़े को प्रतिस्थापित करना है।
- एयरबस C-295 एक मध्यम दूरी का, ट्विन-इंजन टर्बोप्रॉप सामरिक परिवहन विमान है, जिसे मूल रूप से स्पेन की CASA (अब एयरबस डिफेंस एंड स्पेस का हिस्सा) ने डिजाइन किया था। यह बहु-भूमिकाओं में सक्षम है, जैसे सैनिकों और कार्गो का परिवहन, पैराड्रॉपिंग, मेडिकल इवैक्यूएशन और लॉजिस्टिक सपोर्ट और विभिन्न पर्यावरणीय परिस्थितियों तथा अलग-अलग रनवे स्थितियों में प्रभावी प्रदर्शन करता है।
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मेक इन इंडिया और उत्पादन योजना:
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- समझौते के तहत पहले 16 C-295 विमान 2023–25 के दौरान स्पेन के सेविले स्थित एयरबस संयंत्र से “फ्लाइ-अवे” स्थिति में वितरित किए गए।
- शेष 40 विमानों का निर्माण और असेम्बली भारत में TASL द्वारा संयुक्त औद्योगिक साझेदारी के तहत की जाएगी।
- वडोदरा में स्थित फाइनल असेम्बली लाइन (FAL), जिसका उद्घाटन अक्टूबर 2024 में हुआ, भारत के निजी क्षेत्र में सैन्य विमानों के लिए अपनी तरह की पहली सुविधा है, जो रक्षा औद्योगिक आधार में एक बड़े बदलाव को दर्शाती है।
- समझौते के तहत पहले 16 C-295 विमान 2023–25 के दौरान स्पेन के सेविले स्थित एयरबस संयंत्र से “फ्लाइ-अवे” स्थिति में वितरित किए गए।
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रणनीतिक और औद्योगिक महत्व:
भारत में निर्मित पहले C-295 के रोल-आउट का बहुआयामी महत्व है-
रक्षा क्षमता और आधुनिकीकरण
• भारतीय वायुसेना की सामरिक एयरलिफ्ट क्षमता को सुदृढ़ करता है, जो सैनिकों की आवाजाही, लॉजिस्टिक्स और मानवीय अभियानों के लिए आवश्यक है।
• पुराने एवरो-748 बेड़े को एक आधुनिक और बहुपयोगी परिवहन प्लेटफॉर्म से प्रतिस्थापित करता है।
स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा
• ‘मेक इन इंडिया’ की दिशा में एक बड़ा कदम, जो घरेलू एयरोस्पेस इकोसिस्टम का विस्तार करता है।
• भारत में महत्वपूर्ण संरचनात्मक घटकों और प्रमुख उप-असेंबलियों का उत्पादन, जिससे भारतीय आपूर्तिकर्ताओं का वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एकीकरण होता है।
कौशल और औद्योगिक इकोसिस्टम का विकास
• असेम्बली लाइन और संबद्ध आपूर्ति श्रृंखला एयरोस्पेस विनिर्माण में कुशल रोजगार और क्षमता निर्माण को समर्थन देती है।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग
• साझा रणनीतिक हितों और द्विपक्षीय संबंधों पर आधारित भारत और स्पेन के बीच बढ़ते रक्षा औद्योगिक सहयोग को दर्शाता है।
आर्थिक और भू-राजनीतिक प्रभाव:
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- आर्थिक प्रभाव: यह कार्यक्रम घरेलू एमएसएमई भागीदारी को प्रोत्साहित करेगा, औद्योगिक क्षमताओं को गहराई देगा और भविष्य में एयरोस्पेस निर्यात को समर्थन दे सकता है।
- भू-रणनीतिक स्थिति: स्वदेशी रक्षा विनिर्माण आयात निर्भरता को कम करता है, रणनीतिक स्वायत्तता बढ़ाता है और भारत को वैश्विक स्तर पर एक विश्वसनीय रक्षा उत्पादन केंद्र के रूप में सुदृढ़ करता है।
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निष्कर्ष:
भारत के पहले मेड-इन-इंडिया C-295 विमान का आगामी रोल-आउट रक्षा विनिर्माण और आत्मनिर्भरता में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह ‘मेक इन इंडिया’ के अंतर्गत रणनीतिक साझेदारी, औद्योगिक क्षमता और राष्ट्रीय नीति लक्ष्यों के समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत करता है। 2031 तक पूर्ण परिचालन की दिशा में बढ़ते इस प्रोजेक्ट से भारत की रक्षा तैयारी मजबूत होगी और एयरोस्पेस औद्योगिक आधार का विस्तार होगा।
