चर्चा में क्यों?
हाल ही में केंद्र सरकार ने औषधि नियम, 1945 (Drugs Rules, 1945) में संशोधन करते हुए स्टेम सेल-व्युत्पन्न (Stem Cell-Derived) उत्पादों, जीन चिकित्सीय (Gene Therapeutic) उत्पादों तथा ज़ेनोग्राफ्ट (Xenografts) को केंद्रीय लाइसेंस अनुमोदन प्राधिकरण (Centrally Licensed Approving Authority-CLAA) के दायरे में शामिल कर लिया है। इस संशोधन का उद्देश्य उन्नत जैविक उपचारों (Advanced Biological Therapies) पर नियामकीय निगरानी को मजबूत करना, रोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा भारत में उभरती चिकित्सा प्रौद्योगिकियों को जिम्मेदारीपूर्वक अपनाने को बढ़ावा देना है।
केंद्रीय लाइसेंस अनुमोदन प्राधिकरण (CLAA) क्या है?
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- केंद्रीय लाइसेंस अनुमोदन प्राधिकरण (CLAA), औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 (Drugs and Cosmetics Act, 1940) तथा औषधि नियम, 1945 के अंतर्गत स्थापित एक नियामकीय व्यवस्था है।
- यह केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (Central Drugs Standard Control Organisation-CDSCO) तथा राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरणों (State Licensing Authorities) के संयुक्त नियामकीय पर्यवेक्षण के माध्यम से उन औषधियों एवं जैविक उत्पादों का विनियमन करता है, जिनके लिए उच्च गुणवत्ता एवं सुरक्षा मानकों की आवश्यकता होती है।
- पूर्व में टीके (Vaccines), रिकॉम्बिनेंट डीएनए (r-DNA) आधारित औषधियाँ तथा बड़े आयतन वाले पैरेंटरल (Large-Volume Parenterals) उत्पाद CLAA के अंतर्गत आते थे। नवीन संशोधन के माध्यम से इस ढांचे का विस्तार करते हुए उन्नत चिकित्सा पद्धतियों को भी इसमें शामिल किया गया है।
- केंद्रीय लाइसेंस अनुमोदन प्राधिकरण (CLAA), औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 (Drugs and Cosmetics Act, 1940) तथा औषधि नियम, 1945 के अंतर्गत स्थापित एक नियामकीय व्यवस्था है।
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संशोधन के अंतर्गत शामिल प्रमुख उभरती चिकित्सा पद्धतियाँ:
संशोधन के तहत निम्नलिखित तीन श्रेणियों के उन्नत जैविक उत्पादों को शामिल किया गया है:
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- स्टेम सेल-व्युत्पन्न उत्पाद (Stem Cell-Derived Products): ये उपचार स्टेम कोशिकाओं का उपयोग करके क्षतिग्रस्त ऊतकों (Tissues) की मरम्मत या उनके स्थान पर नए ऊतक विकसित करने में सहायक होते हैं। इनका उपयोग पुनर्योजी चिकित्सा (Regenerative Medicine) तथा रक्त संबंधी विकारों के उपचार में किया जाता है।
- जीन चिकित्सीय उत्पाद (Gene Therapeutic Products): इन उपचारों में दोषपूर्ण जीनों को संशोधित या प्रतिस्थापित कर वंशानुगत (Inherited) रोगों, कैंसर तथा दुर्लभ आनुवंशिक बीमारियों का उपचार किया जाता है।
- ज़ेनोग्राफ्ट (Xenografts): ये पशुओं के ऊतकों से प्राप्त उत्पाद होते हैं, जैसे सूअर (Pig) के हृदय वाल्व तथा त्वचा प्रत्यारोपण (Skin Grafts), जिनका उपयोग हृदय रोग (Cardiology) तथा पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा (Reconstructive Surgery) में किया जाता है।
- स्टेम सेल-व्युत्पन्न उत्पाद (Stem Cell-Derived Products): ये उपचार स्टेम कोशिकाओं का उपयोग करके क्षतिग्रस्त ऊतकों (Tissues) की मरम्मत या उनके स्थान पर नए ऊतक विकसित करने में सहायक होते हैं। इनका उपयोग पुनर्योजी चिकित्सा (Regenerative Medicine) तथा रक्त संबंधी विकारों के उपचार में किया जाता है।
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सुदृढ़ नियमन की आवश्यकता:
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- कोशिका (Cell) एवं जीन आधारित उपचारों में जीवित कोशिकाओं, आनुवंशिक संशोधन तथा अत्यधिक विशिष्ट विनिर्माण प्रक्रियाओं का उपयोग किया जाता है। इन तकनीकों से प्रतिरक्षा संबंधी प्रतिक्रियाएँ (Immune Reactions), अनपेक्षित आनुवंशिक परिवर्तन तथा दीर्घकालिक सुरक्षा संबंधी जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं।
- ऐसी स्थिति में CLAA के अंतर्गत केंद्रीकृत नियामकीय निगरानी से वैज्ञानिक मूल्यांकन, गुणवत्ता आश्वासन तथा रोगी सुरक्षा के लिए एक समान मानक सुनिश्चित होंगे। साथ ही, यह नवाचार को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ भारत में विकसित स्वदेशी उपचारों, जैसे काइमेरिक एंटीजन रिसेप्टर टी-सेल (Chimeric Antigen Receptor T-cell-CAR-T) थेरेपी, के विकास को भी बढ़ावा देगा, जो रक्त कैंसर के उपचार में अत्यंत आशाजनक मानी जाती है।
- कोशिका (Cell) एवं जीन आधारित उपचारों में जीवित कोशिकाओं, आनुवंशिक संशोधन तथा अत्यधिक विशिष्ट विनिर्माण प्रक्रियाओं का उपयोग किया जाता है। इन तकनीकों से प्रतिरक्षा संबंधी प्रतिक्रियाएँ (Immune Reactions), अनपेक्षित आनुवंशिक परिवर्तन तथा दीर्घकालिक सुरक्षा संबंधी जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं।
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भारत में नियामकीय ढांचा:
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- औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 भारत में औषधियों, प्रसाधन सामग्री तथा चिकित्सा उपकरणों के आयात, निर्माण, वितरण एवं बिक्री को विनियमित करने वाला प्रमुख कानून है।
- वहीं, औषधि नियम, 1945 लाइसेंसिंग प्रक्रिया, विनिर्माण मानकों तथा औषधियों से संबंधित विभिन्न अनुसूचियों (Schedules) का प्रावधान करते हैं।
- केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) देश का राष्ट्रीय औषधि नियामक प्राधिकरण है, जबकि औषधि तकनीकी सलाहकार बोर्ड (Drugs Technical Advisory Board-DTAB) तथा औषधि परामर्श समिति (Drugs Consultative Committee-DCC) तकनीकी मार्गदर्शन एवं समन्वय प्रदान करते हैं।
- भारत में स्टेम सेल अनुसंधान का संचालन भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) द्वारा संयुक्त रूप से जारी स्टेम सेल अनुसंधान हेतु राष्ट्रीय दिशा-निर्देश (National Guidelines for Stem Cell Research) के अनुसार किया जाता है।
- औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 भारत में औषधियों, प्रसाधन सामग्री तथा चिकित्सा उपकरणों के आयात, निर्माण, वितरण एवं बिक्री को विनियमित करने वाला प्रमुख कानून है।
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महत्त्व:
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- यह संशोधन भारत के जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से उन्नत उपचारों के लिए मजबूत नियामकीय व्यवस्था सुनिश्चित होगी, साथ ही अनुसंधान एवं नवाचार को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
- इसके अतिरिक्त, यह जनविश्वास बढ़ाने, भारत के नियामकीय ढांचे को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाने तथा किफायती स्वदेशी उपचारों के विकास को बढ़ावा देने में सहायक होगा।
- यह संशोधन भारत के जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। इसके माध्यम से उन्नत उपचारों के लिए मजबूत नियामकीय व्यवस्था सुनिश्चित होगी, साथ ही अनुसंधान एवं नवाचार को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
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निष्कर्ष:
पुनर्योजी चिकित्सा (Regenerative Medicine) एवं जीन चिकित्सा (Gene Therapy) की अपार संभावनाओं का सुरक्षित एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए नियामकीय क्षमता को मजबूत करना, नैतिक क्लीनिकल अनुसंधान को बढ़ावा देना तथा उन्नत उपचारों तक व्यापक पहुंच उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक होगा। इससे रोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए भारत में उभरती जैव-चिकित्सा प्रौद्योगिकियों के सतत विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।
