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Blog / 05 Jun 2026

ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम: भारत की सुपरसोनिक रक्षा शक्ति

संदर्भ:

हाल ही में वियतनाम ने ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली के निर्यात के लिए भारत से एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह विकास फिलीपींस द्वारा वर्ष 2022 में ब्रह्मोस मिसाइलों का पहला विदेशी खरीदार बनने के बाद हुआ है, जो उच्च-स्तरीय मिसाइल प्रौद्योगिकी के रक्षा निर्यातक के रूप में भारत को दर्शाता है।

ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली के बारे में:

    • ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल है, जिसे भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है। इसका निर्माण ब्रह्मोस एयरोस्पेस द्वारा किया जाता है, जो भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और रूस की एनपीओ मशीनोस्त्रोयेनिया (NPOM) के बीच एक संयुक्त उपक्रम है।
    • ‘ब्रह्मोस’ दो नदियों- भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मॉस्कवा के नामों से मिलकर बना है, जो दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक है।
    • इस संयुक्त उपक्रम में भारत की 50.5% तथा रूस की 49.5% हिस्सेदारी है। इस मिसाइल का पहला सफल परीक्षण 12 जून 2001 को एकीकृत परीक्षण परिसर, चांदीपुर, ओडिशा से किया गया था।

ब्रह्मोस मिसाइल की प्रमुख विशेषताएँ:

सुपरसोनिक गति और सटीकता: ब्रह्मोस विश्व की सबसे तेज़ क्रूज़ मिसाइलों में से एक है, जिसकी गति लगभग मैक 2.8–3.0 है। इसकी उच्च गति शत्रु की प्रतिक्रिया अवधि को कम करती है तथा लक्ष्यभेदन की सटीकता बढ़ाती है।

द्वि-चरणीय प्रणोदन प्रणाली: ब्रह्मोस में दो-चरणीय प्रणोदन तंत्र का उपयोग किया जाता है:

    • प्रथम चरण: ठोस रॉकेट बूस्टर मिसाइल को सुपरसोनिक गति प्रदान करता है।
    • द्वितीय चरण: द्रव-ईंधन चालित रैमजेट इंजन उच्च गति पर उड़ान बनाए रखता है।

रैमजेट इंजन अग्रगामी गति से आने वाली वायु को बिना किसी घूर्णन संपीडक (Compressor) के संपीड़ित करता है, जिससे निरंतर सुपरसोनिक उड़ान संभव होती है।

क्रूज़ मिसाइल क्या है?

क्रूज़ मिसाइलें मानव रहित, जेट-चालित हथियार होती हैं, जो अपनी पूरी उड़ान के दौरान शक्ति प्राप्त करती रहती हैं। ये कम ऊँचाई पर उड़ती हैं और अत्यधिक गतिशील (Manoeuvrable) होती हैं, जिससे इनका पता लगाना कठिन होता है।

उदाहरण:

    • ब्रह्मोस (भारतरूस)
    • टॉमहॉक (अमेरिका)
    • कालीब्र (रूस)

क्रूज़ और बैलिस्टिक मिसाइलों में अंतर:

    • क्रूज़ मिसाइल: निम्न ऊँचाई पर उड़ती है, पूरी उड़ान के दौरान संचालित रहती है तथा अत्यधिक गतिशील होती है।
    • बैलिस्टिक मिसाइल: ऊँची परवलयाकार (Arched) प्रक्षेपवक्र का अनुसरण करती है और केवल प्रारंभिक चरण में संचालित होती है।

उदाहरण: अग्नि एवं पृथ्वी मिसाइल श्रृंखला।

संचालन क्षमता एवं प्रकार:

ब्रह्मोस एक "फायर एंड फॉरगेट" स्टैंड-ऑफ हथियार है, अर्थात इसे सुरक्षित दूरी से प्रक्षेपित किया जा सकता है और यह स्वतः लक्ष्य तक पहुँचती है।

यह विभिन्न प्लेटफॉर्मों से प्रक्षेपित की जा सकती है:

    • स्थल-आधारित प्रणाली (भारतीय सेना)
    • युद्धपोत (भारतीय नौसेना)
    • लड़ाकू विमान (Su-30 MKI) से वायु-प्रक्षेपित संस्करण
    • पनडुब्बी-प्रक्षेपित संस्करण

प्रमुख प्रकार:

    • 350–400 किमी तक विस्तारित दूरी वाले संस्करण
    • ब्रह्मोस-एनजी (Next Generation)विकासाधीन, हल्के डिज़ाइन और बेहतर स्टील्थ विशेषताओं के साथ

इसकी कम रडार पहचान क्षमता तथा अंतिम चरण में मात्र 10 मीटर की ऊँचाई पर उड़ान भरने की क्षमता इसे शत्रु वायु रक्षा प्रणालियों से बचने में सक्षम बनाती है।

रणनीतिक महत्व:

निर्यात क्षमता एवं रक्षा कूटनीति

फिलीपींस को बिक्री तथा वियतनाम एवं इंडोनेशिया के साथ प्रस्तावित समझौते भारत के वैश्विक उच्च-स्तरीय मिसाइल निर्यात बाजार में प्रवेश को दर्शाते हैं। इससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की विश्वसनीय रक्षा निर्यातक के रूप में स्थिति मजबूत हुई है।

आधुनिक युद्ध में बल गुणक (Force Multiplier)

सब-सोनिक मिसाइलों की तुलना में ब्रह्मोस:

    • लगभग तीन गुना अधिक गति
    • अधिक गतिज ऊर्जा
    • उच्च सटीकता
    • अवरोधन (Interception) की कम संभावना प्रदान करती है।

समुद्री एवं क्षेत्रीय सुरक्षा

ब्रह्मोस विशेष रूप से हिंद महासागर क्षेत्र और दक्षिण चीन सागर में प्रतिरोधक क्षमता को सुदृढ़ करती है तथा भारत की व्यापक सामरिक पहुँच को समर्थन प्रदान करती है।

निष्कर्ष:

वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देशों को ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली का निर्यात वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की बढ़ती उपस्थिति को दर्शाता है तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उसके रणनीतिक प्रभाव को और सुदृढ़ करता है।

 

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