संदर्भ:
हाल ही में ज़ाइडस लाइफसाइंसेज (Zydus Lifesciences) लिमिटेड ने एनीरा (ANYRA) नामक दवा लॉन्च की है, जो 2 मि.ग्रा. एफ्लिबरसेप्ट (Aflibercept) की भारत में विकसित पहली बायोसिमिलर दवा है। यह उपलब्धि विशेष रूप से उन मरीजों के लिए महत्वपूर्ण है जो लंबे समय तक रहने वाली गंभीर नेत्र-बीमारियों से पीड़ित हैं और जिनमें समय पर उपचार न मिलने पर स्थायी दृष्टि जाने का खतरा रहता है। इस पहल से महंगी जैविक दवाओं तक भारतीय मरीजों की पहुँच पहले की तुलना में अधिक आसान और किफायती होगी।
बायोसिमिलर क्या होते हैं और ये क्यों महत्वपूर्ण हैं?
-
-
- बायोसिमिलर ऐसी जैविक दवाएँ होती हैं जो पहले से स्वीकृत मूल जैविक दवाओं के अत्यंत समान होती हैं। इनकी सुरक्षा, गुणवत्ता और प्रभावशीलता में चिकित्सकीय रूप से कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं पाया जाता।
- साधारण जेनेरिक दवाओं के विपरीत, बायोसिमिलर का विकास एक जटिल और वैज्ञानिक रूप से उन्नत प्रक्रिया है। इसके लिए आधुनिक जैव-प्रौद्योगिकी, विशेष कोशिका-रेखा (सेल लाइन) का विकास, बड़े पैमाने पर नियंत्रित उत्पादन तथा कठोर क्लिनिकल परीक्षणों की आवश्यकता होती है। इसलिए इनका निर्माण तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण और संसाधन-सघन होता है।
- बायोसिमिलर ऐसी जैविक दवाएँ होती हैं जो पहले से स्वीकृत मूल जैविक दवाओं के अत्यंत समान होती हैं। इनकी सुरक्षा, गुणवत्ता और प्रभावशीलता में चिकित्सकीय रूप से कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं पाया जाता।
-
सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए महत्व:
-
-
- दीर्घकालिक रेटिना रोग “जैसे आयु-संबंधी मैक्युलर डिजनरेशन (AMD), डायबिटिक मैक्युलर एडीमा (DME) और रेटिनल वेन ऑक्लूज़न (RVO)” में प्रायः आँख के अंदर बार-बार इंजेक्शन देने पड़ते हैं। यह उपचार लंबी अवधि तक चलता है और काफी महंगा हो सकता है, जिससे मरीजों और स्वास्थ्य प्रणाली दोनों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है।
- एनीरा (ANYRA) का स्वदेशी निर्माण उपचार की लागत को कम करने और इसकी उपलब्धता बढ़ाने में सहायक होगा। इससे मरीज नियमित रूप से उपचार जारी रख सकेंगे और रोकी जा सकने वाली अंधता के मामलों में कमी लाने में मदद मिलेगी।
- भारत में वृद्धजन आबादी लगातार बढ़ रही है और मधुमेह के मामलों की संख्या भी अधिक है। ऐसी स्थिति में सस्ती और प्रभावी जैविक दवाओं की उपलब्धता नेत्र-चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा सभी वर्गों तक समान स्वास्थ्य सुविधा सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
- दीर्घकालिक रेटिना रोग “जैसे आयु-संबंधी मैक्युलर डिजनरेशन (AMD), डायबिटिक मैक्युलर एडीमा (DME) और रेटिनल वेन ऑक्लूज़न (RVO)” में प्रायः आँख के अंदर बार-बार इंजेक्शन देने पड़ते हैं। यह उपचार लंबी अवधि तक चलता है और काफी महंगा हो सकता है, जिससे मरीजों और स्वास्थ्य प्रणाली दोनों पर आर्थिक दबाव बढ़ता है।
-
व्यापक प्रभाव:
-
-
- यह पहल भारत के बायोफार्मास्यूटिकल क्षेत्र को नई मजबूती प्रदान करती है और यह दर्शाती है कि देश जटिल जैविक दवाओं के अनुसंधान, विकास और निर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
- इसके माध्यम से भारत वैश्विक बायोसिमिलर बाजार में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत कर सकता है, आयातित जैविक दवाओं पर निर्भरता घटा सकता है और समग्र स्वास्थ्य व्यय को कम करने में योगदान दे सकता है।
- नीतिगत दृष्टिकोण से यह कदम सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने, नवाचार-आधारित विकास को प्रोत्साहित करने तथा विभिन्न सामाजिक-आर्थिक वर्गों तक उन्नत उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्यों के अनुरूप है।
- यह पहल भारत के बायोफार्मास्यूटिकल क्षेत्र को नई मजबूती प्रदान करती है और यह दर्शाती है कि देश जटिल जैविक दवाओं के अनुसंधान, विकास और निर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
-
निष्कर्ष:
एनीरा (ANYRA) का लॉन्च भारत में उन्नत रेटिना उपचार को अधिक सुलभ और किफायती बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं परिवर्तनकारी पहल है। यह कदम सार्वजनिक स्वास्थ्य लक्ष्यों को सशक्त करता है, देश की जैव-प्रौद्योगिकी क्षमता को मजबूत बनाता है और यह संकेत देता है कि भारतीय दवा कंपनियाँ अब उच्च-मूल्य जैविक दवाओं के क्षेत्र में भी वैश्विक स्तर पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रही हैं।
