होम > Blog

Blog / 03 Nov 2026

बिहार संग्रहालय को वैश्विक स्तर पर 9वाँ और एशिया में पहला स्थान मिला

संदर्भ:

हाल ही में, पटना स्थित बिहार संग्रहालय ने जर्मन यात्रा गाइड एवं डिजिटल पत्रिका वर्थ अ जर्नी (Worth a Journey) द्वारा प्रकाशित विश्व के 100 सर्वश्रेष्ठ संग्रहालयों की सूची 2026 (World's 100 Best Museums 2026) में वैश्विक स्तर पर 9वाँ और एशिया में पहला स्थान प्राप्त किया है। यह वैश्विक शीर्ष 100 में शामिल होने वाला भारत का एकमात्र संग्रहालय है। इसने न्यूयॉर्क के मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट (10वाँ स्थान) और पेरिस के लूव्र संग्रहालय (31वाँ स्थान) को भी पीछे छोड़ दिया है।

बिहार संग्रहालय के बारे में:

पटना के बेली रोड पर स्थित यह संग्रहालय वर्ष 2017 में पूरी तरह से संचालित हुआ। इसे जापानी वास्तुकार फुमिहिको माकी (Fumihiko Maki) ने मुंबई स्थित ओपोलिस आर्किटेक्ट्स (Opolis Architects) के सहयोग से डिजाइन किया है। लगभग 13.9 एकड़ क्षेत्र में फैला यह संग्रहालय पुरातात्त्विक अवशेषों, मूर्तियों, सिक्कों, पांडुलिपियों और लोक कलाओं के माध्यम से पाषाण काल से लेकर आधुनिक समय तक बिहार के इतिहास को प्रदर्शित करता है।

      • प्रमुख आकर्षण एवं संग्रह:
        • संग्रहालय के प्रमुख आकर्षणों में दीदारगंज यक्षी, कुरकिहार की कांस्य प्रतिमाएँ, बौद्ध मूर्तियाँ, ऐतिहासिक पांडुलिपियाँ और क्षेत्रीय लोक कलाएँ शामिल हैं।
        • दीदारगंज यक्षी मौर्य काल से संबंधित एक प्रसिद्ध आदमकद मूर्ति है, जिसे चुनार के पॉलिश किए हुए बलुआ पत्थर के एक ही टुकड़े से तराशा गया है।
        • संग्रहालय में बच्चों के लिए एक विशेष दीर्घा (Children's Gallery) भी है। इसके अतिरिक्त, यहाँ कालक्रम के आधार पर बनाई गई विभिन्न दीर्घाएँ बिहार की ऐतिहासिक यात्रा को प्रस्तुत करती हैं।
      • विश्व के सर्वश्रेष्ठ संग्रहालयों की रैंकिंग 2026:
        • वर्थ अ जर्नी (Worth a Journey) के अनुसार, मेक्सिको के म्यूजियो नैशनल डी एंट्रोपोलॉजिया (Museo Nacional de Antropología) ने पहला स्थान प्राप्त किया, जबकि स्पेन का म्यूजियो डेल प्राडो (Museo del Prado) दूसरे स्थान पर रहा।
        • डेनमार्क के लुइसियाना म्यूजियम ऑफ मॉडर्न आर्ट (Louisiana Museum of Modern Art) को तीसरा स्थान मिला, जबकि बिहार संग्रहालय ने नौवाँ स्थान प्राप्त किया।
        • इस रैंकिंग में संग्रहालयों के संग्रह, आगंतुकों के अनुभव, बुनियादी ढाँचे और प्रत्यक्ष मूल्यांकन (On-ground Assessments) को आधार बनाया जाता है।

बिहार का ऐतिहासिक महत्त्व:

      • बिहार ने भारत के इतिहास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्राचीन मगध मौर्य और गुप्त साम्राज्यों का केंद्र था। पाटलिपुत्र एक महत्त्वपूर्ण साम्राज्यिक राजधानी के रूप में प्रसिद्ध था।
      • बोधगया भगवान गौतम बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति स्थल के रूप में जाना जाता है, जबकि नालंदा प्राचीन काल में उच्च शिक्षा का एक प्रसिद्ध केंद्र था। इस क्षेत्र ने जैन धर्म तथा बौद्ध कला एवं वास्तुकला के विकास में भी महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।

संग्रहालयों की परिभाषा एवं संवैधानिक ढाँचा:

संग्रहालय गैर-लाभकारी संस्थाएँ होती हैं, जो शिक्षा और जनभागीदारी के उद्देश्य से मूर्त एवं अमूर्त सांस्कृतिक विरासत का संग्रह, संरक्षण, अनुसंधान और प्रदर्शन करती हैं।

      • अनुच्छेद 49: राज्य को राष्ट्रीय महत्त्व के स्मारकों और वस्तुओं की रक्षा करने का निर्देश देता है।
      • अनुच्छेद 51A(f): नागरिकों का यह मौलिक कर्तव्य निर्धारित करता है कि वे भारत की समन्वित सांस्कृतिक विरासत का मूल्यांकन एवं संरक्षण करें।
      • प्राचीन वस्तुएँ एवं कला निधि अधिनियम, 1972 (Antiquities and Art Treasures Act, 1972): यह प्राचीन वस्तुओं के व्यापार को विनियमित करता है तथा उनके अवैध निर्यात और तस्करी को रोकने में सहायता करता है।

भारत के प्रमुख संग्रहालय संस्थान:

भारत के प्रमुख संग्रहालय एवं संबंधित संस्थानों में निम्नलिखित शामिल हैं:

      • राष्ट्रीय संग्रहालय (National Museum) एवं राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय (National Gallery of Modern Art): दोनों नई दिल्ली में स्थित हैं और भारत की ऐतिहासिक एवं आधुनिक कलात्मक विरासत के संरक्षण तथा प्रदर्शन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
      • इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय (Indira Gandhi Rashtriya Manav Sangrahalaya): भोपाल में स्थित यह संग्रहालय जनजातीय एवं लोक संस्कृतियों को प्रदर्शित करता है।
      • राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद (National Council of Science Museums-NCSM): यह विज्ञान केंद्रों के माध्यम से वैज्ञानिक जागरूकता को बढ़ावा देती है।

निष्कर्ष:

बिहार संग्रहालय को मिली वैश्विक पहचान भारत की समृद्ध सभ्यतागत विरासत को दर्शाती है। संग्रहालयों को शिक्षा, अनुसंधान, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के सक्रिय केंद्रों के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, ताकि भारत की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित किया जा सके।

 

Aliganj Gomti Nagar Prayagraj