संदर्भ:
हाल ही में, भूटान विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र का पहला देश बन गया है, जिसने कुत्तों से फैलने वाले मानव रेबीज़ को सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त कर दिया है। WHO ने सितंबर 2026 में भूटान की इस उपलब्धि को मान्यता दी। भूटान में रेबीज़ से संबंधित अंतिम मानव मृत्यु जून 2023 में दर्ज की गई थी।
रेबीज़ क्या है?
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- रेबीज़ एक विषाणुजनित जूनोटिक रोग है, जो रेबीज़ वायरस के कारण होता है। यह एक न्यूरोट्रोपिक आरएनए वायरस है, जो लिसावायरस (Lyssavirus) वंश से संबंधित है। इसका मुख्य रूप से संक्रमण संक्रमित पशुओं की लार के माध्यम से होता है, विशेषकर काटने और खरोंचने से।
- एक बार जब रेबीज़ के नैदानिक लक्षण दिखाई देने लगते हैं, तो यह रोग लगभग हमेशा घातक होता है। हालांकि, समय पर टीकाकरण और एक्सपोज़र के बाद उपचार के माध्यम से इसे पूरी तरह रोका जा सकता है।
- रेबीज़ एक विषाणुजनित जूनोटिक रोग है, जो रेबीज़ वायरस के कारण होता है। यह एक न्यूरोट्रोपिक आरएनए वायरस है, जो लिसावायरस (Lyssavirus) वंश से संबंधित है। इसका मुख्य रूप से संक्रमण संक्रमित पशुओं की लार के माध्यम से होता है, विशेषकर काटने और खरोंचने से।
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WHO द्वारा मान्यता:
WHO के अनुसार, किसी देश में कुत्तों से फैलने वाले रेबीज़ को सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त माना जाता है, जब:
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- लगातार कम-से-कम दो वर्षों तक कुत्तों से फैलने वाले रेबीज़ से कोई मानव मृत्यु न हो; और
- देश में रेबीज़ के पुनः उभरने और संचरण को रोकने की पर्याप्त क्षमता मौजूद हो।
- इस प्रकार, यहाँ उन्मूलन (elimination) का अर्थ प्रकृति से रेबीज़ वायरस को पूरी तरह समाप्त करना नहीं है, बल्कि कुत्तों से फैलने वाले रेबीज़ के कारण होने वाली मानव मृत्यु को समाप्त करना है।
- लगातार कम-से-कम दो वर्षों तक कुत्तों से फैलने वाले रेबीज़ से कोई मानव मृत्यु न हो; और
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भूटान की रणनीति:
भूटान ने एक व्यापक वन हेल्थ (One Health) दृष्टिकोण अपनाया, जिसमें मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के बीच परस्पर संबंध को स्वीकार किया गया।
इसकी रणनीति में शामिल थे:
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- कुत्तों का बड़े पैमाने पर टीकाकरण
- वैज्ञानिक तरीके से कुत्तों की आबादी का प्रबंधन
- निरंतर रोग निगरानी
- संदिग्ध मामलों की त्वरित जाँच
- पोस्ट-एक्सपोज़र प्रोफिलैक्सिस (PEP) तक आसान पहुँच
- समुदाय में जागरूकता और भागीदारी
- स्वास्थ्य एवं पशु चिकित्सा अधिकारियों के बीच समन्वय
- स्थानीय सरकारों और स्वयंसेवकों की भागीदारी
- इस दृष्टिकोण ने मानव स्वास्थ्य सेवाओं को पशु चिकित्सा सेवाओं और समुदाय-स्तरीय हस्तक्षेपों के साथ एकीकृत करने में मदद की।
- कुत्तों का बड़े पैमाने पर टीकाकरण
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भारत में रेबीज़ का बोझ:
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- भारत में रेबीज़ अभी भी एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता है। मानव रेबीज़ संक्रमणों में कुत्तों के काटने की भूमिका सबसे अधिक है। बच्चे और संवेदनशील समुदाय विशेष रूप से जोखिम में हैं, क्योंकि उपचार में देरी, स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुँच और टीकाकरण की अपूर्णता जैसी समस्याएँ मौजूद हैं।
- भारत का लक्ष्य 2030 तक कुत्तों से फैलने वाले रेबीज़ के कारण होने वाली मानव मृत्यु को शून्य करना है।
- भारत में रेबीज़ अभी भी एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता है। मानव रेबीज़ संक्रमणों में कुत्तों के काटने की भूमिका सबसे अधिक है। बच्चे और संवेदनशील समुदाय विशेष रूप से जोखिम में हैं, क्योंकि उपचार में देरी, स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुँच और टीकाकरण की अपूर्णता जैसी समस्याएँ मौजूद हैं।
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भारत के लिए महत्व:
भूटान की सफलता भारत के लिए कई महत्वपूर्ण सबक प्रदान करती है।
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- पहला, रेबीज़ नियंत्रण में कुत्तों के बड़े पैमाने पर टीकाकरण के माध्यम से स्रोत पर रोकथाम पर ध्यान देना आवश्यक है।
- दूसरा, स्थानीय निकायों द्वारा संचालित Animal Birth Control (ABC) कार्यक्रमों के बेहतर क्रियान्वयन की आवश्यकता है।
- तीसरा, विशेष रूप से ग्रामीण और स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों में रेबीज़ वैक्सीन और इम्युनोग्लोबुलिन की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
- भारत को स्वास्थ्य विभागों, पशु चिकित्सा अधिकारियों, नगर निकायों और प्रयोगशालाओं के बीच समन्वित निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत करने की आवश्यकता है।
- पहला, रेबीज़ नियंत्रण में कुत्तों के बड़े पैमाने पर टीकाकरण के माध्यम से स्रोत पर रोकथाम पर ध्यान देना आवश्यक है।
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वन हेल्थ दृष्टिकोण:
रेबीज यह दर्शाता है कि मानव स्वास्थ्य को पशु स्वास्थ्य और पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य से अलग करके नहीं देखा जा सकता। रेबीज का प्रभावी उन्मूलन अलग-अलग विभागों द्वारा अलग-अलग प्रयास करने के बजाय अंतर-क्षेत्रीय समन्वय (Inter-sectoral Coordination) की मांग करता है।
आगे की राह:
भारत को व्यापक स्तर पर कुत्तों का टीकाकरण, वैज्ञानिक तरीके से कुत्तों की आबादी का प्रबंधन, सभी के लिए PEP (Post-Exposure Prophylaxis) की सार्वभौमिक उपलब्धता, एकीकृत निगरानी प्रणाली और सामुदायिक भागीदारी पर आधारित एक सतत रणनीति अपनानी चाहिए। पड़ोसी देशों के साथ सीमा-पार सहयोग (Cross-border Cooperation) भी महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष:
भूटान की उपलब्धि यह दर्शाती है कि जब सरकार, स्वास्थ्य विशेषज्ञ, पशु चिकित्सक और समुदाय मिलकर कार्य करते हैं, तो रेबीज का उन्मूलन संभव और टिकाऊ दोनों है। भारत द्वारा भूटान के वन हेल्थ मॉडल को अपनाने से वर्ष 2030 तक कुत्तों से फैलने वाले मानव रेबीज से होने वाली मौतों को शून्य करने के लक्ष्य की दिशा में प्रयासों को काफी मजबूती मिल सकती है।

