संदर्भ:
हाल ही में, केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने कोच्चि स्थित 'भवसागर' (Bhavasagara) रेफरल सेंटर को गहरे समुद्र के जीवों (Deep-Sea Fauna) के लिए राष्ट्रीय भंडार के रूप में मान्यता दी है। यह कदम भारत के समुद्री जैव विविधता संरक्षण ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
कानूनी एवं संस्थागत ढांचा
‘भवसागर’ को यह मान्यता जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 39 के अंतर्गत प्रदान की गई है। यह केंद्र ‘समुद्री सजीव संसाधन एवं पारिस्थितिकी केंद्र’ (CMLRE), कोच्चि के अंतर्गत संचालित होता है।
इस मान्यता के साथ-
- केंद्र को समुद्री जैविक संसाधनों के संग्रह, प्रलेखन एवं संरक्षण का विधिक अधिकार प्राप्त हो गया है।
- यह राष्ट्रीय स्तर पर गहरे समुद्र के जीवों का आधिकारिक भंडार एवं संदर्भ केंद्र बन गया है।
'भवसागर' की प्रमुख विशेषताएं-
1. विशाल संग्रह: वर्तमान में इस केंद्र में 3,500 से अधिक वर्गीकृत और जियो-रेफरेंस वाले नमूने मौजूद हैं। इनमें गहरे समुद्र के अकशेरुकी जीव (जैसे मोलस्क और आर्थ्रोपोड) और कशेरुकी जीव (जैसे शार्क और किरणें) शामिल हैं।
2. नमूनों (Specimens) का संरक्षक: यह केंद्र उन विशिष्ट नमूनों का आधिकारिक संरक्षक होगा जिनके आधार पर नई प्रजातियों का वर्णन किया जाता है। यह टैक्सोनोमिक शोध के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
3. डिजिटल और आनुवंशिक डेटा: शारीरिक नमूनों के अलावा, यह भंडार भविष्य के शोध के लिए DNA अनुक्रमों और संबंधित जैविक डेटा को भी सुरक्षित रखेगा।
प्रजातियों का सांख्यिकीय विवरण (2021 तक)-
· कुल दर्ज प्रजातियां: 4,371
· प्रोटिस्टा (Protista): 1,032 प्रजातियां (इसमें मुख्य रूप से एककोशिकीय जीव शामिल हैं जो पारिस्थितिकी तंत्र की आधारभूत कड़ी हैं)।
· ऐनिमेलिया (Animalia): 3,339 प्रजातियां (इसमें स्पंज, कोरल, केकड़े, मछलियाँ और समुद्री स्तनधारी जैसे बहुकोशिकीय जीव शामिल हैं)।
भारत के लिए महत्व-
1. गहरे समुद्र मिशन (Deep Ocean Mission) को गति:
भारत सरकार का 'डीप ओशन मिशन' नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy) का एक प्रमुख स्तंभ है। 'भवसागर' को राष्ट्रीय भंडार घोषित करने से समुद्र के अप्रयुक्त संसाधनों के वैज्ञानिक अन्वेषण और उनके सतत उपयोग के लिए एक ठोस आधार मिलेगा।
2. समुद्री जैव विविधता का संरक्षण:
गहरा समुद्र (200 मीटर से अधिक गहरा) पृथ्वी के सबसे कम खोजे गए क्षेत्रों में से एक है। एक समर्पित राष्ट्रीय भंडार होने से लुप्तप्राय समुद्री प्रजातियों की पहचान करने और उनके संरक्षण के लिए प्रभावी नीतियां बनाने में मदद मिलेगी।
3. अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं:
यह पहल 'सतत विकास के लिए महासागर विज्ञान के संयुक्त राष्ट्र दशक (2021-2030)' के लक्ष्यों के अनुरूप है। यह वैश्विक मंच पर समुद्री संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, विशेष रूप से 'राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र से बाहर की जैव विविधता' (BBNJ) संधि के संदर्भ में।
4. अनुसंधान और नवाचार:
यह केंद्र शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और नीति निर्माताओं के लिए एक ज्ञान केंद्र के रूप में कार्य करेगा। यह न केवल नई प्रजातियों की खोज को सुगम बनाएगा, बल्कि समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को समझने में भी मदद करेगा।
निष्कर्ष-
'भवसागर' को राष्ट्रीय भंडार के रूप में नामित करना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है, बल्कि यह भारत की वैज्ञानिक संप्रभुता और समुद्री संसाधनों के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक है। जैसे-जैसे भारत एक 'प्रमुख समुद्री शक्ति' बनने की ओर अग्रसर है, ऐसे संस्थान समुद्री संसाधनों के 'उपयोग' और 'संरक्षण' के बीच संतुलन बनाने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
