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Blog / 04 Jul 2026

बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम और बैटरी ‘हैकिंग’ ऐप

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारत सरकार ने एप्पल और गूगल को बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (Battery Management System-BMS) ऐप (जैसे BAT-BMS, Lossigy और Epoch Li-ion) को अपने ऐप स्टोर से हटाने का निर्देश दिया है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसे ऐप्स का उपयोग करके जानबूझकर किसी वाहन को निष्क्रिय (Disable) करना सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (Information Technology Act, 2000) के अंतर्गत कंप्यूटर संबंधी अपराध (Computer-related Offence) माना जा सकता है। ऐसे अपराध के लिए जुर्माने के साथ-साथ अधिकतम तीन वर्ष तक के कारावास का भी प्रावधान है।

      • यह कदम सोशल मीडिया पर वायरल उन वीडियो के बाद उठाया गया, जिनमें कुछ लोग ब्लूटूथ (Bluetooth) सक्षम ई-रिक्शों को चलते समय दूर से ही बंद (Disable) करते हुए दिखाई दिए। इस घटना ने यात्रियों की सुरक्षा, साइबर सुरक्षा तथा कम लागत वाले इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicles-EVs) में उपयोग होने वाली बैटरी प्रणालियों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएँ उत्पन्न कर दी हैं।

बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) क्या है?

      • बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) एक इलेक्ट्रॉनिक नियंत्रण इकाई (Electronic Control Unit) है, जो विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों में प्रयुक्त लिथियम-आयन (Lithium-ion) जैसी रिचार्जेबल बैटरियों की निगरानी एवं प्रबंधन करती है।
      • यह बैटरी के वोल्टेज, विद्युत धारा (Current), तापमान, चार्जिंग चक्र (Charging Cycles) तथा बैटरी की समग्र स्थिति (Battery Health) पर निगरानी रखता है।
      • साथ ही, BMS बैटरी की विभिन्न सेल के बीच संतुलन बनाए रखता है, ओवरचार्जिंग एवं ओवरहीटिंग से सुरक्षा प्रदान करता है, बैटरी का जीवनकाल बढ़ाता है तथा इलेक्ट्रिक वाहनों के सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करता है।

Battery Management System and E-Rickshaw Hack

यह "हैक" कैसे काम करता है?

यह कोई अत्यधिक जटिल साइबर हमला (Cyberattack) नहीं है, बल्कि कुछ बैटरी प्रणालियों में मौजूद कमजोर अथवा लगभग अनुपस्थित सुरक्षा व्यवस्थाओं का दुरुपयोग है।

      • वैध उपयोगिता (Legitimate Utility): BAT-BMS ऐप मूल रूप से एक चीनी प्रौद्योगिकी कंपनी द्वारा विकसित किया गया था, ताकि उपयोगकर्ता बैटरी का वोल्टेज, तापमान, चार्जिंग स्थिति तथा बैटरी की कार्यक्षमता (Battery Health) की निगरानी कर सकें।
      • ओपन ब्लूटूथ स्कैनिंग: कम लागत वाले अनेक लिथियम बैटरी पैकों में पासवर्ड सुरक्षा नहीं होती या वे डिफ़ॉल्ट (Default) पासवर्ड का ही उपयोग करते हैं। ऐसी स्थिति में लगभग 15 मीटर की ब्लूटूथ सीमा के भीतर मौजूद कोई भी व्यक्ति ऐप की सहायता से बैटरी को खोजकर उससे जुड़ सकता है।
      • किल स्विच’ (Kill Switch) को सक्रिय करना: बैटरी से कनेक्ट होने के बाद ऐप उपयोगकर्ता को नियंत्रण प्रदान करता है, जिसमें बैटरी के डिस्चार्ज फ़ंक्शन को बंद करने का विकल्प भी शामिल होता है।
      • वाहन का तुरंत रुक जाना: चूंकि डिस्चार्ज सर्किट ही मोटर को विद्युत आपूर्ति करता है, इसलिए इसे बंद करते ही मोटर को विद्युत मिलनी बंद हो जाती है और ई-रिक्शा तुरंत रुक जाता है।

प्रभाव एवं सड़क सुरक्षा संबंधी जोखिम:

हालाँकि सोशल मीडिया पर इसे एक मज़ाक (Prank) के रूप में प्रस्तुत किया गया, लेकिन इसके परिणाम अत्यंत गंभीर हो सकते हैं:

      • आजीविका पर प्रभाव: ई-रिक्शा चालकों को अपना वाहन लंबी दूरी तक धक्का लगाकर ले जाना पड़ सकता है या मरम्मत पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है, जिससे उनकी दैनिक आय प्रभावित होती है।
      • सड़क सुरक्षा के लिए खतरा: यदि चलते हुए यातायात के बीच ई-रिक्शा अचानक रुक जाए, तो पीछे से आने वाले वाहनों की टक्कर (Rear-end Collision) या वाहन के पलटने जैसी दुर्घटनाएँ हो सकती हैं।
      • सीमित दायरा: यह सुरक्षा कमजोरी केवल उन ब्लूटूथ-सक्षम लिथियम बैटरी पैकों को प्रभावित करती है, जिनमें सुरक्षा व्यवस्था कमजोर है। सामान्यतः लेड-एसिड बैटरियाँ तथा प्रीमियम इलेक्ट्रिक वाहन एन्क्रिप्टेड (Encrypted) एवं पासवर्ड-संरक्षित BMS का उपयोग करते हैं, इसलिए वे इस प्रकार की समस्या से सुरक्षित रहते हैं।

निष्कर्ष:

भारत में इलेक्ट्रिक गतिशीलता (Electric Mobility) के तीव्र विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा को भी वाहन सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाना आवश्यक हो गया है। सुरक्षित बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS), सुदृढ़ नियामकीय मानक, स्वदेशी प्रौद्योगिकी का विकास तथा उपभोक्ताओं में जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है, ताकि स्वच्छ एवं हरित परिवहन की दिशा में भारत का संक्रमण सुरक्षित, विश्वसनीय तथा उभरते डिजिटल खतरों के प्रति अधिक सक्षम बनाया जा सके।

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