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Blog / 26 Nov 2025

चंडीगढ़ को अनुच्छेद 240 में लाने का प्रस्ताव — संवैधानिक अपडेट | Dhyeya IAS

संदर्भ:

हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2025 लाने की योजना नहीं बना रही है। माना जा रहा था कि यह विधेयक चंडीगढ़ को अनुच्छेद 240 के अंतर्गत लाने से संबंधित है। इस जानकारी के सामने आते ही पंजाब में तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ शुरू हो गईं और 1966 के पंजाब पुनर्गठन अधिनियम के बाद से चंडीगढ़ की स्थिति को लेकर चली आ रही ऐतिहासिक चिंताएँ फिर से सामने आ गईं।

अनुच्छेद 240 के बारे में:

·        अनुच्छेद 240 भारत के राष्ट्रपति को कुछ केंद्र शासित प्रदेशों के शांतिपूर्ण प्रशासन, प्रगति और उत्तम शासनहेतु नियम (Regulations) बनाने का अधिकार प्रदान करता है।

·        राष्ट्रपति द्वारा बनाए गए ऐसे नियम यदि उस केंद्र शासित प्रदेश पर लागू होते हों, तो वे संसद द्वारा बनाए गए कानूनों में संशोधन करने या उन्हें निरस्त करने की शक्ति भी रखते हैं।

·        वर्तमान में अनुच्छेद 240 अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव पर लागू है तथा पुडुचेरी पर भी तब लागू होता है जब उसकी विधानसभा निलंबित रहती है।

चंडीगढ़ की वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था:

चंडीगढ़ एक केंद्र शासित प्रदेश है, जिसकी अपनी कोई विधानसभा नहीं है।

         1984 से पंजाब के राज्यपाल चंडीगढ़ के प्रशासक की भूमिका भी निभा रहे हैं, यही व्यवस्था वर्तमान में लागू है।

         चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा की साझा राजधानी होने के कारण, दोनों राज्यों के कई कानून यहाँ लागू होते हैं।

प्रस्तावित बदलाव में क्या शामिल हो सकता है?

रिपोर्टों के अनुसार संविधान (131वां संशोधन) विधेयक निम्न संभावित प्रावधानों से संबंधित माना जा रहा था:

1.        चंडीगढ़ को अनुच्छेद 240 के दायरे में लाना:

·        इससे चंडीगढ़ भी उन केंद्र शासित प्रदेशों की श्रेणी में आ जाएगा, जहाँ राष्ट्रपति सीधे नियामक कानून बनाने की शक्ति रखते हैं।

·        इसके परिणामस्वरूप वर्तमान व्यवस्था में परिवर्तन संभव है और पंजाब के राज्यपाल के स्थान पर एक स्वतंत्र प्रशासक या उप-राज्यपाल (Lieutenant Governor) की नियुक्ति की संभावना बन सकती है।

2.      केंद्र सरकार के नियंत्रण में वृद्धि:

·        अनुच्छेद 240 के तहत बनाए गए विनियम (Regulations) संसद द्वारा पारित कानूनों के समान प्रभाव रखते हैं। इसका अर्थ यह होगा कि चंडीगढ़ से संबंधित विषयों पर केंद्र सरकार को अलग से संसद में कानून पारित कराने की आवश्यकता नहीं रहेगी।

·        इससे केंद्र सरकार के लिए स्थानीय कानूनों का निर्माण और कार्यान्वयन अधिक तेज़, सरल और प्रशासनिक रूप से प्रभावी हो सकेगा।

मुख्य प्रभाव और चुनौतियाँ:

1.      संगठीय (Federal) तनाव और राजनीतिक संवेदनशीलता

         पंजाब और हरियाणा इस संभावित बदलाव को चंडीगढ़ पर अपने प्रभाव में कमी के रूप में देख सकते हैं। कई राजनीतिक नेताओं ने पहले ही चिंता व्यक्त की है कि यह कदम चंडीगढ़ पर उनके ऐतिहासिक अधिकार को कमजोर कर सकता है।

         इसे केंद्रीकरणकी दिशा में एक प्रयास के रूप में भी माना जा सकता है, जिसके परिणामस्वरूप संघीय सिद्धांतों के आधार पर विरोध उभरने की संभावना है।

2.     लोकतांत्रिक जवाबदेही

         चंडीगढ़ में अपनी विधानसभा न होने के कारण, यदि राष्ट्रपति विनियम बनाते हैं तो चंडीगढ़ के निवासियों की प्रत्यक्ष लोकतांत्रिक भागीदारी तथा नियंत्रण और अधिक सीमित हो सकता है।

3.     प्रशासनिक दक्षता (Efficiency)

         राष्ट्रपति के विनियम शहरी विकास, बुनियादी ढाँचे और प्रशासनिक सुधारों से संबंधित निर्णयों के क्रियान्वयन को तेज़ गति प्रदान कर सकते हैं।

         इससे नौकरशाही देरी कम हो सकती है, क्योंकि चंडीगढ़ से जुड़े मामलों के लिए प्रत्येक बार संसद में अलग कानून पारित कराने की आवश्यकता नहीं होगी।

निष्कर्ष:

यदि चंडीगढ़ को अनुच्छेद 240 के दायरे में लाया जाता है, तो उसकी संवैधानिक प्रशासनिक संरचना में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन होगा। वर्तमान व्यवस्था (जिसमें पंजाब का राज्यपाल प्रशासक की भूमिका निभाते हैं) उसके स्थान पर राष्ट्रपति के सीधे नियमन वाली प्रणाली लागू हो सकती है। यह परिवर्तन प्रशासनिक स्पष्टता, निर्णय-प्रक्रिया की तीव्रता और अधिक केंद्रीकृत शक्ति-संरचना को बढ़ावा दे सकता है। हालाँकि, इसके साथ लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व, संघीय संतुलन और राजनीतिक सहमति से जुड़े गंभीर प्रश्न भी उभरते हैं, विशेषकर इसलिए क्योंकि चंडीगढ़ पर पंजाब का ऐतिहासिक और भावनात्मक संबंध वर्तमान में भी अत्यंत संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है।

 

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